भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) में अप्रैल 2026 के दौरान मजबूत सुधार देखने को मिला है। घरेलू मांग में तेजी, नए ऑर्डर और डिजिटल व लॉजिस्टिक्स सेवाओं की बढ़ती जरूरतों के चलते देश का सर्विस सेक्टर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह जानकारी HSBC के ताजा सर्वे में सामने आई है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के सेवा क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में मजबूत प्रदर्शन किया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। Purchasing Managers' Index (PMI) के अनुसार, भारत का सर्विस सेक्टर PMI बढ़कर 58.8 हो गया है, जबकि मार्च में यह 57.5 था। यह डेटा HSBC की सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है। यह वृद्धि दर्शाती है कि घरेलू मांग में तेजी, नए ऑर्डर और कारोबारी गतिविधियों में सुधार के चलते सेवा क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है।
PMI 58.8 पर पहुंचा, अर्थव्यवस्था में विस्तार का संकेत
HSBC के सर्वे के अनुसार, भारत का सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में बढ़कर 58.8 हो गया, जबकि मार्च में यह 57.5 था। यह पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। PMI का 50 से ऊपर रहना यह दर्शाता है कि आर्थिक गतिविधियों में विस्तार हो रहा है, जबकि 50 से नीचे गिरावट को संकेत करता है। इस लिहाज से 58.8 का स्तर सेवा क्षेत्र की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
घरेलू मांग बनी ग्रोथ की सबसे बड़ी ताकत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि का मुख्य कारण घरेलू मांग में तेजी है। प्रतिस्पर्धी कीमतों, बढ़ते नए ऑर्डर और ई-कॉमर्स गतिविधियों ने इस सेक्टर को मजबूती दी है। विशेष रूप से इन क्षेत्रों में मांग बढ़ी:
- ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाएं
- लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी नेटवर्क
- रिलोकेशन और सप्लाई चेन सेवाएं
- डिजिटल और आईटी आधारित सेवाएं
कंपनियों ने बताया कि घरेलू ग्राहकों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे उत्पादन और नए ऑर्डर दोनों में बढ़ोतरी देखी गई है।
विदेशी मांग में कमजोरी, घरेलू बाजार बना सहारा

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट Pranjul Bhandari के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में मांग का रुख विदेशी बाजारों से हटकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण विदेशी ऑर्डर की गति धीमी हुई है, लेकिन घरेलू मांग ने इस कमी की भरपाई की है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के सेवा निर्यात पर पड़ा है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर हुई है। इससे सेवा निर्यात आधारित कंपनियों की ग्रोथ थोड़ी धीमी हुई है, हालांकि घरेलू कारोबार ने संतुलन बनाए रखा।
सर्वे के अनुसार, खाद्य तेल, अंडे, मांस, सब्जियां, गैस और श्रम लागत में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ी है। हालांकि, कई कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला, जिससे सेवा शुल्कों में महंगाई की दर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई।
रोजगार में सुधार के संकेत
सेवा क्षेत्र में रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने नए ऑर्डर बढ़ने के कारण अस्थायी कर्मचारियों और जूनियर स्तर के कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई है। यह वृद्धि विशेष रूप से आईटी, ई-कॉमर्स और सप्लाई चेन सेवाओं में देखी गई है। HSBC India Composite PMI अप्रैल में बढ़कर 58.2 पर पहुंच गया, जो मार्च में 57.0 था। यह संकेत देता है कि केवल सेवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समग्र आर्थिक गतिविधियों में भी सुधार हो रहा है।









