भागलपुर: सरस्वती पूजा 2026 की तैयारियां शुरू, 23 जनवरी को होगी पूजा

भागलपुर: सरस्वती पूजा 2026 की तैयारियां शुरू, 23 जनवरी को होगी पूजा

भागलपुर - सरस्वती पूजा 2026 को लेकर भागलपुर समेत पूर्व बिहार में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष सरस्वती पूजा 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

पंचांग के अनुसार इस दिन पूजा के लिए पूरे दिन शुभ योग बना रहेगा, जिससे श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार मां सरस्वती की आराधना कर सकेंगे। हालांकि ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक एक विशेष समय ऐसा भी है, जिसमें पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 23 जनवरी को पूर्वाह्न 11:40 बजे से अपराह्न 12:28 बजे तक का समय सरस्वती पूजा के लिए सबसे उत्तम बताया गया है। इस अवधि में पूजा-अर्चना करने से विद्या, बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि होती है। खासतौर पर छात्र-छात्राओं के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान की गई पूजा से पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

हालांकि पंचांग यह भी बताता है कि दिन भर शुभता बनी रहने के कारण यदि कोई श्रद्धालु या विद्यार्थी विशेष मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाता है, तो वह दिन के अन्य समय में भी विधि-विधान से पूजा कर सकता है। सुबह से लेकर शाम तक पूजा, आरती और मंत्र जाप के लिए अनुकूल स्थिति बनी रहेगी। इसी कारण स्कूलों, कॉलेजों और घरों में अलग-अलग समय पर पूजा आयोजन की तैयारी की जा रही है।

सरस्वती पूजा का विशेष महत्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, कलाकारों और संगीत से जुड़े लोगों के लिए होता है। इस दिन किताबों, कॉपियों, कलम और वाद्य यंत्रों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां सरस्वती की कृपा से ज्ञान का विकास होता है और बौद्धिक क्षमता मजबूत होती है। भागलपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंडालों और घरों में पूजा की तैयारी जोरों पर है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष पंचमी तिथि का संयोग पूजा के अनुकूल है, जिससे यह पर्व और भी खास बन गया है। कई स्थानों पर बच्चों को अक्षर ज्ञान कराए जाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। इसके साथ ही भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी योजना बनाई जा रही है।

कुल मिलाकर, सरस्वती पूजा 2026 इस बार शुभ संयोग लेकर आ रही है। 23 जनवरी को दिन भर पूजा का अवसर रहेगा, लेकिन पूर्वाह्न 11:40 से अपराह्न 12:28 बजे तक का समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों से अपील की जा रही है कि वे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा कर मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।

मुजफ्फरपुर में प्रशासन और आम लोगों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से अफसर–जनता संवाद कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस पहल को लेकर शहर और ग्रामीण इलाकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कहीं लोग अपनी समस्याएं और पीड़ा खुलकर अधिकारियों के सामने रखते नजर आए, तो कहीं कार्यक्रम स्थलों पर खाली कुर्सियों ने इस पहल की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।

कार्यक्रम के दौरान कई स्थानों पर लोग अपनी वर्षों से लंबित समस्याएं लेकर पहुंचे। किसी ने भूमि विवाद, नाली-जलजमाव और सड़क से जुड़ी शिकायतें रखीं, तो किसी ने राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना और बिजली-पानी की समस्याओं को सामने रखा। आम लोगों का कहना था कि पहली बार उन्हें एक ही मंच पर अफसरों से सीधे बात करने का मौका मिला, जिससे यह उम्मीद जगी कि उनकी बात सुनी जाएगी और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने भी लोगों की समस्याएं ध्यान से सुनीं और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया।

हालांकि, सभी जगह तस्वीर एक जैसी नहीं रही। कुछ इलाकों में कार्यक्रम के दौरान अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुट पाई और कई कुर्सियां खाली नजर आईं। स्थानीय लोगों का मानना है कि या तो कार्यक्रम की सूचना समय पर और सही तरीके से लोगों तक नहीं पहुंची, या फिर पहले के अनुभवों के कारण लोगों का भरोसा कमजोर हो गया है। कई लोगों ने यह भी कहा कि पहले भी इस तरह के जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुए, लेकिन समस्याओं का समाधान धरातल पर नजर नहीं आया, इसी वजह से लोग अब ऐसे आयोजनों से दूरी बना रहे हैं।

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