PSU बैंक शेयरों में लगातार दो दिनों में 8% की गिरावट आई। इंडियन बैंक, SBI और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर टूटे। मुनाफावसूली और बजट 2026 संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।
Psu Bank Shares: PSU बैंक शेयरों में लगातार दो दिनों से गिरावट देखने को मिली है। सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.4 फीसदी तक टूटा। पिछले दो कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स कुल मिलाकर करीब 8 फीसदी नीचे आ गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव आया।
इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और SBI में गिरावट
व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो इंडियन बैंक का शेयर सोमवार को 4 फीसदी गिरकर 810.60 रुपये पर बंद हुआ। बीते दो दिनों में यह शेयर 11 फीसदी टूट चुका है। 30 जनवरी 2026 को इंडियन बैंक का शेयर 923 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर था। बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर करीब 3 फीसदी गिरकर 270.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था और पिछले दो सत्रों में इसमें 10 फीसदी की गिरावट हुई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का शेयर भी 3 फीसदी गिरकर 990.20 रुपये पर बंद हुआ। बीते दो कारोबारी दिनों में SBI के शेयर में 8 फीसदी की गिरावट आई। यह शेयर 1 फरवरी 2026 को 1,083.60 रुपये के अब तक के उच्चतम स्तर पर था।
अन्य PSU बैंक शेयर भी दबाव में
इसके अलावा निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में शामिल पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में भी करीब 2 फीसदी की गिरावट देखी गई। सुबह 11:28 बजे निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स करीब 2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि उसी समय निफ्टी 50 में गिरावट सिर्फ 0.48 फीसदी की थी।
लंबी अवधि में PSU बैंक का प्रदर्शन मजबूत
हालांकि हाल के दो दिनों में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन लंबी अवधि में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पिछले पांच महीनों में निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स करीब 21 फीसदी चढ़ा है। इसी अवधि में निफ्टी 50 में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए PSU बैंक शेयर अभी भी आकर्षक हैं।
बजट 2026-27 में बैंकिंग सेक्टर पर सरकार का फोकस
केंद्रीय बजट 2026-27 में बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़े संकेत दिए गए हैं। सरकार ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने की योजना बनाई है। यह समिति बैंकों की मौजूदा संरचना की समीक्षा करेगी और भविष्य की जरूरतों के लिए उन्हें मजबूत बनाएगी। इसमें छोटे सरकारी बैंकों के विलय, बैंकिंग ढांचे में सुधार और मजबूत बैलेंस शीट वाले बड़े बैंकों के निर्माण जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
हिस्सेदारी बिक्री की तैयारी
सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन का लक्ष्य बढ़ाकर 80,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से काफी अधिक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IDBI बैंक और LIC में हिस्सेदारी बिक्री जैसे बड़े सौदों पर भरोसा किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि सरकार सभी कैबिनेट से मंजूर डिसइनवेस्टमेंट प्रस्तावों को आगे बढ़ाएगी। कुछ सरकारी बैंकों में अतिरिक्त हिस्सेदारी घटाने की भी योजना है।











