LPU हिंसा मामले में हाई कोर्ट सख्त, फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट के साथ प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर भी उठाए सवाल

LPU हिंसा मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फर्जी पोस्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर सवाल उठाए। मामले में नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने LPU में अफवाहों के बाद हुए हंगामे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जांच केवल पोस्ट डालने वाले तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और झूठी सूचना के स्रोत की भी पड़ताल जरूरी है।

चंडीगढ़: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में कथित तौर पर झूठी सोशल मीडिया सूचना फैलने के बाद हुए हंगामे के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सवाल किया कि यदि किसी फर्जी पोस्ट से हिंसा और जान-माल का नुकसान होता है, तो क्या केवल पोस्ट डालने वाले व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त है। अदालत ने प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और सूचना के स्रोत की जांच पर भी जोर दिया।

फर्जी पोस्ट से हिंसा भड़कने पर हाई कोर्ट की चिंता

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इंटरनेट पर ऐसी घटना की झूठी जानकारी फैलाना, जो वास्तव में हुई ही न हो, गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकता है। ऐसी सूचना तेजी से फैलने पर लोगों में गुस्सा बढ़ सकता है और स्थिति हिंसक हो सकती है। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

यह टिप्पणी पंजाब सरकार की ओर से लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कथित अफवाह के बाद हुए हंगामे की जानकारी दिए जाने के बाद आई। अदालत ने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई केवल उस व्यक्ति तक सीमित रहनी चाहिए जिसने पोस्ट अपलोड की, या फिर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

खंडपीठ ने संकेत दिया कि जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि झूठी सूचना किसने तैयार की, उसे किसने प्रसारित किया और उसके पीछे कौन लोग शामिल थे। अदालत के अनुसार, किसी घटना की पुष्टि किए बिना बड़े स्तर पर गलत जानकारी फैलने से अचानक अशांति पैदा हो सकती है।

अभिव्यक्ति की आजादी और जानबूझकर झूठ फैलाने में अंतर

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया। अदालत ने कहा कि नागरिकों को अपनी राय रखने, आलोचना करने और विचार व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जानबूझकर ऐसी झूठी सूचना फैलाना, जिसका उद्देश्य लोगों को भड़काना या तनाव पैदा करना हो, उसे सामान्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समान नहीं माना जा सकता।

अदालत के सामने चितकारा और LPU में लगातार दो दिनों के दौरान हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। समाचार के अनुसार, 25 सितंबर को चितकारा में छात्राओं की आत्महत्या की घटना के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी थी। इसके अगले दिन LPU में एक पुरुष कर्मचारी द्वारा छात्रा से दुष्कर्म किए जाने की झूठी सूचना इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने की बात सामने आई। याचिकाकर्ता ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने का दावा किया, जिसकी जांच जरूरी बताई गई।

नौ गिरफ्तार, सूचना के स्रोत की जांच के निर्देश

पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि कथित पोस्ट डालने और बाद में उसे हटाने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली गई है। उसका बयान सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने रखा गया। राज्य सरकार के अनुसार, मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो बाहरी व्यक्ति भी शामिल बताए गए हैं, जो पिज्जा डिलीवरी कंपनी के कर्मचारी हैं।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उनकी पहचान कर मामले की जांच करने की जरूरत बताई।

हाई कोर्ट ने पंजाब को यह पता लगाने का निर्देश भी दिया कि दोनों घटनाओं में एक ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। अदालत ने पंजाब के सीमावर्ती राज्य होने का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत सूचना के जरिए बड़े स्तर पर अशांति पैदा होने की आशंका को गंभीरता से लेना चाहिए।

प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए व्यवस्था पर जोर

अदालत ने कहा कि यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई गई झूठी सूचना से हिंसा या संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि जांच केवल पोस्ट अपलोड करने वाले व्यक्ति तक सीमित न हो, बल्कि सूचना के स्रोत और उसे फैलाने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आए।

हाई कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई सोमवार को निर्धारित की है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की अगली टिप्पणियों पर नजर रहेगी।

Leave a comment