मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना के उन अधिकारियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी सैन्य सेवा के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी खास पहचान बनाई। वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एड-डी-कैंप (ADC) के तौर पर उनके साथ कई आधिकारिक कार्यक्रमों और विदेशी दौरों में नजर आते थे।
Major Rishabh Singh Sambyal: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप यानी ADC (Aide-de-Camp) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। भारतीय सेना से प्रीमेच्योर रिटायरमेंट लेने के बाद इंटरनेट पर लोग उनके सैन्य करियर, शिक्षा और पृष्ठभूमि के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
राष्ट्रपति के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक समारोहों में अक्सर नजर आने वाले मेजर सांब्याल को उनकी अनुशासित छवि, सादगी और ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता मिली। इसी वजह से इंटरनेट यूजर्स के एक वर्ग ने उन्हें अनौपचारिक तौर पर ‘नेशनल क्रश’ का टैग भी दिया।
जम्मू-कश्मीर के सांबा से है संबंध
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का संबंध जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले से बताया जाता है। उनका परिवार डोगरा राजपूत पृष्ठभूमि से जुड़ा है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके परिवार में सैन्य सेवा की पुरानी परंपरा रही है। भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में उन्होंने कई जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के तौर पर नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उनकी जिम्मेदारी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान प्रोटोकॉल और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों से भी जुड़ी रही।
मेजर सांब्याल की शुरुआती सैन्य शिक्षा सैनिक स्कूल कपूरथला से हुई। इसके बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के माध्यम से सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया। सैन्य क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए वर्ष 2018 में उन्हें भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में कमीशन मिला। सेना में शुरुआती वर्षों से ही उनके नेतृत्व और अनुशासन की चर्चा रही।
उनके करियर की उल्लेखनीय उपलब्धियों में 2021 की गणतंत्र दिवस परेड भी शामिल है। उस समय कैप्टन के पद पर रहते हुए उन्होंने जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया था। उनके नेतृत्व वाली टुकड़ी को परेड में बेस्ट मार्चिंग कंटिजेंट की ट्रॉफी मिली थी।
4 पैरा स्पेशल फोर्स का भी हिस्सा रहे
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मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का सैन्य करियर केवल नियमित रेजिमेंट तक सीमित नहीं रहा। कठिन चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 4 पैरा स्पेशल फोर्स (4 PARA SF) में भी सेवा की। स्पेशल फोर्स में शामिल होना भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसके लिए शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की आवश्यकता होती है। उन्हें प्रतिष्ठित ‘बलिदान बैज’ भी मिला, जो भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्स से जुड़ा एक विशिष्ट प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रपति के ADC रहते हुए आए सुर्खियों में
मेजर सांब्याल को व्यापक सार्वजनिक पहचान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में मिली। राष्ट्रपति के साथ विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों और यात्राओं के दौरान उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आती रहीं। उनकी वर्दी में अनुशासित उपस्थिति और आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान सतर्क भूमिका ने लोगों का ध्यान खींचा। कई तस्वीरें वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर प्रशंसात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
हालांकि, उनकी लोकप्रियता का आधार केवल सोशल मीडिया की चर्चा नहीं है। उनके सैन्य करियर में नेतृत्व, विशेष बलों में सेवा और राष्ट्रपति भवन में ADC के रूप में जिम्मेदारी निभाना महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं।









