शुक्रवार को माता लक्ष्मी के अभिषेक में शंख का प्रयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। दक्षिणावर्ती शंख में जल, दूध, दही और घी भरकर अभिषेक करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, धन और सुख-शांति बनी रहती है। पूजा में सही सामग्री और विधि का पालन करना माता लक्ष्मी की प्रसन्नता सुनिश्चित करता है।
Mata Lakshmi Puja Tips: शुक्रवार को माता लक्ष्मी के अभिषेक के लिए शंख का उपयोग करना बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल, दूध, दही और घी भरकर माता लक्ष्मी या भगवान विष्णु की मूर्ति पर अभिषेक करना चाहिए। पूजा के दौरान कमल का फूल, मिश्री, हल्दी और अन्य पारंपरिक सामग्री का सही उपयोग करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। नियमित पूजा और मंत्र उच्चारण से माता लक्ष्मी की कृपा बढ़ती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
अभिषेक की आवश्यक सामग्री
- जल, दूध, दही और घी: तांबे या चांदी के पात्र में भरकर अभिषेक किया जाता है।
- शहद और मिश्री: यह मिठास और समृद्धि का प्रतीक है।
- माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र: पूजा का केंद्र।
- कमल का फूल या गुलाब: सौंदर्य और पवित्रता का प्रतीक।
- रोली, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, हल्दी: पारंपरिक पूजन सामग्री।
- लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी और सुहाग की चीजें: विवाहिता और देवी की साज-सज्जा के प्रतीक।
- मखाने की खीर, मिश्री, सफेद मिठाई या श्रीफल: भोग में अर्पित।
- गाय का घी, धूप, अगरबत्ती, कपूर और कमलगट्टे की माला: पूजा में महक और दिव्यता लाने के लिए।
इन सामग्री का सही चयन और उपयोग अभिषेक के प्रभाव को बढ़ाता है और माता लक्ष्मी की प्रसन्नता सुनिश्चित करता है।
अभिषेक करने की विधि
धर्म शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करना आवश्यक है। दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल, दूध, दही और घी भरें और माता लक्ष्मी या भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति पर धीरे-धीरे अभिषेक करें। अभिषेक के दौरान मंत्रों का उच्चारण करना शुभ माना जाता है।
माता लक्ष्मी की पूजा में शंख बजाना भी अनिवार्य है। शंख की ध्वनि घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलाती है और लक्ष्मी जी की कृपा बढ़ाती है। इस दौरान कमल के फूल और गुलाब का अर्पण करना, मिठाई या श्रीफल भोग में रखना और रोली-सिंदूर का उपयोग करना पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लाभकारी है।

शुक्रवार का महत्व
शुक्रवार को माता लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। इस दिन विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा और व्रत करने से घर में धन, सुख और समृद्धि आती है। शंख का उपयोग इस दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसे माता लक्ष्मी का भाई माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन घरों में नियमित रूप से शंख के माध्यम से पूजा की जाती है, वहाँ लक्ष्मी जी की कृपा अधिक बनी रहती है। यही वजह है कि शुक्रवार को शंख के साथ अभिषेक करने से घर में सकारात्मक वातावरण और वित्तीय स्थिरता आती है।
स्वास्थ्य और मानसिक लाभ
शंख बजाने और पूजा करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है। शंख की ध्वनि से तनाव कम होता है, ध्यान और मानसिक शक्ति बढ़ती है। पूजा के समय मंत्रों का उच्चारण और भजन-कीर्तन मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक अनुभव को भी गहरा करता है।
साथ ही, माता लक्ष्मी की नियमित पूजा और अभिषेक से परिवार में सद्भाव, रिश्तों में मिठास और जीवन में खुशहाली बनी रहती है। शंख का प्रयोग इन प्रभावों को और भी सशक्त बनाता है।
शुभता और ध्यान देने योग्य बातें
- पूजा में हमेशा शुद्ध और साफ सामग्री का उपयोग करें।
- दक्षिणावर्ती शंख का ही प्रयोग करें।
- अभिषेक के समय ध्यान और भक्ति की भावना बनाए रखें।
- भोग में केवल शुद्ध और हल्की मिठाई या फल ही अर्पित करें।
- पूजा के बाद शेष सामग्री को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।
इन सावधानियों का पालन करने से पूजा का प्रभाव अधिक होता है और माता लक्ष्मी की कृपा घर पर लंबे समय तक बनी रहती है।












