Anthropic की एक रिसर्च में AI सिस्टम ने दूसरे AI मॉडल के अलाइनमेंट बेंचमार्क बेहतर किए। ऑटोमेटेड AI रिसर्चर ने इंसानी शोधकर्ताओं की तुलना में कम समय और कम लागत में बेहतर ट्रेनिंग तरीके तैयार किए।
Tech: AI की क्षमताओं को लेकर Anthropic की नई रिसर्च ने तकनीकी दुनिया में बहस तेज कर दी है। अध्ययन में ऑटोमेटेड AI रिसर्चर्स ने दूसरे AI मॉडल की ट्रेनिंग और अलाइनमेंट में सुधार किया। बेहतर प्रदर्शन के साथ यह सिस्टम इंसानी शोधकर्ताओं की तुलना में काफी कम लागत पर काम करता दिखा। हालांकि, रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया कि AI अभी पूरी तरह इंसानी वैज्ञानिकों की जगह नहीं ले सकता।
Anthropic की रिसर्च में AI ने दूसरे AI को बेहतर किया
Anthropic की नई रिसर्च में AI की खुद दूसरे AI सिस्टम को बेहतर बनाने की क्षमता का परीक्षण किया गया। अध्ययन के तहत ऑटोमेटेड AI रिसर्चर्स तैयार किए गए, जिन्हें AI मॉडल के अलाइनमेंट से जुड़े अलग-अलग बेंचमार्क में सुधार करने का काम दिया गया।
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रिसर्च के अनुसार, इन ऑटोमेटेड सिस्टम्स ने AI मॉडल की मुख्य परफॉर्मेंस को प्रभावित किए बिना सभी 10 अलाइनमेंट बेंचमार्क में सुधार किया। यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि AI अब केवल इंसानों के दिए निर्देशों पर जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका भी निभा सकता है।
AI रिसर्चर्स ने खुद खोजे ट्रेनिंग के नए तरीके
अध्ययन के दौरान ऑटोमेटेड AI रिसर्चर्स ने वैज्ञानिक साहित्य की खोज की, ट्रेनिंग के नए तरीकों पर काम किया और Nvidia H200 GPU का इस्तेमाल करके संबंधित AI मॉडल को लगातार ट्रेन किया।
इस प्रक्रिया में AI सिस्टम को मौजूदा शोध और उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसे तरीके खोजने थे, जिनसे टारगेट मॉडल की अलाइनमेंट क्षमता बेहतर हो सके। यानी AI ने केवल पहले से तय निर्देशों को लागू नहीं किया, बल्कि ट्रेनिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया।
रिसर्च में सबसे उल्लेखनीय नतीजा इसकी गति से जुड़ा रहा। अध्ययन के मुताबिक, सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले AI रिसर्चर ने अनुभवी इंसानी शोधकर्ताओं की तुलना में औसतन 6 घंटे के भीतर बेहतर ट्रेनिंग तरीका तैयार कर लिया।
इससे AI आधारित ऑटोमेटेड रिसर्च की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है। अगर ऐसे सिस्टम अधिक जटिल शोध कार्यों में भी प्रभावी साबित होते हैं, तो भविष्य में AI रिसर्च की गति बढ़ाने में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंसानी रिसर्चर्स के मुकाबले काफी कम खर्च
AI सिस्टम की लागत ने भी रिसर्च के नतीजों को खास बनाया। अध्ययन में बताया गया कि इंसानी रिसर्चर पर करीब 150 डॉलर प्रति घंटा खर्च आता है, जबकि AI आधारित रिसर्चर की लागत करीब 4 डॉलर प्रति घंटा रही।
इस अंतर से संकेत मिलता है कि कुछ सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित शोध कार्यों को AI के जरिए काफी कम लागत में किया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI मौजूदा समय में हर तरह के वैज्ञानिक शोध को इंसानों से बेहतर तरीके से कर सकता है।
AI रिसर्चर उन कार्यों में अधिक प्रभावी रहे, जिनके लक्ष्य और बेंचमार्क पहले से निर्धारित थे। नए शोध प्रश्न तैयार करने और व्यापक वैज्ञानिक दिशा तय करने में अभी भी इंसानी विशेषज्ञता की अहम भूमिका बनी हुई है।
क्या AGI अब करीब आ गया है?
AI का खुद को बेहतर बनाने की क्षमता को अक्सर AGI यानी Artificial General Intelligence की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसी वजह से Anthropic की रिसर्च के बाद AI के भविष्य और AGI को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
हालांकि, इस रिसर्च के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि AGI अब निश्चित रूप से बेहद करीब है। ऑटोमेटेड AI सिस्टम की क्षमताएं अभी भी उन लक्ष्यों और बेंचमार्क से जुड़ी हैं, जिन्हें इंसानों ने तय किया है।
रिसर्च में भी इस सीमा को स्पष्ट किया गया है। AI फिलहाल इंसानी वैज्ञानिकों को पूरी तरह बदलने की स्थिति में नहीं है। किसी नए रिसर्च क्षेत्र की पहचान करना, सही सवाल तैयार करना, लक्ष्य निर्धारित करना और सिस्टम की सीमाएं तय करना जैसे कामों में इंसानी मार्गदर्शन जरूरी बना हुआ है।
AI का खुद को सुधारना क्यों अहम है?
रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट यानी AI का अपनी क्षमताओं को लगातार बेहतर करने की प्रक्रिया AI के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अगर AI भविष्य में अपने प्रशिक्षण के तरीकों को अधिक प्रभावी ढंग से विकसित करने लगे, तो नए मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
Anthropic की रिसर्च इसी दिशा में एक प्रयोग के रूप में देखी जा रही है। इसके नतीजे बताते हैं कि AI कुछ शोध कार्यों में इंसानी विशेषज्ञों की तुलना में तेज और कम लागत वाला साबित हो सकता है।
फिर भी, मौजूदा स्थिति में इंसानों की भूमिका खत्म नहीं हुई है। AI की क्षमता बढ़ने के बावजूद शोध के उद्देश्य तय करने, परिणामों का मूल्यांकन करने और यह निर्धारित करने में कि किसी मॉडल को किस दिशा में विकसित किया जाना चाहिए, इंसानी निगरानी और विशेषज्ञता महत्वपूर्ण बनी हुई है।










