जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इस बीच जन सुराज पार्टी ने उनका C-7 फॉर्म जारी किया है, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का विवरण दिया गया है।
Bankipur By-Election 2026: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। इस चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है।
चुनावी दस्तावेजों के अनुसार, प्रशांत किशोर के खिलाफ कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें विभिन्न कानूनों की 31 धाराएं शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी मामले में अभी तक उन्हें दोषी करार नहीं दिया गया है और न ही किसी मामले में अंतिम न्यायिक फैसला आया है। ऐसे में भारतीय कानून के तहत वे चुनाव लड़ने के लिए पात्र बने हुए हैं।
चुनावी हलफनामे में दर्ज हैं 8 मामले
जन सुराज पार्टी द्वारा जारी किए गए चुनावी दस्तावेजों और नामांकन हलफनामे में प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज मामलों का उल्लेख किया गया है। ये मामले बिहार के विभिन्न जिलों और थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख रूप से पटना, बेतिया, मुजफ्फरपुर, गांधी मैदान, पीरबहोर, सचिवालय और सहरसा शामिल हैं।दस्तावेजों के अनुसार, एक मामला वर्ष 2024 में दर्ज हुआ था, जबकि शेष मामले वर्ष 2025 के दौरान दर्ज किए गए। इन मामलों का संबंध मुख्य रूप से विभिन्न सार्वजनिक प्रदर्शनों और जनहित से जुड़े आंदोलनों से बताया गया है।
क्या दर्ज मामले चुनाव लड़ने में बाधा बनते हैं?

भारतीय चुनावी कानून के अनुसार, किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना मात्र उसे चुनाव लड़ने से नहीं रोकता। चुनाव लड़ने पर रोक तब लगती है जब किसी सक्षम अदालत द्वारा उम्मीदवार को दोषी ठहराते हुए ऐसी सजा सुनाई जाती है, जो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अयोग्यता का आधार बनती है।
इसी कारण प्रशांत किशोर वर्तमान में चुनाव लड़ने के लिए पात्र हैं, क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।चुनावी हलफनामे में शामिल कुछ धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने की स्थिति में अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, यह केवल कानूनी संभावना है और इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को ऐसी सजा मिल चुकी है या मिलना तय है।
भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी साबित किए जाने तक निर्दोष माना जाता है। इसलिए वर्तमान समय में प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज मामलों को न्यायिक प्रक्रिया के अधीन माना जाएगा।
प्रशांत किशोर का पक्ष
प्रशांत किशोर पहले भी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके खिलाफ दर्ज मामले किसी व्यक्तिगत लाभ, भ्रष्टाचार या नैतिक अपराध से संबंधित नहीं हैं। उनका कहना है कि अधिकांश मामले सार्वजनिक आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और जनहित के मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान दर्ज किए गए।उन्होंने यह भी कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और जनसरोकारों से जुड़े अभियानों को आपराधिक गतिविधियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बांकीपुर उपचुनाव में मुकाबला हुआ रोचक
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पहले से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद इस सीट पर मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। जन सुराज पार्टी का कहना है कि प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाने का फैसला उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन निर्माण की क्षमता और बिहार में पदयात्रा के दौरान मिले जनसमर्थन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति और उभरते राजनीतिक विकल्पों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।











