असम में 1.65 करोड़ के पोस्ता बीज जब्त, असम राइफल्स और DRI की बड़ी कार्रवाई

असम के श्रीभूमि जिले में असम राइफल्स और डीआरआई ने संयुक्त अभियान में 11,130 किलोग्राम पोस्ता बीज जब्त किए। करीब 1.65 करोड़ रुपये की खेप मामले की जांच जारी।

असम में बड़ी कार्रवाई: असम राइफल्स और DRI ने 1.65 करोड़ रुपये के पोस्ता बीज जब्त, नशीले पदार्थों की तस्करी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
श्रीभूमि जिले के बदरपुर क्षेत्र में संयुक्त अभियान, 11,130 किलोग्राम पोस्ता बीज बरामद

श्रीभूमि: असम में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है। असम राइफल्स और राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence-DRI) ने संयुक्त अभियान चलाकर राज्य के श्रीभूमि जिले के बदरपुर क्षेत्र से लगभग 11,130 किलोग्राम पोस्ता (पॉपी) के बीज जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, बरामद खेप की अनुमानित कीमत करीब 1.65 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई को पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय अवैध तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यह संयुक्त अभियान 6 अगस्त को खुफिया एजेंसियों से प्राप्त विशेष सूचना के आधार पर चलाया गया। सुरक्षा बलों ने समय रहते संदिग्ध खेप को रोक लिया, जिससे इसे आगे अन्य स्थानों तक पहुंचाने की तस्करों की योजना विफल हो गई। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल अवैध व्यापार पर बड़ा प्रहार है, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय संगठित तस्करी गिरोहों के खिलाफ चल रहे अभियान को भी मजबूती प्रदान करती है।

खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

असम राइफल्स और डीआरआई की टीमों को सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में पोस्ता बीज की खेप बदरपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली है। इसके बाद संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध वाहन तथा माल की जांच की गई। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में पोस्ता बीज बरामद हुए। अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। प्रारंभिक जांच के बाद जब्त सामग्री को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए डीआरआई, सिलचर के हवाले कर दिया गया है।

डीआरआई करेगी विस्तृत जांच

बरामद खेप को डीआरआई सिलचर कार्यालय में जमा करा दिया गया है, जहां मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह खेप कहां से लाई गई थी, इसका अंतिम गंतव्य क्या था और इसके पीछे कौन-कौन लोग या नेटवर्क सक्रिय थे। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में कई राज्यों और अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों के बीच संबंध सामने आ सकते हैं। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, परिवहन श्रृंखला और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जाएगी।

पूर्वोत्तर भारत तस्करी के लिहाज से संवेदनशील

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से विभिन्न प्रकार की सीमा पार तस्करी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े होने के कारण यह इलाका अवैध मादक पदार्थों, हथियारों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की आवाजाही के लिए तस्करों द्वारा इस्तेमाल किए जाने की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से असम राइफल्स, डीआरआई, सीमा शुल्क विभाग, राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां नियमित रूप से संयुक्त अभियान चलाती हैं। हाल के वर्षों में ऐसे अभियानों में कई बड़ी सफलताएं मिली हैं, जिससे तस्करी नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ा है।

नशीले पदार्थों के खिलाफ जारी है अभियान

केंद्र और राज्य सरकारें नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य केवल तस्करी रोकना ही नहीं, बल्कि उन संगठित गिरोहों की पहचान कर उन्हें कानूनी दायरे में लाना भी है जो इस अवैध कारोबार से जुड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। इससे युवाओं में नशे की लत बढ़ने, संगठित अपराध को बढ़ावा मिलने और अवैध वित्तीय गतिविधियों को समर्थन मिलने का खतरा रहता है।

संयुक्त अभियान का महत्व

असम राइफल्स और डीआरआई के इस संयुक्त अभियान को सुरक्षा एजेंसियों के बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है। खुफिया जानकारी साझा करने, त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से ऐसी बड़ी बरामदगी संभव हो पाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस प्रकार की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी रहती है तो तस्करी नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

कानूनी कार्रवाई जारी

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब्त की गई खेप के संबंध में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं। जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति, कंपनी या संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीआरआई इस मामले में दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।

क्षेत्र में सतर्कता और बढ़ाई गई

इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीभूमि और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी और बढ़ा दी है। सीमावर्ती मार्गों, प्रमुख परिवहन केंद्रों और संवेदनशील इलाकों में जांच अभियान तेज कर दिए गए हैं ताकि किसी भी अन्य संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी खुफिया सूचनाओं के आधार पर ऐसे अभियान जारी रहेंगे और अवैध तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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