नई दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स फाइनल में फ्रांस के थॉम गिकेल और डेल्फिन डेलरू ने दुनिया की नंबर-1 चीनी जोड़ी को 22-20, 19-21, 21-15 से हराकर देश को पहला विश्व खिताब दिलाया। भारत की त्रिसा-गायत्री ने ब्रॉन्ज जीता।
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप: नई दिल्ली में चल रही 2026 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में फ्रांस के थॉम गिकेल और डेल्फिन डेलरू ने इतिहास रच दिया। फ्रांसीसी जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स के फाइनल में दुनिया की नंबर-1 चीनी जोड़ी फेंग यान झे और हुआंग डोंग पिंग को हराकर देश को बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। 23 अगस्त को नई दिल्ली में खेले गए मिक्स्ड डबल्स फाइनल में पांचवीं वरीयता प्राप्त गिकेल और डेलरू ने दुनिया की शीर्ष वरीयता वाली चीनी जोड़ी के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन निर्णायक क्षणों में फ्रांसीसी खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा और 22-20, 19-21, 21-15 से जीत दर्ज की।
यह जीत फ्रांस के बैडमिंटन इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले फ्रांस का कोई भी खिलाड़ी या जोड़ी विश्व चैंपियनशिप में फाइनल तक नहीं पहुंची थी। गिकेल और डेलरू ने सेमीफाइनल में चीन की दूसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी जियांग झेन बांग और वेई या शिन को 19-21, 21-13, 21-11 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
पहले गेम में रोमांच, दूसरे में चीन की वापसी
फाइनल की शुरुआत दोनों जोड़ियों के बीच कड़े मुकाबले से हुई। गिकेल और डेलरू ने पहले गेम में दबाव के बावजूद महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर नियंत्रण दिखाया। स्कोर 20-20 तक पहुंचने के बाद फ्रांसीसी जोड़ी ने लगातार दो अंक हासिल किए और 22-20 से गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में दुनिया की नंबर-1 चीनी जोड़ी ने वापसी की। फेंग और हुआंग ने रैलियों में अपनी गति और सटीकता बढ़ाई और 21-19 से गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम तक पहुंचा दिया। इस समय ऐसा लग रहा था कि मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता है।
निर्णायक गेम में फ्रांसीसी जोड़ी ने दिखाया दम
तीसरे गेम में गिकेल और डेलरू ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। दोनों खिलाड़ियों ने नेट के पास तेज खेल के साथ-साथ लंबी रैलियों में भी धैर्य दिखाया। चीन की जोड़ी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन फ्रांस की जोड़ी ने महत्वपूर्ण मौकों पर बढ़त बनाए रखी।
आखिरकार फ्रांसीसी खिलाड़ियों ने तीसरा गेम 21-15 से जीतकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। करीब 80 मिनट तक चले इस मुकाबले में दोनों जोड़ियों ने शानदार स्तर का बैडमिंटन खेला।
नंबर-1 और नंबर-2 चीनी जोड़ियों को हराया
गिकेल और डेलरू की इस सफलता की खास बात यह भी है कि उन्होंने टूर्नामेंट के अंतिम दो मुकाबलों में चीन की दुनिया की नंबर-2 और नंबर-1 जोड़ियों को मात दी। सेमीफाइनल में उन्होंने जियांग झेन बांग और वेई या शिन को हराया था, जबकि फाइनल में फेंग यान झे और हुआंग डोंग पिंग को शिकस्त दी।
इस प्रदर्शन ने फ्रांसीसी जोड़ी की रणनीतिक क्षमता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को सामने रखा। फाइनल के बाद गिकेल ने इस उपलब्धि को अविश्वसनीय बताया और कहा कि दोनों खिलाड़ियों के लिए विश्व चैंपियन बनना बेहद भावुक क्षण है।
पिछले साल के ब्रॉन्ज के बाद गोल्ड तक का सफर
