AI से बदल सकती है हार्ट हेल्थ की जांच, समय रहते मिल सकेगा खतरे का संकेत

मायो क्लीनिक के शोध में AI ने कैल्शियम स्कैन और दिल के फैट से हार्ट डिजीज का खतरा पहले पहचानने की क्षमता दिखाई। बिना अतिरिक्त टेस्ट बेहतर अनुमान मिलेगा।

AI तकनीक की मदद से अब हार्ट डिजीज का खतरा सामान्य स्कैन के आधार पर पहले ही पहचाना जा सकता है। मायो क्लीनिक के शोध में पाया गया कि AI कैल्शियम स्कैन और दिल के आसपास फैट का विश्लेषण करके बेहतर जोखिम अनुमान दे सकता है, जिससे बिना अतिरिक्त टेस्ट के समय पर इलाज संभव हो सकेगा।

AI in Heart Disease Detection: अमेरिका के मायो क्लीनिक में किए गए एक शोध में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हार्ट डिजीज का खतरा पहले ही पहचाना जा सकता है। यह अध्ययन कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन पर आधारित है, जिसे आमतौर पर हृदय रोगों के शुरुआती संकेतों के लिए किया जाता है। यह रिसर्च वैश्विक स्तर पर हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में नए बदलाव की ओर इशारा करती है, जिसमें मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त टेस्ट के अधिक सटीक जोखिम का आकलन मिल सकता है। AI न केवल कैल्शियम डिपॉजिट का विश्लेषण करता है, बल्कि दिल के आसपास जमा फैट को भी समझकर भविष्य में संभावित जोखिम का अनुमान लगाता है।

स्कैन डेटा से पहले ही पकड़ में आएगा हार्ट डिजीज का खतरा

मायो क्लीनिक के शोधकर्ताओं ने कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन पर AI आधारित विश्लेषण किया है। इस स्कैन में दिल की नसों में जमे कैल्शियम की पहचान की जाती है, जो हार्ट डिजीज का शुरुआती संकेत माना जाता है।

AI ने इस डेटा को आगे बढ़कर विश्लेषित करते हुए दिल के आसपास जमा फैट की मात्रा को भी आंका। यह फैट सूजन और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है, जिसे पहले सामान्य स्कैन से समझना मुश्किल था।

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बिना अतिरिक्त टेस्ट के मिल सकेगा सटीक जोखिम का अंदाजा

इस तकनीक की खास बात यह है कि मरीज को कोई अतिरिक्त टेस्ट नहीं करवाना पड़ेगा। जो स्कैन पहले से रूटीन चेकअप का हिस्सा होते हैं, उन्हीं से AI जोखिम का अधिक सटीक आकलन कर सकता है।

इससे डॉक्टरों को मरीज की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी और इलाज को पहले से ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा।

अभी शुरुआती चरण में है रिसर्च

हालांकि यह तकनीक अभी विकास के शुरुआती चरण में है और इस पर बड़े स्तर पर परीक्षण और अध्ययन की जरूरत है। विशेषज्ञ यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसे क्लिनिकल प्रैक्टिस में कैसे लागू किया जाए।

फिर भी यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में AI डॉक्टरों की निर्णय क्षमता को मजबूत करेगा और छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिमों को पहचानने में मदद करेगा।

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