कई बार हमें लगता है कि हम बीमार हैं, जबकि असल समस्या हमारे शरीर में नहीं, बल्कि हमारे रहन सहन या सोच में होती है। यह कहानी एक ऐसे राजा की है जो अपनी आलस को बीमारी समझ बैठा था और कैसे एक समझदार हकीम ने बिना किसी दवा के उसका इलाज कर दिया।
मुख्य कहानी
पुराने समय की बात है। एक राजा था जो बहुत अमीर था, लेकिन वह बेहद आलसी हो गया था। वह दिन भर अपने महल के बिस्तर पर पड़ा रहता, बस तरह तरह के पकवान खाता और सोता रहता। धीरे धीरे उसका शरीर बहुत भारी हो गया और वह बीमार महसूस करने लगा। उसे लगता था कि उसे कोई भयानक बीमारी हो गई है। वह चल फिर भी नहीं पाता था।
देश के बड़े बड़े वैद्य आए, उन्होंने राजा को कड़वी दवाइयां दीं, लेकिन राजा ठीक नहीं हुआ। राजा अपनी बीमारी से इतना परेशान हो गया कि उसने ऐलान कर दिया कि जो उसे ठीक करेगा, उसे मुंहमांगा इनाम दिया जाएगा।
आखिरकार, एक समझदार हकीम राजा के पास आया। उसने राजा की नब्ज टटोली, उनकी दिनचर्या देखी और तुरंत समझ गया कि राजा को कोई शारीरिक बीमारी नहीं है, बस 'आलस' ने उन्हें जकड़ लिया है।
हकीम ने राजा से कहा, 'महाराज, आपकी बीमारी बहुत पुरानी और दुर्लभ है। साधारण दवाइयों से इसका इलाज नहीं होगा। लेकिन मेरे पास एक चमत्कारी उपाय है।'
हकीम ने अपने झोले से एक भारी 'लोहे की गेंद' (Heavy Ball) निकाली और राजा को दी। उसने कहा, 'महाराज, इस गेंद के अंदर एक बहुत ही नायाब और कीमती जड़ी बूटी छिपी है। यह जड़ी बूटी त्वचा के रास्ते शरीर में जाती है।'
राजा ने उत्सुकता से पूछा, 'तो मुझे क्या करना होगा?'
हकीम ने समझाया, 'आपको रोज सुबह और शाम इस भारी गेंद को मैदान में तब तक उछालना और खेलना है जब तक कि आपको अच्छी तरह 'पसीना' न आ जाए। जब आपके हाथों में पसीना आएगा, तो वह नमी इस गेंद के अंदर की दवा को सोख लेगी और वह दवा आपके शरीर में प्रवेश कर जाएगी।'
राजा को यह इलाज बहुत अनोखा लगा। उसने अगले दिन से ही गेंद से खेलना शुरू कर दिया। गेंद भारी थी, इसलिए उसे उठाने और फेंकने में राजा की सांस फूल गई और वह पसीने से तर बतर हो गया।
दिन बीतते गए। रोज खेलने और पसीना बहाने से राजा की भूख खुलने लगी, खाना पचने लगा और रात को गहरी नींद आने लगी। शरीर की सुस्ती गायब हो गई और वजन कम होने लगा। एक महीने बाद राजा पूरी तरह स्वस्थ, फुर्तीला और फिट हो गया।
तब हकीम महल में आया और मुस्कुराते हुए सच बताया, 'महाराज, उस लोहे की गेंद में कोई दवा या जड़ी बूटी नहीं थी। असली दवा तो आपका 'पसीना और मेहनत' थी। आपने मेहनत करनी छोड़ दी थी, इसलिए आप बीमार थे। अब आपने फिर से मेहनत की, तो आपका शरीर खुद ब खुद ठीक हो गया।'
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है और इस धन को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय रहना बहुत जरूरी है। हमारी आधी बीमारियाँ और मानसिक तनाव सिर्फ आलस और बैठे रहने के कारण होते हैं। अगर हम अपने शरीर से काम लें, व्यायाम करें और मन को किसी सकारात्मक काम में व्यस्त रखें, तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी हमारे पास नहीं आ सकती। असली इलाज दवाइयों में नहीं, बल्कि हमारी सही जीवनशैली में होता है।