गिकेल और डेलरू की सफलता अचानक नहीं आई है। दोनों खिलाड़ी पिछले कुछ वर्षों से मिक्स्ड डबल्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। 2024 में उन्होंने यूरोपीय चैंपियनशिप का खिताब जीता था और 2025 में इंडोनेशिया ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट में भी सफलता हासिल की।
2025 में विश्व चैंपियनशिप में दोनों ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए सीधे गोल्ड पर कब्जा किया। इस जीत के साथ फ्रांसीसी बैडमिंटन को विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिली है।
त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को ब्रॉन्ज
भारत के लिए भी 2026 वर्ल्ड चैंपियनशिप ऐतिहासिक रही। विमेंस डबल्स में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी का सफर सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर-1 जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग के खिलाफ समाप्त हुआ।
भारतीय जोड़ी ने सेमीफाइनल में अच्छी शुरुआत करते हुए पहला गेम 21-18 से जीता, लेकिन चीनी खिलाड़ियों ने अगले दोनों गेम 21-13 और 21-8 से जीतकर फाइनल में जगह बना ली। मुकाबला करीब 70 मिनट चला।
इसके बावजूद त्रिसा और गायत्री का ब्रॉन्ज भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस पदक के साथ भारत ने विमेंस डबल्स विश्व चैंपियनशिप मेडल के लिए 15 साल का इंतजार खत्म किया। इससे पहले इस वर्ग में भारत ने आखिरी बार 2011 में विश्व चैंपियनशिप पदक जीता था।

तीन सीडेड जोड़ियों को हराकर सेमीफाइनल तक पहुंचीं
त्रिसा और गायत्री का टूर्नामेंट अभियान भी खास रहा। 39वीं रैंक वाली भारतीय जोड़ी ने प्रतियोगिता के दौरान तीन वरीयता प्राप्त जोड़ियों को हराया और सेमीफाइनल में जगह बनाकर कम से कम ब्रॉन्ज पदक सुनिश्चित किया।
उनकी आक्रामक शैली, कोर्ट कवरेज और दबाव में अंक हासिल करने की क्षमता ने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय प्रशंसकों को प्रभावित किया। हालांकि सेमीफाइनल में उन्हें दुनिया की नंबर-1 जोड़ी के अनुभव के सामने हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस प्रदर्शन ने भारतीय विमेंस डबल्स के भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं।
नई दिल्ली में फ्रांस का ऐतिहासिक प्रदर्शन
2026 विश्व चैंपियनशिप में फ्रांस का प्रदर्शन केवल मिक्स्ड डबल्स तक सीमित नहीं रहा। पुरुष सिंगल्स में एलेक्स लानियर ने भी फाइनल में जगह बनाकर फ्रांसीसी बैडमिंटन के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने सेमीफाइनल में कनाडा के विक्टर लाई को 16-21, 21-13, 21-14 से हराया।
इस तरह नई दिल्ली में फ्रांस की टीम ने विश्व बैडमिंटन में अपनी बढ़ती ताकत का प्रदर्शन किया है। गिकेल और डेलरू का गोल्ड मेडल इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गया है।
भारतीय प्रशंसकों के लिए भी यादगार रहा टूर्नामेंट
भारत की मेजबानी में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भी दर्शकों को उत्साहित किया। त्रिसा और गायत्री का ब्रॉन्ज मेडल भारतीय बैडमिंटन के लिए विशेष उपलब्धि है, क्योंकि विमेंस डबल्स में लंबे अंतराल के बाद देश को विश्व स्तर पर पदक मिला है।
गिकेल और डेलरू की ऐतिहासिक जीत ने इस टूर्नामेंट को फ्रांसीसी बैडमिंटन के लिए यादगार बना दिया। नंबर-1 चीनी जोड़ी को हराकर हासिल किया गया यह खिताब न केवल फ्रांस का पहला विश्व चैंपियनशिप गोल्ड है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसी पारंपरिक शक्तियों के बीच यूरोप की चुनौती भी मजबूत हो रही है।









