आयुष्मान योजना से 150 निजी अस्पताल बाहर, ₹1,200 करोड़ भुगतान अटका, 1 सितंबर को इलाज बंद रहेगा

हरियाणा में भुगतान में देरी से 150 निजी अस्पताल आयुष्मान पैनल से बाहर हुए। 500 अस्पतालों का ₹1,200 करोड़ बकाया है। IMA ने 1 सितंबर को इलाज रोकने का आह्वान किया।

हरियाणा में भुगतान में देरी के कारण करीब 150 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के पैनल से बाहर हो गए हैं। लगभग 500 अस्पतालों का ₹1,200 करोड़ भुगतान लंबित है। IMA ने 1 सितंबर को कार्डधारकों का इलाज नहीं करने का फैसला किया है।

फरीदाबाद: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों को भुगतान में देरी का मामला गंभीर होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में करीब 150 निजी अस्पताल योजना के पैनल से अलग हो चुके हैं। वहीं, करीब 500 निजी अस्पतालों का सरकार पर लगभग ₹1,200 करोड़ बकाया बताया जा रहा है। भुगतान की समस्या को लेकर IMA ने 1 सितंबर को इलाज नहीं करने का आह्वान किया है।

भुगतान में देरी से निजी अस्पतालों ने योजना से बनाई दूरी

हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराने वाले निजी अस्पतालों की संख्या लगातार घट रही है। अस्पताल प्रबंधनों का कहना है कि सरकार की ओर से इलाज के बाद भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। इसके चलते कई अस्पतालों के लिए योजना के तहत सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो गया है।

आयुष्मान योजना से 150 निजी अस्पताल बाहर, ₹1,200 करोड़ भुगतान अटका, 1 सितंबर को इलाज बंद रहेगा

पिछले कुछ महीनों में करीब 150 निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के पैनल से खुद को अलग कर लिया है। पहले प्रदेश में लगभग 660 निजी अस्पताल इस योजना के पैनल पर थे। अब इन अस्पतालों के बाहर होने से आयुष्मान कार्डधारकों के सामने इलाज से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।

कई अस्पताल प्रबंधनों ने सरकार को भुगतान में देरी की जानकारी दी है। उनका कहना है कि इलाज की लागत वहन करने के बाद कई महीनों तक भुगतान का इंतजार करना उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहा है।

कुछ अस्पतालों ने स्टाफ की कमी को बताया कारण

पैनल से बाहर होने वाले सभी अस्पतालों ने भुगतान में देरी को सीधे तौर पर कारण नहीं बताया है। कुछ अस्पतालों ने स्टाफ की कमी समेत अन्य कारणों का उल्लेख किया है।

अस्पताल प्रबंधनों का कहना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने की स्थिति में उनके लिए आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज जारी रखना मुश्किल हो जाता है। कई अस्पतालों की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वे उपचार का खर्च महीनों तक खुद वहन कर सकें।

IMA का कहना है कि अस्पतालों की ओर से लगातार भुगतान की समस्या उठाई जा रही है। संगठन के अनुसार, इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित अधिकारियों से कई बार बातचीत की गई है।

1 सितंबर को आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज नहीं करने का फैसला

भुगतान में देरी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से 1 सितंबर को आयुष्मान योजना के तहत कार्डधारकों का इलाज नहीं करने का आह्वान किया गया है। इससे योजना के लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में उपचार को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

IMA हरियाणा की अध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी की ओर से आयुष्मान हरियाणा के CEO को इस निर्णय की जानकारी दी गई है। अस्पताल बोर्ड ऑफ इंडिया, IMA के प्रदेश चेयरमैन डॉ. अजय महाजन ने कहा कि अस्पताल मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन भुगतान के मामले में सरकार और अधिकारियों की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

IMA ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भुगतान की समस्या पर 15 सितंबर तक ध्यान नहीं दिया गया तो इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया जा सकता है।

2 सितंबर को सरकार और निजी अस्पतालों की बैठक

भुगतान विवाद को लेकर सरकार ने निजी अस्पताल प्रबंधकों के साथ 2 सितंबर को बैठक प्रस्तावित की है। बैठक में IMA की टीम को भी बुलाया गया है।

इस बैठक में आयुष्मान योजना के तहत लंबित भुगतान और अस्पतालों की अन्य समस्याओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। निजी अस्पताल लंबे समय से बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।

करीब 500 अस्पतालों का ₹1,200 करोड़ बकाया

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के करीब 500 निजी अस्पतालों का आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार पर लगभग ₹1,200 करोड़ बकाया है। कई महीनों से भुगतान लंबित होने के कारण निजी अस्पताल प्रबंधन नाराज हैं।

अस्पतालों का कहना है कि भुगतान में लगातार देरी होने से योजना के तहत सेवाएं उपलब्ध कराना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इसी वजह से कई अस्पताल पैनल से बाहर हो चुके हैं।

कार्डधारकों के लिए नागरिक अस्पताल का विकल्प

निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक कार्डधारकों को जिला नागरिक अस्पताल जाने की सलाह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नागरिक अस्पतालों में 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

ऐसे में 1 सितंबर को निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज प्रभावित होने की स्थिति में पात्र मरीज सरकारी नागरिक अस्पतालों में उपचार की सुविधा ले सकते हैं।

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