केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य पुलिस की सराहना की। अभियान में 945 गिरफ्तारियां, 547 मामले और 182 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती दर्ज की गई
गुवाहाटी: असम में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम पुलिस की सराहना की है। शाह ने कहा कि राज्य में नशे के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई नशीले पदार्थों के कारोबार को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के तहत 945 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 547 मामले दर्ज किए गए और 182 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशामुक्त भारत’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई दृढ़ता के साथ जारी रहेगी। उन्होंने अभियान के व्यापक दायरे को रेखांकित करते हुए तस्करी के नेटवर्क, उनकी आर्थिक संरचना और युवाओं पर नशे के प्रभाव को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।
असम में यह कार्रवाई केवल मादक पदार्थों की जब्ती और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अधिकारियों ने चिन्हित 703 हॉटस्पॉट पर भी कार्रवाई की है। इसके अलावा लगभग 731 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया चल रही है। इन आंकड़ों का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के साथ उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना बताया गया है।
945 गिरफ्तारियां और 547 मामले दर्ज
असम में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के दौरान 945 लोगों की गिरफ्तारी और 547 मामले दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में 182 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।
नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने में जांच एजेंसियों के लिए केवल खेप पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होता। उन्हें आपूर्ति के स्रोत, वितरण नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका का भी पता लगाना पड़ता है। इसी वजह से राज्य सरकार ने अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई पर जोर दिया है।
अभियान में चिन्हित 703 हॉटस्पॉट पर कार्रवाई की गई। ऐसे स्थानों की पहचान आमतौर पर स्थानीय जानकारी, जांच और प्रवर्तन एजेंसियों के इनपुट के आधार पर की जाती है। हालांकि, प्रत्येक स्थान पर की गई कार्रवाई और उससे मिले परिणामों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
731 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कुर्की की प्रक्रिया
असम में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 731 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया चल रही है।
अवैध कारोबार से अर्जित धन और संपत्तियों पर कार्रवाई का उद्देश्य तस्करी नेटवर्क की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना होता है। यदि जांच में किसी संपत्ति का संबंध अपराध से स्थापित होता है, तो संबंधित कानूनों के तहत उसे जब्त या कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
हालांकि, कुर्की की प्रक्रिया शुरू होना और संपत्ति का अंतिम रूप से जब्त होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए 731 करोड़ रुपये की संपत्तियों के संबंध में इसे जारी कानूनी कार्रवाई के रूप में समझना चाहिए, न कि सभी संपत्तियों की अंतिम जब्ती के रूप में।
12 अक्टूबर को असम पुलिस का राज्यव्यापी अभियान
असम पुलिस ने 12 अक्टूबर को राज्यभर में विशेष अभियान चलाया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान 73 गैर-जमानती वारंट तामील किए गए और लंबे समय से फरार 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के 10 लोग भी शामिल बताए गए हैं।
इस अभियान में 1,34,539 लीटर शराब को जब्त करने या नष्ट करने की जानकारी भी दी गई है। यह कार्रवाई अवैध शराब और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर नियंत्रण के प्रयासों का हिस्सा बताई गई है।
अधिकारियों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनों के प्रवर्तन पर भी ध्यान दिया। इससे अभियान का दायरा केवल ड्रग तस्करी तक सीमित न रहकर अवैध व्यापार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दों तक फैला दिखाई देता है।
तंबाकू उत्पादों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच
अभियान के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के अंतर्गत 2,229 छापे या प्रवर्तन कार्रवाइयां किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 3,662 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।
इन कदमों का उद्देश्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री और उनसे संबंधित नियमों के पालन की जांच करना है। शैक्षणिक संस्थानों पर भी ध्यान दिया गया और 2,943 संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया।
स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों तथा तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता को लेकर चिंताएं कई राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य चर्चा का हिस्सा रही हैं। शैक्षणिक संस्थानों की जांच से संबंधित नियमों के पालन की स्थिति समझने और आवश्यक कार्रवाई की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में इन निरीक्षणों के दौरान मिली उल्लंघन संबंधी घटनाओं, जारी किए गए नोटिस या लगाए गए जुर्मानों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
NDPS कानून के तहत 157 प्रस्तावों पर कार्रवाई
नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम से संबंधित कानूनों के तहत भी कदम उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, अवैध यातायात की रोकथाम और नशीले पदार्थों तथा मन:प्रभावी पदार्थों से संबंधित कानून (PIT NDPS Act) के अंतर्गत 157 प्रस्तावों को प्रक्रिया में लिया गया।
ऐसे कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकना और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। हालांकि, 157 प्रस्तावों पर प्रक्रिया पूरी होने, आदेश जारी होने या अंतिम परिणामों के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया, साक्ष्य और न्यायिक समीक्षा का महत्व बना रहता है। इसलिए कार्रवाई के आंकड़ों को गिरफ्तारियों और जांच की प्रगति के संदर्भ में देखना जरूरी है।
जागरूकता अभियान से 1.12 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच
असम में प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 633 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से एक लाख 12 हजार से अधिक नागरिकों और विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई।
ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बारे में जानकारी देना तथा उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करना है। स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम नशे की रोकथाम से जुड़ी व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
यह पहल केंद्र सरकार के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ से भी जुड़ी है। पिछले महीने इस अभियान के तहत 100 सप्ताह का ‘नशामुक्त युवा अभियान’ शुरू किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसकी शुरुआत 18 सितंबर को राष्ट्रीय संकल्प समारोह के साथ हुई थी।
इस पहल में शपथ कार्यक्रम, हस्ताक्षर अभियान और समुदाय आधारित गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया। देशभर के 300 शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी गतिविधियां आयोजित किए जाने का उल्लेख किया गया है।
नशामुक्त भारत अभियान में युवाओं की भूमिका
नशे की समस्या से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन के साथ रोकथाम, जागरूकता और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है। गिरफ्तारियां और जब्ती अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई का हिस्सा हैं, जबकि जागरूकता कार्यक्रम लोगों को नशीले पदार्थों से जुड़े जोखिमों के बारे में जानकारी देने में मदद कर सकते हैं।
युवाओं पर विशेष ध्यान देने का कारण यह है कि नशे की शुरुआत, सामाजिक दबाव और उपलब्धता जैसे कारक उनके स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से रोकथाम के प्रयासों को व्यापक बनाया जा सकता है।
हालांकि, किसी भी अभियान की दीर्घकालिक सफलता का आकलन केवल गिरफ्तारियों या आयोजित कार्यक्रमों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसके लिए नशे की उपलब्धता, तस्करी के नेटवर्क, उपचार सेवाओं तक पहुंच और जागरूकता कार्यक्रमों के वास्तविक प्रभाव जैसे संकेतकों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
अमित शाह ने असम पुलिस की कार्रवाई की सराहना की
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम पुलिस के प्रयासों को नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इस अभियान को आगे भी दृढ़ता के साथ जारी रखेगी।
असम में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि अभियान में गिरफ्तारी, जब्ती, संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई, संस्थानों के निरीक्षण और सार्वजनिक जागरूकता जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।
आगे इस अभियान के प्रभाव का आकलन इस बात से किया जा सकेगा कि नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क कितने कमजोर होते हैं, कानूनी कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है और युवाओं तथा समुदायों में नशे की रोकथाम के प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं। फिलहाल, असम में कार्रवाई के इन आंकड़ों को केंद्र और राज्य सरकार के नशे के खिलाफ अभियान के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश किया गया है।









