रामनगरी अयोध्या में कड़ाके की ठंड को देखते हुए राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान प्रभु रामलला को शीत से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने मौसम के अनुसार रामलला की सेवा में बदलाव किए हैं, ताकि बाल स्वरूप में विराजमान प्रभु को ठंड से सुरक्षित रखा जा सके।
अयोध्या: कड़ाके की ठंड के बीच राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान प्रभु रामलला की सुरक्षा और सेवा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने मौसम के अनुरूप गर्भगृह और राम दरबार में ऑयल हीटर लगाए हैं, ताकि बाल स्वरूप में विराजमान रामलला ठंड से सुरक्षित रहें। इसके अलावा, भोग के मेन्यू में भी ठंड के हिसाब से बदलाव किया गया है, ताकि प्रभु को ऊर्जा और गर्माहट मिल सके।
गर्भगृह और राम दरबार में ऑयल हीटर
मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह और राम दरबार में दो नए ऑयल हीटर लगाए हैं।
- पहला हीटर भूमिगत गर्भगृह में स्थापित किया गया है, जहाँ प्रतिदिन बालक स्वरूप रामलला विराजमान होते हैं।
- दूसरा हीटर प्रथम तल पर राम दरबार में रखा गया है, ताकि राजा राम की सेवा भी ठंड से सुरक्षित हो सके।
पुजारियों के अनुसार, ये हीटर मंदिर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं और शीतलहर से रामलला की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ठंड के कारण रामलला को प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान कराया जा रहा है। इसके साथ ही, रात में उन्हें रजाई ओढ़ाई जाती है, ताकि ठंडी हवाओं का कोई असर न पड़े। पुजारियों और सेवकों की निगरानी में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बालक स्वरूप रामलला को पूरी सुरक्षा और आराम मिले।

भोग में ठंड के अनुसार बदलाव
- सर्दियों को ध्यान में रखते हुए रामलला के भोग में शीत ऋतु के व्यंजन शामिल किए गए हैं।
- भोग में पूड़ी-सब्जी के साथ केसरयुक्त दूध और घी का हलवा अर्पित किया जा रहा है।
- इसके अलावा रबड़ी और खुरचन के पेड़े भी भोग में शामिल हैं, जो ठंड में शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
भोग में किए गए ये बदलाव बालक स्वरूप रामलला की सेहत और ताजगी बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। शहर में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड के साथ-साथ घना कोहरा और शीतलहर भी शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रभावी रही। इस मौसम के चलते राम मंदिर में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।









