AI टैलेंट के मामले में कौन है सबसे आगे? रिपोर्ट में जानें भारत की रैंकिंग

AI टैलेंट के मामले में कौन है सबसे आगे? रिपोर्ट में जानें भारत की रैंकिंग

भारत में AI और डिजिटल स्किलिंग की रफ्तार ने रोजगार-योग्यता को नई ऊंचाई दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक Employability दर 56.35% तक पहुंच गई है। बढ़ते AI टैलेंट, नई शिक्षा नीतियों और गिग इकॉनमी के विस्तार से भारत अब वैश्विक स्किल इकॉनमी में अग्रणी बनता दिख रहा है।

AI Skilling in India: भारत तेजी से दुनिया के शीर्ष AI टैलेंट हब्स में अपनी जगह बना रहा है। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, देश की Employability दर 2024 के 54.81% से बढ़कर 2025 में 56.35% हो गई है। रिपोर्ट बताती है कि AI और डिजिटल ट्रेनिंग के बढ़ते अवसर, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लचीले वर्क मॉडल की वजह से भारत की स्किल इकॉनमी मजबूत हो रही है। आने वाले वर्षों में देश AI-आधारित नौकरियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

भारत में बढ़ रही है AI स्किलिंग और रोजगार-योग्यता

AI और डिजिटल स्किलिंग की वजह से भारत में रोजगार-योग्यता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि देश की Employability दर 2024 के 54.81% से बढ़कर 2025 में 56.35% तक पहुंच गई है। यानी अब अधिक युवा ऐसे कौशल हासिल कर रहे हैं जो उद्योगों की मांग के अनुरूप हैं।

इसके पीछे कई अहम कारण हैं जिनमें AI और डिजिटल ट्रेनिंग में तेजी, टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं की भागीदारी और महिलाओं की बढ़ती भूमिका शामिल है। खास बात यह है कि महिलाओं की रोजगार-योग्यता दर अब 54% तक पहुंच गई है, जो पुरुषों से भी अधिक है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत में कार्यबल की विविधता और तकनीकी दक्षता दोनों ही मजबूत हो रही हैं।

AI टैलेंट के मामले में भारत की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में AI टैलेंट के मामले में शीर्ष देशों में से एक बनने की ओर अग्रसर है। देश में अब लगभग 90% कर्मचारी किसी न किसी रूप में जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। आईटी क्षेत्र की लगभग 70% कंपनियां और बैंकिंग, फाइनेंस तथा इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर की लगभग 50% कंपनियां भर्ती प्रक्रियाओं में AI-आधारित सिस्टम का उपयोग कर रही हैं।

साल 2026-27 में कंपनियों का Hiring Intent 29% से बढ़कर 40% होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब है कि अगले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, फिनटेक, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और हेल्थकेयर सेक्टर इस वृद्धि के सबसे बड़े केंद्र होंगे।

गिग इकॉनमी और नई शिक्षा नीतियों का असर

भारत में गिग और फ्रीलांस वर्कफोर्स तेजी से बढ़ रही है। यह संख्या 2030 तक 2.35 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट-बेस्ड हायरिंग में पिछले साल ही 38% की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में 72% नौकरियां स्थायी हैं, जबकि गिग और थर्ड-पार्टी नौकरियों की हिस्सेदारी 16% तक पहुंच चुकी है। यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब लचीले कार्य मॉडल की ओर बढ़ रही है।

साथ ही, AICTE की नई पहलें, जैसे Project PRACTICE और AI & Climate Cells, ने तकनीकी शिक्षा में बड़ा बदलाव लाया है। अब शिक्षा केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग, उद्योगों से सहयोग और stackable certificates पर केंद्रित हो रही है। यह बदलाव छात्रों को रोजगार के लिए अधिक तैयार बना रहा है और इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ रहा है।

भारत की स्किल इकॉनमी क्यों है भविष्य की कुंजी

AI और डिजिटल स्किल्स ने भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बना दिया है। आने वाले वर्षों में, भारत न केवल AI टैलेंट सप्लाई करने वाला देश बनेगा, बल्कि नई तकनीकों को अपनाने में भी अग्रणी रहेगा। रिपोर्ट बताती है कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा AI टैलेंट बेस बन सकता है।

सरकार की स्किलिंग नीतियां, उद्योगों का सहयोग और युवाओं की सीखने की गति — ये तीनों मिलकर भारत को "स्किल्ड सुपरपावर" में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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