कानपूर-एक तरफ देशभर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ एक दलित बस्ती की हकीकत इस उत्सव पर सवाल खड़े कर रही है। यहां के लोग मजबूरी में कीचड़ और गंदे पानी से भरे तालाब के बीच अंबेडकर जयंती मनाने की बात कह रहे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी बस्ती में लंबे समय से जलजमाव की समस्या बनी हुई है। बारिश हो या नहीं, सड़कों पर हमेशा गंदा पानी और कीचड़ जमा रहता है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रोजाना इस समस्या से जूझना पड़ता है।
अंबेडकर जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो लोगों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने ऐलान किया कि वे इसी कीचड़ और पानी भरे इलाके में कार्यक्रम करेंगे, ताकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान उनकी समस्या की ओर जाए।
बस्ती के लोगों ने अपने क्षेत्र के विधायक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विधायक को यह तक पता नहीं है कि उनकी बस्ती में अंबेडकर जी की प्रतिमा कहां स्थित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, लेकिन उसके बाद क्षेत्र की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
लोगों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो नाली की सफाई होती है और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था है। इसके चलते बस्ती में गंदगी और बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए।
अंबेडकर जयंती, जो समानता और अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है, उसी दिन इस तरह की स्थिति सामने आना समाज के लिए एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। यह दिखाता है कि आज भी कई लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
फिलहाल, इस विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आने की बात कर रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है और बस्ती के लोगों को राहत मिलती है या नहीं










