काजीरंगा इको-सेंसिटिव जोन घटाने के प्रस्ताव के खिलाफ असम कांग्रेस का राज्यव्यापी प्रदर्शन

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के इको-सेंसिटिव जोन को घटाने के प्रस्ताव के खिलाफ असम कांग्रेस ने राज्यव्यापी प्रदर्शन किया।सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के इको-सेंसिटिव जोन को घटाने के प्रस्ताव के खिलाफ असम कांग्रेस ने कई जिलों में पदयात्राएं निकालीं। सोनितपुर, गोलाघाट समेत अन्य क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर सरकार से प्रस्ताव वापस लेने और संरक्षण प्राथमिकता देने की मांग की।

गुवाहाटी: असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में कमी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने सरकार के इस प्रस्ताव के विरोध में राज्यभर में प्रदर्शन और पदयात्राएं आयोजित कीं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस का कहना है कि काजीरंगा जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र के आसपास पर्यावरणीय सुरक्षा क्षेत्र को कम करने से संरक्षण प्रयास कमजोर हो सकते हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि ESZ का दायरा घटने से राष्ट्रीय उद्यान के आसपास विकास गतिविधियों का दबाव बढ़ सकता है और क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।

कई जिलों में निकाली गईं पदयात्राएं

कांग्रेस के राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत सोनितपुर, लखीमपुर, हैलाकांडी, करीमगंज, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट समेत कई जिलों में पदयात्राएं निकाली गईं।

पार्टी कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों के आसपास मार्च करते हुए नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को कम करने के प्रस्ताव के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

इन प्रदर्शनों का उद्देश्य राज्य में काजीरंगा के पर्यावरणीय संरक्षण को लेकर जनमत तैयार करना और सरकार पर प्रस्ताव वापस लेने का दबाव बढ़ाना बताया गया।

ESZ घटाने के प्रस्ताव का कांग्रेस कर रही विरोध

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास इको-सेंसिटिव जोन कम करने के किसी भी कदम का विरोध करेगी। पार्टी का तर्क है कि ESZ का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्र के आसपास ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है, जिनसे वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।

विपक्षी दल के अनुसार, काजीरंगा केवल असम की पहचान नहीं है, बल्कि भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव और जैव विविधता क्षेत्रों में शामिल है। इसलिए इसके आसपास किसी भी पर्यावरणीय सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव वैज्ञानिक और पारिस्थितिक आधार पर किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित बदलाव को वापस लिया जाए और काजीरंगा के संरक्षण से जुड़े फैसलों में पर्यावरणीय प्रभावों को प्राथमिकता दी जाए।

काजीरंगा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है इको-सेंसिटिव जोन?

इको-सेंसिटिव जोन संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पर्यावरणीय दबाव को नियंत्रित करने के लिए बनाया जाता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं के बाहर होने वाली गतिविधियों को इस तरह नियंत्रित करना है कि मुख्य संरक्षित क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव कम से कम पड़े।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह विशेष रूप से एक सींग वाले भारतीय गैंडे के लिए दुनिया के प्रमुख आवासों में से एक माना जाता है।

इसके अलावा यहां हाथी, बाघ, जंगली भैंसा, दलदली हिरण और कई अन्य वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में पार्क के आसपास का क्षेत्र भी वन्यजीवों की आवाजाही और पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांग्रेस ने संरक्षण को बनाया राजनीतिक मुद्दा

राज्यव्यापी प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने काजीरंगा के पर्यावरण संरक्षण को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। पार्टी खुद को राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के पक्ष में खड़े दल के रूप में पेश कर रही है।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पदयात्राओं के दौरान सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। पार्टी का कहना है कि पर्यावरणीय सुरक्षा को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का दीर्घकालिक असर हो सकता है।

विपक्षी दल ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक फैसले के तौर पर नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े विषय के रूप में उठाया है।

काजीरंगा की जैव विविधता पर चिंता

काजीरंगा का पारिस्थितिक तंत्र केवल राष्ट्रीय उद्यान की सीमा तक सीमित नहीं है। आसपास के वन क्षेत्र, जल निकाय और वन्यजीवों के आवागमन वाले इलाके भी इसके प्राकृतिक तंत्र का हिस्सा हैं।

मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र और आसपास की नदियों में जलस्तर बढ़ने पर काजीरंगा के वन्यजीव अक्सर ऊंचे क्षेत्रों की ओर जाते हैं। ऐसे समय में पार्क के आसपास का भू-दृश्य और सुरक्षित मार्ग वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

कांग्रेस का तर्क है कि ESZ में किसी भी तरह की कमी करते समय इन पर्यावरणीय और पारिस्थितिक पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन की बहस

इको-सेंसिटिव जोन को लेकर होने वाली बहस का एक प्रमुख पहलू विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन है। संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए सड़क, आवास, रोजगार और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।

वहीं, अत्यधिक या अनियंत्रित निर्माण और औद्योगिक गतिविधियां वन्यजीवों के आवास तथा प्राकृतिक गलियारों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए ESZ की सीमाओं और वहां लागू नियमों को लेकर अक्सर स्थानीय समुदायों, सरकार और पर्यावरण संगठनों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं।

काजीरंगा के मामले में भी यही बहस अब राजनीतिक स्तर पर तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस का कहना है कि पर्यावरणीय सुरक्षा को कम करने के बजाय संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलित रास्ता तलाशना चाहिए।

जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित पदयात्राओं में स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सोनितपुर और गोलाघाट जैसे काजीरंगा के आसपास के जिलों के अलावा लखीमपुर, तिनसुकिया, हैलाकांडी, करीमगंज और कार्बी आंगलोंग में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने सरकार तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं ने प्रस्तावित ESZ कमी के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से फैसला वापस लेने की मांग दोहराई।

राज्यव्यापी प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस में बनाए रखना चाहती है।

सरकार के सामने बढ़ सकती है चुनौती

काजीरंगा से जुड़े पर्यावरणीय फैसले असम में संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे बन सकते हैं। राष्ट्रीय उद्यान राज्य की प्राकृतिक पहचान, पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।

कांग्रेस के राज्यव्यापी प्रदर्शन के बाद अब सरकार की ओर से प्रस्तावित ESZ बदलाव को लेकर स्पष्टीकरण और उसके पर्यावरणीय आधार पर चर्चा की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से इस विरोध के जवाब में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस मुद्दे पर आगे की बहस में पर्यावरणीय विशेषज्ञों, स्थानीय समुदायों और संबंधित सरकारी एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

काजीरंगा के भविष्य को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

कांग्रेस के प्रदर्शन ने काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर चल रही चर्चा को राज्यव्यापी राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय उद्यान के आसपास पर्यावरणीय सुरक्षा को कमजोर करने के बजाय इसे मजबूत किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, ESZ से जुड़े किसी भी बदलाव का अंतिम आकलन पर्यावरणीय प्रभाव, वैज्ञानिक अध्ययन, स्थानीय जरूरतों और लागू नियमों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल कांग्रेस ने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग को अपना प्रमुख मुद्दा बना लिया है। कई जिलों में आयोजित पदयात्राओं के जरिए पार्टी ने संरक्षण के सवाल को जनता के बीच उठाया है। आने वाले समय में यह विवाद असम की राजनीति में पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की बहस को और तेज कर सकता है।

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