त्रिपुरा में गठबंधन और त्रिपक्षीय समझौते पर बातचीत तेज, टिपरा मोथा के नेता दिल्ली रवाना

त्रिपरा मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा गठबंधन और त्रिपक्षीय समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों पर बातचीत के लिए दिल्ली रवाना हुए है। बैठक मे TTAADC की शक्तियो का विस्तार

त्रिपरा मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा गठबंधन और त्रिपक्षीय समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों पर बातचीत के लिए दिल्ली रवाना हुए हैं। संभावित बैठक में TTAADC की शक्तियों का विस्तार, संवैधानिक अधिकार, Village Committee चुनाव और गठबंधन की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

अगरतला: त्रिपुरा में टिपरा मोथा और संभावित सहयोगी दलों के बीच गठबंधन तथा त्रिपक्षीय समझौते के क्रियान्वयन को लेकर बातचीत फिर तेज हो गई है। पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा नई दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं, जहां लंबित मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है। बैठक में टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

दिल्ली रवाना होने से पहले रंजीत देबबर्मा ने कहा कि ‘महाराज’ ने पार्टी नेताओं को दिल्ली बुलाया है और शुक्रवार को बैठक होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पार्टी आगामी बातचीत को सकारात्मक परिणाम की उम्मीद के साथ देख रही है।

TTAADC की शक्तियों का विस्तार प्रमुख मुद्दा

रंजीत देबबर्मा के अनुसार, बातचीत में त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) की शक्तियों के विस्तार का मुद्दा प्रमुख रहेगा।

टिपरा मोथा लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों को मजबूत करने की मांग करती रही है। पार्टी का कहना है कि गठबंधन की प्रक्रिया में शामिल होने का उसका प्रमुख उद्देश्य टिपरासा समुदाय के लिए संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना है।

देबबर्मा ने कहा कि पार्टी ने पहले हुई बातचीत के दौरान इन मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। अब दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर आगे चर्चा की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान पार्टी ने एक विजिलेंस कमेटी के गठन का मुद्दा भी उठाया था। अब इन मांगों पर आगे विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

गठबंधन की शर्तों पर अभी अंतिम फैसला नहीं

टिपरा मोथा और संभावित सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर 70:30 के फॉर्मूले की खबरों पर रंजीत देबबर्मा ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई समझौता अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने अभी उस स्तर तक बातचीत नहीं की है। उनके अनुसार, किसी भी सीट-शेयरिंग व्यवस्था पर चर्चा से पहले यह समझना जरूरी है कि संबंधित पक्ष टिपरा मोथा की ओर से उठाए जा रहे अधिकारों और मांगों पर क्या रुख रखता है।

देबबर्मा ने संकेत दिया कि इन अधिकारों को लेकर स्पष्ट समझ बनने के बाद ही गठबंधन की आगे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

सीट शेयरिंग का अनुपात बाद में होगा सार्वजनिक

जब उनसे पूछा गया कि समझौता होने की स्थिति में सीटों के बंटवारे का संभावित अनुपात क्या हो सकता है, तो देबबर्मा ने कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि बातचीत पूरी होने के बाद संबंधित विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि सीट बंटवारे को लेकर अभी कई दौर की बातचीत बाकी है।

70:30 के कथित फॉर्मूले को लेकर पार्टी ने फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए अंतिम समझौते तक सीट शेयरिंग के किसी भी संभावित अनुपात को तय मानना जल्दबाजी होगी।

टिपरा मोथा ने शुरू की चुनावी तैयारी

एक तरफ गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है, वहीं टिपरा मोथा ने आगामी चुनावी प्रक्रिया की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

रंजीत देबबर्मा ने बताया कि पार्टी की ओर से नामांकन पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा पार्टी की चुनाव समिति का गठन भी कर दिया गया है।

इससे स्पष्ट है कि पार्टी गठबंधन पर बातचीत के साथ-साथ अपने स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी जारी रख रही है। गठबंधन पर अंतिम सहमति नहीं बनने की स्थिति में पार्टी के पास अपनी चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाने का विकल्प खुला रहेगा।

Village Committee चुनाव पर भी चर्चा की संभावना

प्रस्तावित दिल्ली बैठक में आगामी Village Committee चुनाव भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।

देबबर्मा ने कहा कि बैठक में गठबंधन की संभावनाओं के साथ-साथ आने वाले Village Committee चुनाव से जुड़े मुद्दों पर भी उच्चस्तरीय चर्चा होने की उम्मीद है।

त्रिपुरा में स्थानीय निकाय स्तर की चुनावी राजनीति का राज्य की व्यापक राजनीतिक संरचना पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर होने वाली बातचीत स्थानीय चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

केंद्र सरकार की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट नहीं

जब रंजीत देबबर्मा से पूछा गया कि प्रस्तावित बैठक में केंद्र सरकार की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा, तो उन्होंने कहा कि वह इसकी पुष्टि नहीं कर सकते।

हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि बैठक उच्च स्तर की होगी। इसमें गठबंधन और आगामी Village Committee चुनावों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

केंद्र सरकार की संभावित भागीदारी को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए बैठक में केंद्र की ओर से कौन शामिल होगा, इस बारे में अंतिम जानकारी का इंतजार है।

संवैधानिक अधिकारों पर टिपरा मोथा का जोर

टिपरा मोथा की राजनीतिक रणनीति में टिपरासा समुदाय के अधिकारों का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है। पार्टी का कहना है कि वह गठबंधन की प्रक्रिया में इसलिए आगे बढ़ रही है ताकि समुदाय के लिए संवैधानिक अधिकारों को मजबूत किया जा सके।

रंजीत देबबर्मा ने कहा कि पार्टी ने बातचीत के दौरान अपने रुख और प्राथमिकताओं को पहले ही स्पष्ट कर दिया है। अब आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित सहयोगी पक्ष इन मांगों को किस तरह देखता है।

TTAADC की शक्तियों का विस्तार भी इसी व्यापक मांग का हिस्सा है। पार्टी का मानना है कि परिषद की शक्तियों को बढ़ाने से आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारों को मजबूत किया जा सकता है।

दिल्ली बैठक पर टिकी निगाहें

टिपरा मोथा नेताओं का दिल्ली पहुंचना ऐसे समय हुआ है जब राज्य में संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। शुक्रवार को संभावित बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ लंबित मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

हालांकि, अभी तक गठबंधन, सीट बंटवारे या त्रिपक्षीय समझौते से जुड़े सभी मुद्दों पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। 70:30 सीट शेयरिंग फॉर्मूले की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बैठक के बाद सामने आने वाले निर्णय यह स्पष्ट कर सकते हैं कि टिपरा मोथा और उसके संभावित सहयोगी आगामी चुनावी प्रक्रिया में किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे।

गठबंधन से पहले अधिकारों पर सहमति जरूरी

रंजीत देबबर्मा के बयानों से यह स्पष्ट है कि टिपरा मोथा गठबंधन वार्ता को केवल सीट बंटवारे तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी के लिए TTAADC की शक्तियों का विस्तार, संवैधानिक अधिकार और पहले उठाए गए अन्य मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए दिल्ली में होने वाली बातचीत का मुख्य केंद्र राजनीतिक सीटों के अलावा अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी रह सकते हैं। पार्टी की ओर से अंतिम समझौते की घोषणा होने तक सीट शेयरिंग और गठबंधन की शर्तों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल टिपरा मोथा ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और दिल्ली में उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी भी जारी है। अब सभी की नजर प्रस्तावित बैठक के नतीजों और गठबंधन को लेकर अगले राजनीतिक कदम पर है।

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