Air India के नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर टाटा समूह में मतभेद सामने आए हैं। मौजूदा सीईओ Campbell Wilson के इस्तीफे के बाद कंपनी के नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
बिजनेस न्यूज़: टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन के पद छोड़ने की घोषणा के बाद कंपनी के नए CEO की नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उत्तराधिकारी के चयन पर अंतिम निर्णय अभी तक नहीं हो पाया है, जिसके चलते कंपनी अंतरिम प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन एयर इंडिया के संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए एक अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी के गठन की योजना बना रहे हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब एयरलाइन वित्तीय दबाव, परिचालन चुनौतियों और पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही है।
अंतरिम प्रबंधन संभाल सकता है जिम्मेदारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी में एन. चंद्रशेखरन के साथ एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप सिंह खरोला तथा कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। कैंपबेल विल्सन के सितंबर तक पद छोड़ने की संभावना है। उनके कार्यकाल के दौरान एयर इंडिया ने बेड़े के आधुनिकीकरण, नए विमानों के बड़े ऑर्डर और सेवा सुधार जैसी कई दीर्घकालिक योजनाओं की शुरुआत की थी। अब कंपनी नए नेतृत्व के चयन तक परिचालन की निरंतरता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
नए CEO की दौड़ में निपुण अग्रवाल का नाम
एयर इंडिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी (Chief Commercial Officer) निपुण अग्रवाल को नए CEO पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वर्ष 2022 से वह एयरलाइन के वाणिज्यिक परिचालन का नेतृत्व कर रहे हैं और इससे पहले टाटा संस, बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक तथा बीपी जैसी वैश्विक संस्थाओं में वरिष्ठ भूमिकाएं निभा चुके हैं।
हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनके नाम को लेकर समूह के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। इन रिपोर्टों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्तावित नियुक्ति पर अपनी आपत्तियां व्यक्त की हैं। कंपनी की ओर से इस विषय पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है।
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परिचालन सुधार पर विशेष जोर
टाटा समूह एयर इंडिया के परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदीप सिंह खरोला को परिचालन दक्षता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने में सहयोग देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है।
बताया जा रहा है कि कंपनी के शीर्ष नेतृत्व ने एयर इंडिया के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा शुरू कर दी है। प्राथमिकता परिचालन स्थिरता, ग्राहक अनुभव में सुधार, लागत नियंत्रण और एयरलाइन को दीर्घकालिक लाभप्रदता की दिशा में ले जाने पर केंद्रित है।
बढ़ते वित्तीय दबाव का सामना
एयर इंडिया पिछले कुछ समय से बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार की चुनौतियों का सामना कर रही है। उपलब्ध वित्तीय जानकारी के अनुसार, एयरलाइन का घाटा पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिससे कंपनी के पुनर्गठन और वित्तीय सुधार की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। एयर इंडिया में टाटा समूह की बहुमत हिस्सेदारी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस भी कंपनी में रणनीतिक भागीदार के रूप में हिस्सेदार है। दोनों साझेदार एयरलाइन के दीर्घकालिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने के लिए निवेश और सुधार योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एयर इंडिया की वित्तीय चुनौतियों के पीछे केवल आंतरिक कारण ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर विमान ईंधन (Jet Fuel) की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे परिचालन लागत बढ़ी है। इसके अलावा, पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को वैकल्पिक और लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है।











