साउथ सिनेमा के चर्चित सितारे रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने दोहरी शादी करके अपने रिश्ते की नई शुरुआत की है। आज सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों और आज शाम कन्नड़ परंपराओं के अनुसार शादी संपन्न होगी। दोनों शादियों में रस्मों और शैली में अंतर है, लेकिन उद्देश्य एक ही है – दूल्हा-दुल्हन का पवित्र मिलन और वैवाहिक जीवन की शुभकामना।
Rashmika-Vijay Wedding Updates: साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने आज अपने जीवन की नई शुरुआत की है। शादी दो चरणों में संपन्न हुई – सुबह तेलुगु रीति-रिवाज और शाम को कन्नड़ परंपराओं के अनुसार। यह विवाह बेंगलुरु और हैदराबाद के परिवारों और करीबी दोस्तों की उपस्थिति में हुआ, जिसमें दक्षिण भारतीय शादी की पारंपरिक रस्मों और संस्कृति का समृद्ध संगम देखने को मिला। Fans और मीडिया के लिए यह एक खास अवसर है, क्योंकि दोनों शादियों में अलग-अलग रस्में और सांस्कृतिक विविधता दिखाई देती हैं।
तेलुगु शादी की विशेष रस्में
आज सुबह 10 बजे रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने तेलुगु रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की। इस समारोह में पेल्ली कुतुरु और पेल्ली कोडुकु जैसे पारंपरिक अनुष्ठान शामिल थे, जिसमें दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है। इसके बाद जीलकारा बेल्लम रस्म में दोनों अपने सिर पर जीरा और गुड़ का पेस्ट लगाते हैं, जिससे जीवन में मिठास और एकजुटता बनी रहती है।
तेलुगु विवाह में मंगलसूत्र धारण और सप्तपदी भी अनिवार्य हैं। दूल्हा-दुल्हन अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं और सात वचन लेते हैं, जो वैवाहिक बंधन का प्रतीक हैं। यह संस्कार परिवार और समाज में जोड़े के स्थिर और सुखी जीवन की कामना करता है।

कन्नड़ शादी की परंपराएं
आज शाम कन्नड़ रीति-रिवाजों के अनुसार भी शादी होगी। कन्नड़ शादियों में नंदी पूजा, काशी यात्रा, धारे हेरदु और ताली धारण जैसी खास रस्में होती हैं। नंदी पूजा विवाह से पहले संपन्न होती है, जिससे किसी भी बाधा से बचाव होता है। काशी यात्रा में दूल्हा प्रतीकात्मक रूप से संन्यास लेने काशी जाता है और दुल्हन के पिता उसे विवाह के लिए मनाते हैं।
धारे हेरदु में कन्यादान की रस्म होती है, जिसमें पवित्र जल के साथ बेटी का हाथ दूल्हे को सौंपा जाता है। कन्नड़ परंपरा में ताली धारण विवाह का प्रमुख प्रतीक है और इसे शादी का मुख्य अनुष्ठान माना जाता है।
तेलुगु और कन्नड़ शादियों में अंतर
दोनों शादियों का उद्देश्य समान है दूल्हा-दुल्हन का पवित्र मिलन और वैवाहिक जीवन की शुभकामना। अंतर केवल रस्मों के नाम, शैली और कुछ अनुष्ठानों में है। तेलुगु शादी में जीलकारा बेल्लम जैसी मीठी रस्म है, जबकि कन्नड़ शादी में काशी यात्रा और धारे हेरदु जैसे अनोखे अनुष्ठान देखने को मिलते हैं।
रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की दोहरी शादी साउथ सिनेमा के सबसे चर्चित कपल के रूप में परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाती है। दोनों रीति-रिवाजों के पालन से शादी का धार्मिक और सामाजिक महत्व भी पूरा होता है। यह विवाह केवल व्यक्तिगत आनंद का मौका नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी है।








