एशियन गेम्स की टीम में त्रिसा-गायत्री के कोच सुमित रेड्डी का नाम नहीं, चयन पर पहले भी उठे सवाल

एशियन गेम्स के लिए भारतीय बैडमिंटन टीम की आधिकारिक कोचिंग सूची में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के डेडिकेटेड कोच बी. सुमित रेड्डी का नाम नहीं है।

एशियन गेम्स के लिए भारतीय बैडमिंटन टीम की आधिकारिक कोचिंग सूची में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के डेडिकेटेड कोच बी. सुमित रेड्डी का नाम नहीं है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य जीतने वाली जोड़ी अब पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में खेलेगी।

स्पोर्ट्स न्यूज़: एशियन गेम्स के लिए घोषित भारतीय बैडमिंटन टीम की आधिकारिक कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ सूची में महिला डबल्स जोड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के डेडिकेटेड कोच बी. सुमित रेड्डी का नाम शामिल नहीं है। यह फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि सुमित पिछले करीब डेढ़ साल से दोनों खिलाड़ियों के साथ लगातार काम कर रहे हैं और हाल ही में वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में जोड़ी के ऐतिहासिक कांस्य पदक के दौरान भी कोचिंग टीम का हिस्सा थे।

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने अगस्त में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को महिला डबल्स में 15 साल बाद पदक दिलाया था। ऐसे में एशियन गेम्स से पहले जोड़ी के नियमित डेडिकेटेड कोच का आधिकारिक टीम में शामिल नहीं होना अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

मार्च 2025 से जोड़ी के साथ काम कर रहे हैं सुमित

पूर्व ओलिंपियन बी. सुमित रेड्डी ने मार्च 2025 में प्रोफेशनल बैडमिंटन से संन्यास लिया था। इसके बाद वह हैदराबाद स्थित पुलेला गोपीचंद अकादमी में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

सुमित केवल इस जोड़ी के साथ ही काम नहीं करते, बल्कि अकादमी में अन्य महिला डबल्स खिलाड़ियों को भी प्रशिक्षण देते हैं। हालांकि, त्रिसा और गायत्री के साथ उनका लगातार जुड़ाव उन्हें जोड़ी के डेडिकेटेड कोच की भूमिका में महत्वपूर्ण बनाता है।

वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान भी सुमित रेड्डी त्रिसा-गायत्री के कोचिंग कॉर्नर में मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद के साथ मौजूद थे। टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने जोड़ी की रणनीति और उनके खेल में सुधार से जुड़े पहलुओं पर काम किया था।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को दिलाया 15 साल बाद पदक

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। सेमीफाइनल में पहुंचते ही भारत का पदक पक्का हो गया था।

यह महिला डबल्स में 2011 के बाद भारत का पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल था। जोड़ी की इस उपलब्धि ने भारतीय बैडमिंटन में उनके प्रदर्शन को खास पहचान दिलाई।

त्रिसा-गायत्री ने क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-4 चीन की जिया यिफान और झांग शुशियान की जोड़ी को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। इस जीत के साथ भारत का 2011 से वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम से कम एक पदक जीतने का सिलसिला भी जारी रहा।

जोड़ी के इस प्रदर्शन में उनके नियमित प्रशिक्षण और रणनीतिक तैयारी की भूमिका रही। वर्ल्ड चैंपियनशिप में सुमित रेड्डी कोचिंग कॉर्नर में पुलेला गोपीचंद के साथ मौजूद थे।

सुमित की जगह पुलेला गोपीचंद संभालेंगे जिम्मेदारी

आधिकारिक एशियन गेम्स टीम सूची में सुमित रेड्डी का नाम नहीं होने के बावजूद त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को कोचिंग सपोर्ट मिलेगा। मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद जोड़ी के साथ मौजूद रहेंगे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपोर्ट स्टाफ की संख्या और एक्रेडिटेशन से जुड़े नियमों के कारण सभी निजी या डेडिकेटेड कोचों को आधिकारिक टीम में शामिल करना संभव नहीं हुआ है।

