आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। दोनों नेताओं ने भारत के वैज्ञानिक विकास, मिसाइल कार्यक्रमों और युवाओं को प्रेरित करने में उनके योगदान को याद किया।
अमरावती: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने देश के वैज्ञानिक विकास, प्रौद्योगिकी, मिसाइल कार्यक्रमों और युवाओं को प्रेरित करने में कलाम के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन और विचार आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने तथा देश की प्रगति के लिए काम करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
चंद्रबाबू नायडू ने कलाम को बताया दूरदर्शी व्यक्तित्व
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में डॉ. कलाम को एक असाधारण और दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि कलाम ने भारत के परमाणु और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नायडू ने लोगों से अपील की कि वे डॉ. कलाम के वैज्ञानिक योगदान के साथ-साथ उनके मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति समर्पण को भी याद रखें। उनके अनुसार, कलाम का जीवन देश की सेवा, ज्ञान और जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में रामेश्वरम के लोगों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। रामेश्वरम तमिलनाडु का वह स्थान है, जहां डॉ. कलाम का जन्म हुआ था और जहां से उनकी जीवन यात्रा शुरू हुई।
पवन कल्याण ने संघर्ष से सफलता तक के सफर को किया याद
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साधारण पारिवारिक परिवेश से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि कलाम ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से यह साबित किया कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां किसी व्यक्ति के सपनों की सीमा तय नहीं करतीं।
पवन कल्याण के मुताबिक, डॉ. कलाम का जीवन उन युवाओं के लिए विशेष प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कलाम की यात्रा सिखाती है कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कलाम के आदर्शों को अपनाएं, भारतीय संविधान में निहित मूल्यों का सम्मान करें और देश की सेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाएं।
अखबार बांटने से वैज्ञानिक उपलब्धियों तक का सफर
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, शिक्षा और वैज्ञानिक उपलब्धियों की एक उल्लेखनीय कहानी है। बचपन में उन्होंने परिवार की मदद के लिए अखबार बांटने का काम किया। आगे चलकर उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भारत के अंतरिक्ष तथा रक्षा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पवन कल्याण ने विशेष रूप से स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल SLV-III के विकास में कलाम की भूमिका का उल्लेख किया। इस परियोजना ने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कलाम ने भारत के मिसाइल कार्यक्रमों में भी अहम भूमिका निभाई। अग्नि और पृथ्वी मिसाइल परियोजनाओं से जुड़े उनके कार्य ने उन्हें देश के प्रमुख रक्षा वैज्ञानिकों में शामिल किया। इसके अलावा, भारत के परमाणु परीक्षणों और प्रौद्योगिकी विकास से जुड़े प्रयासों में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
‘विजन 2020’ से विकसित भारत का सपना
डॉ. कलाम केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को लेकर स्पष्ट दृष्टि रखने वाले विचारक भी थे। उन्होंने ‘टेक्नोलॉजी विजन 2020’ के माध्यम से ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत की, जो विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और आर्थिक विकास के क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल करे।
पवन कल्याण ने कहा कि कलाम की सोच आज भी देश के युवाओं के लिए प्रासंगिक है। उनके अनुसार, भारत को वैश्विक स्तर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाने का सपना सामूहिक प्रयासों से ही पूरा किया जा सकता है।
कलाम का मानना था कि देश का विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक सोच भी विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा
डॉ. कलाम को भारत के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में गिना जाता है। उन्हें अक्सर ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’ कहा जाता है, क्योंकि वे विद्यार्थियों और युवाओं के साथ संवाद को विशेष महत्व देते थे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए और उसके बाद भी उन्होंने छात्रों को विज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।
पवन कल्याण ने अपने संदेश में कहा कि कलाम की जीवन यात्रा यह सिखाती है कि कठिनाइयों और असफलताओं को दृढ़ इच्छाशक्ति तथा निरंतर प्रयासों से पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम की विरासत आने वाली पीढ़ियों को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
उनके विचारों का मूल संदेश था कि युवा अपनी क्षमताओं पर भरोसा करें, ज्ञान हासिल करें और अपने काम के जरिए समाज तथा देश के विकास में योगदान दें।
डॉ. कलाम की विरासत आज भी प्रासंगिक
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2002 से 2007 तक उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वर्ष 1997 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
उनकी पहचान एक वैज्ञानिक, शिक्षक, लेखक और प्रेरक वक्ता के रूप में भी रही। वर्ष 2015 में उनका निधन हुआ, लेकिन शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उनके विचार आज भी व्यापक रूप से याद किए जाते हैं।
चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के संदेशों में भी यही भावना दिखाई दी कि डॉ. कलाम की विरासत केवल उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उनका जीवन युवाओं को मेहनत, ईमानदारी, ज्ञान और देश के प्रति समर्पण का महत्व समझाता है।









