भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक स्तर पर अहम बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, जहां मंगलवार को भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता का 25वां दौर आयोजित होगा।
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तथा द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक होने जा रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे, जहां वह भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के शीर्ष राजनयिक और विदेश मंत्री वांग यी से होने की संभावना है।
यह उच्चस्तरीय बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब दोनों एशियाई देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में संवाद जारी है। बैठक में सीमा की मौजूदा स्थिति, सैनिकों की तैनाती, सीमा प्रबंधन और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रमुख रहने की उम्मीद है।
LAC पर तनाव कम करना बैठक की बड़ी प्राथमिकता
भारत और चीन के संबंधों में जून 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख के कई संवेदनशील क्षेत्रों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती की थी। इस घटनाक्रम का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के व्यापक राजनीतिक और आर्थिक संबंधों पर भी पड़ा।
इसके बाद से भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य सीमा पर टकराव की स्थिति को कम करना, सैनिकों के बीच दूरी बढ़ाना और संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखना रहा है। डोभाल और वांग यी की प्रस्तावित बैठक इसी व्यापक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Special Representatives वार्ता क्यों है खास?

भारत और चीन के बीच Special Representatives तंत्र केवल सैन्य स्तर पर उत्पन्न होने वाली तत्काल परिस्थितियों पर चर्चा करने का मंच नहीं है। इसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के राजनीतिक और रणनीतिक समाधान की संभावनाओं को तलाशना भी है। इस तंत्र के तहत दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि सीमा विवाद से जुड़े जटिल मुद्दों पर व्यापक दृष्टिकोण के साथ बातचीत करते हैं। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से वरिष्ठ नेतृत्व इस संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसलिए बीजिंग में होने वाली बातचीत को केवल LAC पर मौजूदा हालात तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत-चीन संबंधों के भविष्य के लिए भी अहम माना जा रहा है।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति प्रमुख विषय हो सकती है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती, तनाव कम करने के उपाय, डिसएंगेजमेंट से जुड़े लंबित पहलू और भविष्य में किसी भी तरह की अप्रत्याशित स्थिति को रोकने के लिए सीमा प्रबंधन व्यवस्था पर भी चर्चा होने की संभावना है।
दोनों पक्ष सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक संवाद को महत्वपूर्ण मानते रहे हैं। हालांकि, भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है। ऐसे में डोभाल-वांग यी बैठक में यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा कि सीमा पर भरोसा बढ़ाने और स्थायी शांति की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
द्विपक्षीय संबंधों के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख आर्थिक और सामरिक शक्तियां हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीति पर भी पड़ता है। सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों में सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल रहा है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर सीधा संवाद तनाव कम करने और गलतफहमियों को दूर करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।











