बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प परंपरा लंबे समय से चर्चा में रही है, जिसके अनुसार राज्य में कर्पूरी ठाकुर को छोड़कर कोई भी उप मुख्यमंत्री अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच सका है। यह तथ्य बिहार की सत्ता राजनीति में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में देखा जाता है।
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा में है। राज्य में लंबे समय से चली आ रही एक अनोखी राजनीतिक परंपरा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सवाल यह है कि क्या मौजूदा उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनकर 67 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे? राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या उपमुख्यमंत्री पद से मुख्यमंत्री बनने की ऐतिहासिक “रुकावट” इस बार खत्म होगी।
67 साल पुरानी राजनीतिक परंपरा
बिहार की राजनीति में अब तक यह देखा गया है कि उपमुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेताओं में से केवल एक ही नेता मुख्यमंत्री बन पाए हैं—Karpuri Thakur।1957 में राज्य में पहली बार उपमुख्यमंत्री पद की शुरुआत सत्ता संतुलन के लिए की गई थी। उस समय श्रीकृष्ण सिंह की सरकार में Anugrah Narayan Sinha को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। तब से लेकर अब तक यह पद मुख्य रूप से गठबंधन राजनीति और जातीय संतुलन का हिस्सा रहा है, न कि भविष्य के मुख्यमंत्री तैयार करने का मंच।
सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी सियासी चर्चा
Samrat Choudhary को लेकर राजनीतिक चर्चाएं इसलिए तेज हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उनके आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की लगातार बैठकों ने भी अटकलों को और हवा दी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक सफर: छात्र राजनीति से सत्ता तक
Samrat Choudhary का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है।
- वे 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में आए
- 1999 में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली
- 2000 और 2010 में विधायक चुने गए
- 2014 में राज्य सरकार में मंत्री रहे
- 2018 में उन्होंने राजनीतिक दल परिवर्तन करते हुए नई भूमिका अपनाई
इसके बाद उनकी राजनीतिक स्थिति लगातार मजबूत होती गई और वे राज्य के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री बनने की चुनौती

बिहार की राजनीति में उपमुख्यमंत्री पद को अक्सर “पावर शेयरिंग” का हिस्सा माना गया है। विश्लेषकों के अनुसार, यह पद कई बार गठबंधन संतुलन के लिए बनाया जाता है, न कि नेतृत्व परिवर्तन के लिए। राजनीतिक इतिहास बताता है कि:
- अब तक 10 से अधिक नेता उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं
- केवल Karpuri Thakur ही उपमुख्यमंत्री से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री बने
- कई बड़े नाम उपमुख्यमंत्री रहने के बाद भी शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पाए
- नीतीश कुमार के दौर में सबसे अधिक डिप्टी सीएम
बिहार में सबसे ज्यादा उपमुख्यमंत्री Nitish Kumar के राजनीतिक दौर में बनाए गए। इस दौरान कई प्रमुख नेता इस पद पर रहे, जिनमें शामिल हैं:
- सुशील कुमार मोदी
- तारकिशोर प्रसाद
- रेणु देवी
- विजय कुमार सिन्हा
- Tejashwi Yadav
- Samrat Choudhary
इन सभी नेताओं ने अलग-अलग समय पर गठबंधन राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद हमेशा सत्ता के केंद्र में रहा है, जबकि उपमुख्यमंत्री पद संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोग होता है।








