रुद्रपुर के कारोबारी रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा के आवास पर आयकर विभाग की टीम ने करीब 48 घंटे तक जांच की। सूत्रों के मुताबिक, बिजनेस डील से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं। मामला मेडिसिटी अस्पताल के अधिग्रहण से जुड़ा बताया जा रहा है।
उत्तराखंड: कारोबारी रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा के आवास पर आयकर विभाग की टीम ने करीब 48 घंटे तक जांच की। सोमवार सुबह शुरू हुई कार्रवाई के बाद टीम बुधवार सुबह लौट गई। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान बिजनेस डील से संबंधित कई दस्तावेज कब्जे में लिए गए। कार्रवाई को रुद्रपुर के मेडिसिटी अस्पताल के अधिग्रहण और उससे जुड़े कथित वित्तीय विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, जांच के उद्देश्य और जब्त दस्तावेजों के संबंध में आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
कारोबारी और डॉक्टर के आवास पर 48 घंटे तक जांच
रुद्रपुर से सटी उत्तर प्रदेश की बत्रा कॉलोनी में कारोबारी रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा के आवास पर सोमवार सुबह आयकर विभाग की टीम पहुंची थी। टीम ने दोनों स्थानों पर जांच की, जो करीब 48 घंटे तक चली। बुधवार सुबह अधिकारी वहां से लौट गए।
कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज और कारोबारी लेनदेन से जुड़े कागजात कब्जे में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने जब्त सामग्री की सूची तैयार की और उसकी प्राप्ति से संबंधित औपचारिकताएं पूरी कीं।
इस कार्रवाई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम भी शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर ईडी की भागीदारी और जांच के दायरे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह, छापे के दौरान नकदी या आभूषण जब्त किए जाने को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मेडिसिटी अस्पताल के अधिग्रहण से जुड़ रहा मामला
इस कार्रवाई को रुद्रपुर स्थित मेडिसिटी अस्पताल के पार्क ग्रुप द्वारा अधिग्रहण से जोड़कर देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अधिग्रहण की प्रक्रिया में भूमिका निभाने वाली एक तीसरी पार्टी के साथ लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया था। बताया जाता है कि इस मामले में कानूनी नोटिस भी भेजे गए, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका।
सूत्रों के मुताबिक, बाद में यह मामला आयकर विभाग और ईडी तक पहुंचा। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इस कार्रवाई और अस्पताल के अधिग्रहण के बीच संबंध को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध को फिलहाल सामने आई जानकारी और सूत्रों के दावों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
अस्पताल के संचालन के दौरान सरकारी योजनाओं के तहत बीमा से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर शिकायत किए जाने की भी चर्चा है। बताया जाता है कि इस पहलू पर ईडी की ओर से जांच की गई है। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के आधिकारिक परिणामों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
जब्त दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच अहम
कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच एजेंसियों को कौन-कौन से दस्तावेज मिले और उनका संबंध किन वित्तीय लेनदेन से है। बिजनेस डील से जुड़े कागजात की जांच के जरिए संबंधित पक्षों के बीच हुए भुगतान, समझौतों और लेनदेन की प्रकृति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, जब्त सामग्री का पूरा विवरण, किसी कथित वित्तीय अनियमितता की राशि और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। केवल जांच किए जाने या दस्तावेज कब्जे में लिए जाने से किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते।
आयकर विभाग की टीम के लौटने के बाद दोनों आवासों पर परिचितों और रिश्तेदारों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। अब मामले में आगे की स्थिति जांच एजेंसियों की पड़ताल और उनके आधिकारिक बयानों पर निर्भर करेगी।









