Baglamukhi Jayanti: जानें 2026 में कब मनाई जाएगी जयंती और क्या है पूजा विधि

बगलामुखी जयंती 2026 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मां बगलामुखी की साधना से शत्रु बाधा व नकारात्मकता से मुक्ति का महत्व।

बगलामुखी जयंती 2026 को लेकर तिथि और शुभ मुहूर्त तय हो गया है। इस बार यह पर्व 24 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। मां बगलामुखी को तंत्र साधना की देवी माना जाता है और इस दिन की गई पूजा से शत्रु बाधा, भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलने की मान्यता है। भक्त विशेष विधि से व्रत और साधना करते हैं।

बगलामुखी जयंती 2026: बगलामुखी जयंती 2026 का पर्व 24 अप्रैल को मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि के आधार पर तय की गई है। यह धार्मिक अवसर भारत में भक्तों द्वारा बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, खासकर मां बगलामुखी के उपासकों द्वारा। दृक पंचांग के अनुसार यह तिथि 23 अप्रैल की रात से शुरू होकर 24 अप्रैल की शाम तक रहेगी। इस दिन देशभर में भक्त व्रत, पूजा और साधना करते हैं ताकि जीवन की बाधाएं दूर हों और मानसिक शांति प्राप्त हो सके। तंत्र साधना में इसे विशेष शक्ति देने वाला दिन माना गया है, जिसमें मां बगलामुखी की आराधना से सुरक्षा और विजय का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

बगलामुखी जयंती 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त

दृक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि 23 अप्रैल 2026 की रात 8 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और 24 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

इस दिन भक्त मां बगलामुखी की विशेष पूजा और साधना करते हैं। मान्यता है कि सही मुहूर्त में की गई पूजा का फल अधिक प्रभावशाली होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

मां बगलामुखी का महत्व और मान्यताएं

मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवां स्थान प्राप्त है और उन्हें तंत्र विद्या की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से शत्रु बाधा, रोग और मानसिक भय दूर होते हैं।

भक्तों का विश्वास है कि इस दिन की गई उपासना से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यही कारण है कि बगलामुखी जयंती को शक्ति और सुरक्षा का पर्व माना जाता है।

Baglamukhi Jayanti: जानें 2026 में कब मनाई जाएगी जयंती और क्या है पूजा विधि

बगलामुखी जयंती पूजा विधि

इस दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और पीले चावल का विशेष उपयोग किया जाता है।

पूजा स्थल पर मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इस दौरान पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है और व्रत के नियमों का पालन किया जाता है।

व्रत और साधना के नियम

बगलामुखी जयंती के दिन भक्त आमतौर पर निराहार व्रत रखते हैं और रात में फलाहार करते हैं। अगले दिन पूजा पूर्ण होने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

इस दिन ध्यान, मंत्र जाप और साधना को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है।

तंत्र साधना में बगलामुखी जयंती का महत्व

तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी को अत्यंत शक्तिशाली देवी माना गया है। उनकी साधना विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा और विजय के लिए की जाती है।

इस दिन की गई पूजा को अत्यंत प्रभावी माना जाता है और इसे जीवन में स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का माध्यम माना जाता है।

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