अमेरिका में भारतीय इंजीनियर पर पत्नी की हत्या का आरोप, 9 महीने की जांच के बाद गिरफ्तारी

अमेरिका में भारतीय मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। नौ महीने की जांच के बाद कार्रवाई की, आरोपी ने आरोपों से इनकार

अमेरिका में भारतीय मूल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि डिजिटल सबूत और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई। आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है और मामला अदालत में विचाराधीन है।

वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय मूल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी पत्नी की कथित हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि विस्तृत फोरेंसिक जांच, डिजिटल रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को हिरासत में लिया गया। आरोपी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। मामला अब अमेरिकी न्यायालय में विचाराधीन है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पर प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिग्री) हत्या का आरोप लगाया गया है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं, तो उसे कठोर सजा, जिसमें उम्रकैद भी शामिल हो सकती है, का सामना करना पड़ सकता है।

आरोपी और पीड़िता की पहचान

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी की पहचान 30 वर्षीय अविनाश नार्ने के रूप में हुई है, जो भारत के तेलंगाना राज्य का निवासी है और अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत था। मृतक महिला की पहचान 27 वर्षीय राजिता सब्बिनेनी के रूप में हुई है। दोनों की शादी 5 जून 2025 को भारत में पारिवारिक सहमति से हुई थी। विवाह के बाद दोनों अमेरिका में साथ रह रहे थे।

शादी के कुछ महीनों बाद मिला पत्नी का शव

मामले की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई, जब अविनाश ने स्थानीय पुलिस को फोन कर बताया कि उसकी पत्नी बाथरूम में बंद है और दरवाजा नहीं खोल रही। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां राजिता मृत अवस्था में मिलीं। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कुछ समय के लिए घर से बाहर गया था और लौटने पर पत्नी को बाथरूम में बंद पाया। हालांकि, पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और तकनीकी डेटा की गहन जांच शुरू कर दी।

स्मार्ट लॉक और डिजिटल रिकॉर्ड बने जांच का अहम हिस्सा

जांच के दौरान अधिकारियों ने अपार्टमेंट के स्मार्ट लॉक, सुरक्षा प्रणाली और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों से यह संकेत मिला कि कथित घटना के दौरान घर में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के प्रमाण नहीं मिले। इसी आधार पर जांच का फोकस घर के भीतर मौजूद परिस्थितियों पर केंद्रित किया गया। इसके बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों ने मामले को संदिग्ध मृत्यु से हत्या की दिशा में जांचना शुरू किया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया दम घुटने का कारण 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि महिला की मौत गला दबाए जाने से दम घुटने के कारण हुई। इस निष्कर्ष के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी। अधिकारियों ने डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की भी जांच की।

जांच में सामने आए व्यक्तिगत संबंधों के पहलू

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी का भारत में रहने वाली एक महिला के साथ विवाह से पहले से संबंध था। पुलिस का दावा है कि शादी के बाद भी दोनों के बीच संपर्क जारी रहा। जांच के दौरान कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल संचार का विश्लेषण किया गया, जिसमें कथित रूप से घटना वाले दिन कई बार बातचीत होने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों का यह भी कहना है कि जांच के दौरान ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनमें आरोपी द्वारा पत्नी की मृत्यु के बाद एक तस्वीर भारत में मौजूद महिला को भेजे जाने का उल्लेख है। इन दावों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान की जाएगी।

चैट रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बने

पुलिस ने दंपति के बीच हुए संदेशों और चैट रिकॉर्ड की भी जांच की। जांच एजेंसियों के अनुसार, महिला ने कुछ संदेशों में पति द्वारा तैयार किए गए पेय पदार्थों के स्वाद को लेकर शिकायत की थी। हालांकि, इन संदेशों और मृत्यु के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल संचार किसी भी आपराधिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन उसका कानूनी मूल्यांकन न्यायालय द्वारा किया जाता है।

करीब नौ महीने चली जांच

इस मामले में पुलिस ने लगभग नौ महीने तक फोरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन किया। इसके बाद जुलाई 2026 में आरोपी से दोबारा पूछताछ की गई और उसे प्रथम श्रेणी हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और अदालत ने उसकी जमानत के लिए 50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 47 करोड़ रुपये) का बॉन्ड निर्धारित किया है।

आरोपी ने आरोपों से किया इनकार

अविनाश नार्ने ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। अमेरिकी कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक निर्दोष माना जाता है। इसलिए अंतिम निर्णय न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

डिजिटल साक्ष्य की बढ़ती भूमिका

हाल के वर्षों में आपराधिक मामलों की जांच में स्मार्ट लॉक, सीसीटीवी, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल संचार महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उभरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक जांच एजेंसियों को घटनाओं के क्रम को समझने में मदद करती है, लेकिन प्रत्येक साक्ष्य की वैधता और विश्वसनीयता का अंतिम मूल्यांकन अदालत ही करती है।

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