आगरा में खेरिया मोड़-ईदगाह ROB 90 दिन बंद, पांच लाख की आबादी होगी प्रभावित; वैकल्पिक रास्तों पर बढ़ेगा दबाव

आगरा में खेरिया मोड़-ईदगाह रेलवे ओवरब्रिज 17 अक्टूबर से 90 दिन बंद रहेगा। 10 करोड़ रुपये से पुनर्निर्माण होगा। जानें वैकल्पिक रास्ते और ट्रैफिक पर असर।
आगरा में खेरिया मोड़-ईदगाह ROB 90 दिन बंद, पांच लाख की आबादी होगी प्रभावित; वैकल्पिक रास्तों पर बढ़ेगा दबाव
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आगरा में खेरिया मोड़ और ईदगाह को जोड़ने वाले रेलवे ओवरब्रिज (ROB) पर 17 अक्टूबर 2026 से सड़क यातायात बंद रखने की व्यवस्था की गई है। पुल के पुनर्निर्माण और जरूरी अनुरक्षण कार्य के कारण अगले 90 दिनों तक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे ने काम पूरा करने के लिए 15 जनवरी 2027 तक का लक्ष्य रखा है। इस पुल से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, इसलिए इसके बंद होने का असर खेरिया मोड़, अर्जुन नगर, शाहगंज और आसपास के इलाकों की आवाजाही पर पड़ने की आशंका है। आगरा के व्यस्त मार्गों में शामिल खेरिया मोड़-ईदगाह रेलवे ओवरब्रिज लंबे समय से लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन रहा है। यह पुल शहर के कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ता है और इसके रास्ते से नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, विद्यार्थी, स्थानीय निवासी और दूसरे वाहन चालक रोजाना आवागमन करते हैं। पुल बंद होने से अब इन लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इससे यात्रा की दूरी और समय दोनों बढ़ सकते हैं। खासकर सुबह कार्यालय जाने और शाम को घर लौटने के समय यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है।

रेलवे ने इस पुल को बंद करने का फैसला उसकी पुरानी और जर्जर स्थिति को देखते हुए लिया है। खेरिया मोड़ रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 1970 में हुआ था। लगभग 56 साल पुराने इस पुल की निर्धारित आयु पूरी हो चुकी है। रेलवे के हिस्से में आने वाले पुल के दो स्पैन को बदलने और जरूरी निर्माण कार्य कराने का निर्णय लिया गया है। पहले पुराने गर्डरों को बदलकर मरम्मत करने की योजना थी, लेकिन पुल की स्थिति को देखते हुए अब इसके पुनर्निर्माण और अनुरक्षण का काम कराया जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।

पुल के पुराने हिस्सों की स्थिति को लेकर रेलवे की ओर से सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। पुल पर लगे स्टील गर्डरों में जंग लगने और डेक स्लैब के कंक्रीट के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं। ऐसे में रेल परिचालन और सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा के लिहाज से निर्माण कार्य आवश्यक माना गया है। रेलवे का उद्देश्य निर्धारित समय में काम पूरा करके पुल को फिर से यातायात के लिए उपलब्ध कराना है।

पुल बंद होने के दौरान वाहनों के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है। वाहन चालकों को अर्जुन नगर तिराहे से बारह खंभा डबल फाटक मार्ग होते हुए रेलवे समपार फाटक संख्या 75 यानी एलसी-75 से गुजरना होगा। प्रशासन और रेलवे की ओर से लोगों से निर्धारित रास्ते का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। वाहन चालकों को घर से निकलने से पहले अपने रास्ते की योजना बनाने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी जा रही है।

हालांकि, वैकल्पिक मार्ग को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता भी सामने आई है। लोगों का कहना है कि बारह खंभा मार्ग पर पहले से ही सड़क और यातायात संबंधी समस्याएं हैं। ऐसे में खेरिया मोड़-ईदगाह पुल बंद होने के बाद यदि वैकल्पिक रास्ते को पूरी तरह व्यवस्थित नहीं किया गया, तो जाम की समस्या बढ़ सकती है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने मांग की है कि पुल बंद करने से पहले वैकल्पिक मार्ग की मरम्मत कराई जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और यातायात नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए।

इस मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि बारह खंभा मार्ग को दुरुस्त करने के बाद ही यातायात व्यवस्था को पूरी तरह वैकल्पिक रास्ते पर निर्भर किया जाए। लोगों की चिंता यह है कि एक प्रमुख पुल बंद होने से आसपास के बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाएगा। इससे रोजमर्रा के काम के लिए निकलने वाले लोगों के साथ-साथ दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी परेशानी हो सकती है।

भारी वाहनों के लिए भी अलग रास्ते की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। रेलवे पुल बंद रहने के दौरान भारी वाहनों को मलपुरा-रोहता नहर और ग्वालियर रोड की ओर से गुजरने के लिए निर्देशित किया जा सकता है। इससे शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और वैकल्पिक मार्गों पर यातायात का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वाहन चालकों को यात्रा से पहले जारी यातायात निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए, क्योंकि मार्ग व्यवस्था और प्रतिबंध प्रशासन के निर्देशों के अनुसार लागू होंगे

इस निर्माण कार्य का प्रभाव केवल सड़क यातायात तक सीमित नहीं है। पुल रेलवे ट्रैक के ऊपर स्थित होने के कारण निर्माण के दौरान रेल परिचालन को भी ध्यान में रखना होगा। रेलवे को गर्डर और पुल के संबंधित हिस्सों पर काम करने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था तथा ट्रेनों के संचालन के साथ तालमेल बनाना पड़ेगा। अधिकारियों की योजना के अनुसार, काम के दौरान रेल परिचालन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। यात्रियों को हालांकि किसी ट्रेन के समय में बदलाव की जानकारी के लिए रेलवे की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए।

आगरा में खेरिया मोड़-ईदगाह पुल का बंद होना आने वाले तीन महीनों में यातायात प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। एक ओर पुराने पुल का पुनर्निर्माण शहर की दीर्घकालिक सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर निर्माण के दौरान लोगों को होने वाली असुविधा कम करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। वैकल्पिक सड़कों की मरम्मत, अतिक्रमण हटाने, संकेतक लगाने और व्यस्त चौराहों पर यातायात पुलिस की तैनाती से लोगों को राहत मिल सकती है।

रेलवे ने 15 जनवरी 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि निर्माण कार्य तय समय में पूरा होता है, तो तीन महीने बाद इस मार्ग पर यातायात बहाल होने की उम्मीद है। तब तक खेरिया मोड़, अर्जुन नगर, शाहगंज और आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनानी होगी। प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्माण कार्य सुरक्षित तरीके से पूरा हो और आम लोगों को कम से कम परेशानी उठानी पड़े।

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