STS-8 मिशन: भारत के INSAT-1B ने कैसे Space Shuttle की पहली Night Launch और Landing कराई संभव

30 अगस्त 1983 को Challenger का STS-8 मिशन पहली Night Launch और Night Landing के लिए ऐतिहासिक बना। INSAT-1B की कक्षीय जरूरत ने मिशन की टाइमिंग तय की।

30 अगस्त 1983 को लॉन्च हुआ STS-8 Space Shuttle कार्यक्रम का पहला Night Launch और Night Landing मिशन था। भारत के INSAT-1B सैटेलाइट की कक्षा संबंधी जरूरतों ने इस ऐतिहासिक मिशन का समय तय किया।

Tech: STS-8 मिशन अंतरिक्ष इतिहास में 30 अगस्त 1983 का दिन बेहद खास था, जब Space Shuttle Challenger ने STS-8 मिशन के तहत पहली बार रात में उड़ान भरी। मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत के INSAT-1B मौसम और संचार उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना था। इसी सैटेलाइट की कक्षीय जरूरतों के कारण Challenger को रात में लॉन्च और बाद में रात में ही लैंड करना पड़ा।

STS-8 मिशन में क्या था खास?

Space Shuttle Challenger का STS-8 मिशन 30 अगस्त 1983 को NASA के Kennedy Space Center से लॉन्च हुआ था। यह Shuttle कार्यक्रम का आठवां मिशन और Challenger की तीसरी अंतरिक्ष उड़ान थी। इस मिशन ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज कीं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत पहली Night Launch और Night Landing थी।

STS-8 मिशन: भारत के INSAT-1B ने कैसे Space Shuttle की पहली Night Launch और Landing कराई संभव

STS-8 के दौरान Challenger ने 98 बार पृथ्वी की परिक्रमा की और करीब छह दिन से अधिक समय अंतरिक्ष में बिताया। मिशन का प्रमुख उद्देश्य भारत के INSAT-1B मौसम और संचार सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करना था। इस सैटेलाइट को Payload Assist Module-D की मदद से तैनात किया गया था।

भारत के लिए यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि INSAT-1B देश के संचार और मौसम संबंधी बुनियादी ढांचे का अहम हिस्सा बनने वाला था। सैटेलाइट के जरिए मौसम की जानकारी और संचार सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद थी।

भारत के INSAT-1B से जुड़ा था Night Launch

STS-8 के Night Launch के पीछे सिर्फ NASA का प्रयोग नहीं था। मिशन में मौजूद भारतीय कनेक्शन ने भी इसकी टाइमिंग तय करने में अहम भूमिका निभाई।

INSAT-1B को एक विशेष कक्षा में स्थापित किया जाना था। उसकी अंतिम कक्षीय स्थिति और Orbital Mechanics के कारण Challenger को ऐसे समय उड़ान भरनी थी, जब वह निर्धारित कक्षा तक सही तरीके से पहुंच सके। यही वजह थी कि मिशन को रात में लॉन्च करने का फैसला हुआ।

NASA के अनुसार, INSAT-1B की कक्षा में सही स्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत ने पहली बार Shuttle को रात में लॉन्च करने की स्थिति पैदा की। इस तरह भारत का सैटेलाइट Space Shuttle कार्यक्रम की एक ऐतिहासिक उपलब्धि से सीधे जुड़ गया।

30 अगस्त 1983 को Challenger ने भारतीय समय के अनुसार अलग समय क्षेत्र में सुबह से पहले उड़ान भरी। NASA के रिकॉर्ड के अनुसार लॉन्च 2:32 बजे EDT पर हुआ। यह Shuttle कार्यक्रम का पहला Night Launch था।

पहली बार रात में हुई Space Shuttle की Landing

STS-8 की खासियत केवल Night Launch तक सीमित नहीं रही। मिशन के अंत में Challenger ने Space Shuttle कार्यक्रम की पहली Night Landing भी की।

Challenger ने 5 सितंबर 1983 को California स्थित Edwards Air Force Base पर रात में लैंडिंग की। अंतरिक्ष यान ने करीब 98 बार पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया और अंधेरे में रनवे पर सुरक्षित उतर गया।

NASA के मुताबिक, Challenger की लैंडिंग रात करीब 12:40 बजे PDT पर हुई। रनवे की रोशनी की मदद से Orbiter को सुरक्षित लैंड कराया गया। यह Shuttle कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रदर्शन था।

रात में लैंडिंग अपने आप में चुनौतीपूर्ण थी। वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान Challenger बेहद तेज गति से आगे बढ़ रहा था। संचार में कुछ समय के लिए ब्लैकआउट की स्थिति भी बनी। इसके बाद यान California के ऊपर पहुंचा और Edwards Air Force Base की ओर बढ़ा।

STS-8 में पहली बार अंतरिक्ष पहुंचे थे Guion Bluford

STS-8 मिशन की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि इसके चालक दल से जुड़ी थी। मिशन स्पेशलिस्ट Guion “Guy” Bluford इस उड़ान के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले African-American बने। उनके साथ Commander Richard H. Truly, Pilot Daniel C. Brandenstein, Mission Specialist Dale A. Gardner और Dr. William E. Thornton मिशन का हिस्सा थे।

Dr. Thornton ने अंतरिक्ष में Motion Sickness से जुड़े मेडिकल प्रयोग किए। वहीं Challenger के Canadian-built Remote Manipulator System यानी Robotic Arm का भी परीक्षण किया गया। इसके अलावा कई वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोग मिशन का हिस्सा थे।

STS-8 इसलिए सिर्फ एक Shuttle उड़ान नहीं थी। इसने रात में Space Shuttle लॉन्च और लैंडिंग की क्षमता साबित की, भारत के INSAT-1B को कक्षा में पहुंचाया और अंतरिक्ष इतिहास में Guion Bluford की ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि भारत के एक सैटेलाइट की कक्षीय जरूरत ने इस पूरे मिशन को Space Shuttle कार्यक्रम के एक ऐतिहासिक “पहले” से जोड़ दिया।

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