भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में सरकार एक अहम विधेयक लाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव के तहत भारतीय संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके।
नई दिल्ली: भारत की संसदीय व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार लोकसभा में मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य देश की बढ़ती जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व को संतुलित करना और लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए प्रस्तावित ढांचे में राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय की गई हैं। यह बदलाव लागू होने पर भारत की संसदीय संरचना पहले से अधिक व्यापक और प्रतिनिधिक हो जाएगी।
संविधान संशोधन विधेयक की तैयारी
यह प्रस्ताव संविधान में संशोधन से जुड़ा हुआ है और इसके लिए जल्द ही संसद में विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 81 में बदलाव किया जाएगा, जो लोकसभा की संरचना और सदस्य संख्या से संबंधित है। प्रस्ताव के अनुसार—
- राज्यों से अधिकतम 815 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाएंगे
- केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत शामिल किए जाएंगे
इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी हिस्सों को जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में कदम

नए प्रस्ताव में सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या का निर्धारण केवल उन आंकड़ों के आधार पर होगा, जिनकी आधिकारिक रूप से पुष्टि की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि बदलती जनसंख्या संरचना को देखते हुए परिसीमन प्रक्रिया को आधुनिक और व्यावहारिक बनाना जरूरी है, ताकि हर राज्य और क्षेत्र को समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना भी है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें यह प्रावधान शामिल है कि—
- लोकसभा में महिलाओं के लिए 1/3 सीटें आरक्षित होंगी
- राज्य विधानसभाओं में भी यही व्यवस्था लागू होगी
- दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों को भी इसमें शामिल किया जाएगा
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा
यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 239AA, 330A, 332A और 334A के तहत लागू किए जाने की योजना है। सरकार का कहना है कि अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। ऐसे में महिला आरक्षण को लागू करने में देरी न हो, इसलिए मौजूदा जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है।
नीति निर्माताओं का मानना है कि यह कदम भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाएगा। इससे न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्माण में उनकी भूमिका भी मजबूत होगी।







