जीएसटी काउंसिल की गुरुवार को होने वाली अहम बैठक में रिफंड, पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने से जुड़े कई नियमों में सुधार को मंजूरी मिल सकती है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
GST Council Meeting: जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों के लिए आसान और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार कई अहम बदलावों पर विचार कर रही है। गुरुवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में रिफंड, जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े कई प्रस्तावों पर फैसला हो सकता है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना, अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम करना और जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक डिजिटल व सुविधाजनक बनाना है। अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े व्यवसायों तक को रोजमर्रा के टैक्स अनुपालन में राहत मिल सकती है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में मिल सकती है राहत
सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल इनपुट टैक्स क्रेडिट पर मौजूदा कुछ पाबंदियों में ढील देने पर विचार कर सकती है। इसके तहत सामान्य कारोबारी खर्चों को भी ITC के दायरे में लाने का प्रस्ताव हो सकता है। इनपुट टैक्स क्रेडिट कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए वे कारोबार के दौरान खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं पर भुगतान किए गए जीएसटी को अपनी टैक्स देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकते हैं। नियमों में प्रस्तावित बदलाव से कंपनियों और कारोबारियों के लिए टैक्स लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करना आसान हो सकता है।
एक राज्य में रजिस्ट्रेशन से पूरे देश में कारोबार?
बैठक में जीएसटी पंजीकरण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी चर्चा में आ सकता है। इसके तहत कारोबारियों को एक ही राज्य में जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेकर देशभर में कारोबार करने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए अनुपालन और पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक जटिल हो सकती हैं।
ऐसे में एकीकृत पंजीकरण की व्यवस्था लागू होने पर कंपनियों का प्रशासनिक बोझ कम होने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रस्ताव के अंतिम स्वरूप और शर्तों पर काउंसिल के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

तीन कार्यदिवस में GST Registration
सरकार जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को भी तेज करने पर जोर दे रही है। सरकार के मुताबिक, 61 फीसदी करदाताओं का जीएसटी पंजीकरण अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना तीन कार्यदिवस के भीतर किया जा रहा है। नई व्यवस्था में प्रक्रिया को और अधिक स्वचालित बनाने की कोशिश की जा सकती है। इससे नए कारोबार शुरू करने वालों और पहले से कारोबार कर रही कंपनियों को पंजीकरण के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जीएसटी रिटर्न से जुड़ी प्रक्रिया में भी बदलाव का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था में ऐसी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया जा सकता है, जिसमें रिटर्न में किसी बदलाव का असर संबंधित खरीदार के लेजर में स्वतः दर्ज हो जाए। इससे कारोबारियों को बार-बार डेटा का मिलान करने की जरूरत कम हो सकती है और टैक्स रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ सकती है। डिजिटल प्रक्रिया मजबूत होने से रिटर्न दाखिल करने में होने वाली गलतियों और विवादों को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
छोटे मामलों में नोटिस से राहत
जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों को नोटिस और जांच से जुड़ी परेशानियों को कम करने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत एक तय सीमा से कम के मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य टैक्स अधिकारियों और कारोबारियों, दोनों का समय बचाना है। छोटे मूल्य के मामलों को लेकर होने वाली अनावश्यक कार्रवाई कम होने से कारोबारी अपने मुख्य व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
रिफंड व्यवस्था में विस्तार भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, सेवाओं, संयंत्र और मशीनरी पर भुगतान किए गए कर को भी रिफंड के दायरे में लाने पर विचार किया जा सकता है। अगर यह बदलाव मंजूर होता है तो उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी गतिविधियों में सेवाओं और पूंजीगत उपकरणों पर जीएसटी भुगतान का बड़ा हिस्सा शामिल होता है।