इसके बावजूद सुमित की गैरमौजूदगी विशेष रूप से ध्यान खींच रही है, क्योंकि वह मार्च 2025 से दोनों खिलाड़ियों के साथ काम कर रहे हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी वह उस कोचिंग टीम का हिस्सा थे जिसने जोड़ी के ऐतिहासिक प्रदर्शन को करीब से देखा और समर्थन दिया।

एशियन गेम्स चयन पर पहले भी उठे थे सवाल

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के एशियन गेम्स चयन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने अपने चयन मानदंड के आधार पर प्रिया कोंजेंगबाम और श्रुति मिश्रा के नाम सुझाए थे।

इसके बाद बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने त्रिसा-गायत्री के चयन का बचाव किया था। BAI ने उनके बेहतर वर्ल्ड रैंकिंग और हालिया अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को चयन के आधार के रूप में सामने रखा था।

इस तरह जोड़ी का एशियन गेम्स चयन पहले ही चर्चा में था और अब आधिकारिक कोचिंग सूची में सुमित रेड्डी का नाम नहीं होने से यह मामला फिर ध्यान में आया है।

सुमित रेड्डी की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण रही

सुमित रेड्डी का प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर लंबा अनुभव रहा है। मार्च 2025 में संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और पुलेला गोपीचंद अकादमी में महिला डबल्स खिलाड़ियों के साथ काम करना शुरू किया।

त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के साथ उनका लगातार प्रशिक्षण संबंध उन्हें जोड़ी की तैयारी से सीधे तौर पर जोड़ता है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनकी मौजूदगी भी इस भूमिका को दर्शाती थी।

अब एशियन गेम्स में आधिकारिक टीम के साथ उनकी अनुपस्थिति का मतलब यह है कि जोड़ी के साथ मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, आधिकारिक सूची में नाम न होने के पीछे सपोर्ट स्टाफ और एक्रेडिटेशन से जुड़े नियम बताए गए हैं।

एशियन गेम्स से पहले जोड़ी पर निगाहें

वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के बाद त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद पर एशियन गेम्स में भी नजरें रहेंगी। दोनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से महिला डबल्स में भारत की दावेदारी को मजबूत किया है।

उनका चयन भी बेहतर वर्ल्ड रैंकिंग और हालिया अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के आधार पर BAI द्वारा उचित ठहराया गया था। वहीं, SAI की ओर से अलग नाम सुझाए जाने के कारण चयन प्रक्रिया को लेकर बहस हुई थी।

अब प्रतियोगिता से पहले जोड़ी के नियमित कोच सुमित रेड्डी का आधिकारिक कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ सूची में शामिल नहीं होना एक और महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

एशियन गेम्स में गोपीचंद की देखरेख में खेलेगी जोड़ी

एशियन गेम्स के दौरान त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद का मार्गदर्शन मिलेगा। सुमित रेड्डी की गैरमौजूदगी के बावजूद जोड़ी की तैयारी उनके पिछले प्रशिक्षण अनुभव और हालिया अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के आधार पर महत्वपूर्ण बनी हुई है।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को महिला डबल्स में 15 साल बाद पदक दिलाने वाली इस जोड़ी का एशियन गेम्स अभियान अब नए चरण में प्रवेश करेगा। सुमित रेड्डी की अनुपस्थिति के बीच टीम के आधिकारिक कोचिंग ढांचे में पुलेला गोपीचंद की भूमिका प्रमुख रहेगी।

इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें खास हैं—पहली, वर्ल्ड चैंपियनशिप में त्रिसा-गायत्री की ऐतिहासिक उपलब्धि और दूसरी, एशियन गेम्स के लिए उनके चयन तथा कोचिंग सपोर्ट को लेकर सामने आए सवाल। अब प्रतियोगिता में जोड़ी का प्रदर्शन इन चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा।

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