AI चैटबॉट अब बच्चों की भावनात्मक जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। 24 घंटे उपलब्ध रहने और सहानुभूतिपूर्ण जवाब देने वाली इन सेवाओं से बच्चों में भावनात्मक निर्भरता, गलत सलाह और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।
Tech: बच्चों के साथ AI चैटबॉट की लंबी बातचीत अब सिर्फ तकनीक का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह Child Safety से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन रही है। जहां पहले बच्चे परेशानी में माता-पिता, दोस्तों या काउंसलर का सहारा लेते थे, वहीं अब AI साथी उन्हें हर समय उपलब्ध रहते हैं। इससे बच्चों की भावनात्मक निर्भरता, मानसिक सुरक्षा और AI कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
बच्चों की भावनात्मक जिंदगी में AI की बढ़ती मौजूदगी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब पढ़ाई, जानकारी हासिल करने और मनोरंजन तक सीमित नहीं है। AI चैटबॉट बच्चों के साथ लगातार बातचीत करने वाले डिजिटल साथी की भूमिका भी निभाने लगे हैं। ये सिस्टम दिन-रात उपलब्ध रहते हैं और यूजर की बात का तुरंत जवाब देते हैं। कई बार उनकी भाषा भी ऐसी होती है, जिससे सामने वाले को लगता है कि उसकी भावनाओं को समझा जा रहा है।
यही सुविधा बच्चों के मामले में एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती है। अगर कोई बच्चा अपनी परेशानी, अकेलेपन या भावनात्मक तनाव के बारे में लगातार AI से बात करता है, तो वह धीरे-धीरे chatbot को एक भरोसेमंद साथी मान सकता है। लंबे समय तक ऐसी बातचीत होने पर बच्चे का AI पर भावनात्मक भरोसा बढ़ सकता है।
Emotional Dependence से लेकर गलत सलाह तक खतरा
AI chatbot की सबसे बड़ी सीमाओं में से एक यह है कि वह इंसान की तरह भावनाओं और परिस्थितियों को वास्तव में अनुभव नहीं करता। वह उपलब्ध जानकारी और अपने सिस्टम के आधार पर जवाब तैयार करता है। ऐसे में किसी संवेदनशील स्थिति में दिया गया गलत या अनुचित जवाब बच्चे पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

मसलन, अगर कोई बच्चा मानसिक परेशानी, पारिवारिक समस्या, डर या किसी अन्य गंभीर मुद्दे को लेकर chatbot से सलाह मांगता है, तो जवाब का प्रभाव सामान्य सवाल की तुलना में कहीं ज्यादा हो सकता है। बच्चे कम उम्र और सीमित अनुभव के कारण AI के जवाब को सही या अंतिम सलाह भी समझ सकते हैं।
इसके अलावा, AI companions के साथ लगातार बातचीत से वास्तविक रिश्तों से दूरी और डिजिटल साथी पर निर्भरता जैसी चिंताएं भी सामने आती हैं। इसलिए बच्चों के लिए बनाए गए AI systems में उम्र के हिसाब से सुरक्षा उपाय, संवेदनशील विषयों पर मजबूत safeguards और जरूरत पड़ने पर माता-पिता या विशेषज्ञों तक पहुंच की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है।
Adam Raine मामले के बाद बढ़ी बहस
अमेरिका में 2025 में 16 वर्षीय Adam Raine की suicide से मौत के बाद AI और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि ChatGPT के साथ उनकी महीनों तक बातचीत हुई और इसमें suicide से जुड़े विषय भी सामने आए। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि chatbot ने कथित तौर पर farewell note तैयार करने में मदद की। इसके बाद परिवार ने OpenAI के खिलाफ wrongful-death lawsuit दायर किया।
यह मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, इस मामले ने यह महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाया है कि vulnerable बच्चों के साथ AI systems की बातचीत के दौरान कंपनियों की जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।
भारत में भी जरूरी है स्पष्ट सुरक्षा ढांचा
AI companions का इस्तेमाल बढ़ने के साथ भारत में भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नए सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं। केवल उम्र की पुष्टि करना पर्याप्त है या नहीं, इस पर भी विचार की जरूरत है। इसके साथ बच्चों के data privacy, harmful content, parental oversight और sensitive conversations के लिए अलग safety mechanisms पर ध्यान देना जरूरी होगा।
AI बच्चों के लिए पढ़ाई और जानकारी का उपयोगी साधन हो सकता है, लेकिन emotional support के मामले में इसकी सीमाओं को समझना बेहद जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए माता-पिता, स्कूल, AI कंपनियों और regulators के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां तय करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकता है।












