Quadrilateral Security Dialogue की विदेश मंत्रियों की बैठक भारत की राजधानी New Delhi में आयोजित हुई, जिसमें वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अहम संदेश सामने आए।
नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित QUAD Foreign Ministers Meeting 2026 ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और वैश्विक कूटनीति को एक नई दिशा दी है। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और स्वतंत्र समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि क्वाड का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच अब केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस परिणाम और सहयोग आधारित कार्यों पर केंद्रित है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र QUAD का मुख्य फोकस
डॉ. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, कनेक्टिविटी में सुधार और संसाधनों के संतुलित वितरण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक देश के नियंत्रण में आर्थिक या रणनीतिक संसाधनों का केंद्रीकरण वैश्विक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक पारदर्शी, भरोसेमंद और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना QUAD की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच गहरे समन्वय और दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता है।
समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर जोर

बैठक में समुद्री सुरक्षा, मुक्त नौवहन और क्षेत्रीय देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। जयशंकर ने कहा कि क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर को पाटने, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और नई आर्थिक साझेदारियों को विकसित करने के लिए QUAD देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदारी ही दीर्घकालिक विकास की कुंजी है।
ऑस्ट्रेलिया ने भारत की भूमिका की सराहना की
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए इसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक निर्णायक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि QUAD देशों के बीच सहयोग का मूल आधार “स्वतंत्र विकल्प और संप्रभुता का सम्मान” है। उनके अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को अपनी सुरक्षा और आर्थिक निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने का अधिकार होना चाहिए, और इसी सिद्धांत पर QUAD की साझेदारी आगे बढ़ रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बैठक ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि QUAD अब केवल एक परामर्श मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह एक “एक्शन-ओरिएंटेड” सहयोग संरचना बनता जा रहा है। सदस्य देशों के बीच रक्षा, तकनीक, सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।Quadrilateral Security Dialogue का उद्देश्य अब सिर्फ क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना भी है।
हिंद-प्रशांत में रणनीतिक संतुलन का प्रयास
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच QUAD की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह मंच चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को एक साथ लाकर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग किसी एक देश के प्रभुत्व को संतुलित करने और खुले, सुरक्षित और समृद्ध समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।










