असम-भूटान रिश्ते मजबूत, सीएम सरमा ने पीएम तोबगे का जताया आभार

असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने भूटान पीएम शेरिंग तोबगे की गुवाहाटी यात्रा का स्वागत किया है। दोनों देशों ने सांस्कृतिक, आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने भूटान के प्रधानमंत्री Tshering Tobgay की गुवाहाटी यात्रा पर आभार जताया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा तथा क्षेत्रीय साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

गुवाहाटी: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम और भूटान के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम देखने को मिला है। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने भूटान के प्रधानमंत्री Tshering Tobgay की गुवाहाटी यात्रा पर उनका आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करेगा तथा क्षेत्रीय सहयोग को नई गति देगा।

गुवाहाटी में भव्य स्वागत, कूटनीतिक संदेश

भूटान के प्रधानमंत्री त्सेरिंग तोबगे का गुवाहाटी आगमन सोमवार को हुआ, जहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें राज्य अतिथि गृह (State Guest House), कोइनाधोरा में औपचारिक रूप से रिसीव किया।

इस दौरान भूटान के प्रधानमंत्री के स्वागत में असम कैबिनेट मंत्री Atul Bora भी उपस्थित रहे।

भारत–भूटान संबंधों में असम की रणनीतिक भूमिका

असम भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से भारत और भूटान के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है। दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान लंबे समय से मजबूत आधार पर खड़े हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा कि भूटान के प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को और सुदृढ़ करेगी।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिल रही है।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर जोर

असम और भूटान के बीच संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव पर आधारित हैं।

दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने व्यापारिक मार्ग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक संबंध आज भी सक्रिय हैं।

भूटान के प्रधानमंत्री ने भी अपनी यात्रा के दौरान इन संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि दोनों पक्ष मिलकर विकास और सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे।

उच्च स्तरीय बैठकें और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा

गुवाहाटी में हुई बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन, ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

दोनों देशों ने यह भी माना कि हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन जैसे मुद्दों पर संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।

राजनयिक और प्रशासनिक उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक और स्वागत समारोह में असम के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।

असम के पुलिस महानिदेशक Harmeet Singh और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव Narsing Pawar भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

इनकी उपस्थिति ने इस दौरे के प्रशासनिक और सुरक्षा महत्व को और अधिक रेखांकित किया।

भारत–भूटान साझेदारी: भरोसे पर आधारित रिश्ता

भारत और भूटान के संबंध दुनिया में सबसे स्थिर और भरोसेमंद द्विपक्षीय साझेदारियों में गिने जाते हैं।

दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग जारी है।

विशेष रूप से भूटान की जलविद्युत परियोजनाओं में भारत की भागीदारी इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आधार है।

क्षेत्रीय स्थिरता और विकास पर फोकस

इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सतत विकास पर भी चर्चा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि असम और भूटान के बीच सहयोग बढ़ने से पूरे पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

पर्यटन, कृषि और बुनियादी ढांचे में संयुक्त परियोजनाएं इस साझेदारी को और मजबूत कर सकती हैं।

कूटनीतिक संकेत: पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्ते

भूटान के प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की “पड़ोसी पहले नीति” (Neighbourhood First Policy) के तहत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत भी है।

यह दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

असम के लिए अवसरों का नया द्वार

असम सरकार का मानना है कि इस तरह की उच्च स्तरीय यात्राएं राज्य के लिए निवेश, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खोलती हैं।

भूटान के साथ मजबूत संबंध असम को एक क्षेत्रीय व्यापार और ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने में भी मदद कर सकते हैं।

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