भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार ने बुधवार को जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे उच्चतम आंकड़ा है।
नई दिल्ली: भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है और पिछले वर्षों की तुलना में भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक आधार को दर्शाता है। रक्षा मंत्रालय ने इसे देश की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति की बड़ी सफलता बताया है।
15.6% की सालाना वृद्धि, लगातार तेज़ रफ्तार
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन का आंकड़ा ₹1.54 लाख करोड़ था। इस तुलना में FY26 में इसमें 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अगर दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो:
- FY 2020-21: ₹84,643 करोड़
- FY 2024-25: ₹1.54 लाख करोड़
- FY 2025-26: ₹1.78 लाख करोड़
इस तरह पिछले पांच वर्षों में रक्षा उत्पादन दोगुने से अधिक हो गया है, जबकि 2013-14 के मुकाबले यह लगभग चार गुना वृद्धि को दर्शाता है।
रक्षा मंत्री ने बताया ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बड़ी उपलब्धि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नीति सुधारों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि भारत के मजबूत होते रक्षा औद्योगिक ढांचे का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि सरकारी रक्षा उपक्रमों, निजी उद्योगों और नीति निर्माताओं के संयुक्त प्रयासों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को संभव बनाया है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और अधिक तेजी से आगे बढ़ेगा।
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निजी क्षेत्र की भागीदारी में बढ़ोतरी
रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। FY26 के आंकड़ों के अनुसार:
- सरकारी कंपनियां (DPSUs और अन्य PSU): लगभग 76% योगदान
- निजी क्षेत्र: लगभग 24% योगदान
पिछले वर्ष की तुलना में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई है। FY25 में यह लगभग 22% थी, जो अब बढ़कर 24% हो गई है। निजी क्षेत्र ने FY26 में करीब ₹42,000 करोड़ का रक्षा उत्पादन किया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारत के रक्षा उद्योग में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका और तकनीकी क्षमता का संकेत है।
रक्षा निर्यात में भी ऐतिहासिक बढ़त
रक्षा उत्पादन में वृद्धि का सकारात्मक असर देश के निर्यात पर भी दिखाई दिया है। FY26 में भारत ने रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ का रक्षा निर्यात किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा निर्यात आंकड़ा है। भारत अब न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपने रक्षा उपकरणों की आपूर्ति बढ़ा रहा है।
सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत धीरे-धीरे रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम कर रहा है और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत कर रहा है। नई रक्षा नीतियों, ‘मेक इन इंडिया’ पहल और निजी क्षेत्र के प्रवेश ने इस क्षेत्र में तेजी लाई है।









