राम मंदिर के नवनिर्मित भव्य परिसर में मुख्य गर्भगृह में प्रतिष्ठित रामलला के साथ-साथ अब अन्य 14 मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं के भी दर्शन श्रद्धालु कर सकेंगे।
अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब इस पर विचार कर रहा है कि मुख्य गर्भगृह में विराजमान रामलला के साथ-साथ परिसर के सभी 14 पूरक मंदिरों में भी आम श्रद्धालुओं को बिना किसी विशेष पास के दर्शन की अनुमति दी जाए।
यह निर्णय देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उनकी आस्था को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि हर भक्त को मंदिर परिसर में स्थापित सभी देवी-देवताओं के दर्शन का समान अवसर मिल सके।
पहले सीमित प्रवेश की थी योजना, अब सभी के लिए खुल सकता है मार्ग
शुरुआत में ट्रस्ट ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा कारणों से पूरक मंदिरों में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की योजना बनाई थी। इसके लिए विशेष पास प्रणाली लागू करने का विचार किया गया था। हालांकि, वर्तमान में प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने और उनकी भावनाओं को देखते हुए ट्रस्ट इस योजना में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
ट्रस्ट के पदाधिकारी अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जिनसे भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सभी श्रद्धालुओं को पूरक मंदिरों तक पहुंच प्रदान की जा सके। यह कदम धार्मिक समावेशिता और समानता के सिद्धांत को मजबूत करेगा, जो राम मंदिर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना का मूल आधार है।

परिसर के 14 पूरक मंदिरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
राम मंदिर परिसर केवल मुख्य गर्भगृह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य महत्वपूर्ण मंदिर भी स्थापित हैं, जो हिंदू परंपरा और रामायण से जुड़े महान पात्रों को समर्पित हैं। परकोटा क्षेत्र में भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्य देव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के मंदिर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त सप्तर्षि मंडप श्रृंखला में महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, माता अहिल्या, निषादराज और माता शबरी के मंदिर स्थापित किए गए हैं।
इन मंदिरों का उद्देश्य भगवान राम के जीवन में समरसता, समानता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को प्रदर्शित करना है। यदि सभी श्रद्धालुओं को इन मंदिरों में दर्शन की अनुमति मिलती है, तो यह धार्मिक अनुभव को और अधिक व्यापक और सार्थक बनाएगा।
भीड़ प्रबंधन और संरचनात्मक चुनौतियां बनी बड़ी परीक्षा
हालांकि, सभी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की अनुमति देना एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके साथ कई व्यावहारिक चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। मुख्य मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम परिवार के दर्शन के लिए सीमित स्थान उपलब्ध है। वहां पहुंचने के लिए लगभग 10 फीट चौड़ी सीढ़ी बनाई गई है, जिससे एक समय में केवल चार से पांच लोग ही गुजर सकते हैं।
इसके अलावा, लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने के लिए अत्यधिक सावधानी और सुव्यवस्थित योजना की आवश्यकता होगी। ट्रस्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि दर्शन प्रक्रिया सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनी रहे।









