भारत में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। Census of India 2027 के तहत पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल स्व-जनगणना (Self Enumeration) की सुविधा शुरू की गई है।
नई दिल्ली: Census of India 2027 के तहत जनगणना प्रक्रिया को अधिक सुगम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के उद्देश्य से स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प 16 अप्रैल से आम जनता के लिए शुरू कर दिया गया है। यह सुविधा आगामी 30 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी। इस पहल के तहत लोग स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे जनगणना प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होने की उम्मीद है।
क्या है स्व-जनगणना की नई व्यवस्था?
डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। Office of the Registrar General and Census Commissioner India द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया गया है।यह सुविधा निर्धारित पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध है, जहां नागरिक मोबाइल नंबर के जरिए पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी जनगणना पूरी कर सकते हैं।
इस बार जनगणना को अधिक समावेशी बनाने के लिए स्व-जनगणना फॉर्म को 16 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। इससे देश के विभिन्न भाषाई समूहों के लोगों को अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी भरने में आसानी होगी। यह पहल भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
फॉर्म में देने होंगे 33 सवालों के जवाब
स्व-जनगणना फॉर्म में कुल 33 प्रश्न शामिल हैं, जिनमें व्यक्ति और परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी मांगी जाती है। इसमें आमतौर पर निम्न प्रकार के विवरण शामिल होते हैं:
- परिवार के सदस्यों की संख्या
- आयु, लिंग और शिक्षा
- आवास और रहने की स्थिति
- रोजगार और आर्थिक गतिविधियां
यह डेटा भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है डिजिटल जनगणना?
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डिजिटल स्व-जनगणना से कई फायदे होने की उम्मीद है:
- समय की बचत: लोगों को घर बैठे जानकारी भरने की सुविधा
- पारदर्शिता: डेटा सीधे नागरिकों द्वारा दर्ज किया जाएगा
- सटीकता: मानवीय त्रुटियों में कमी
- तेजी: डेटा संग्रह और विश्लेषण की प्रक्रिया तेज होगी
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को डेटा-आधारित नीति निर्माण की दिशा में और मजबूत बनाएगा।
प्रशासन की अपील: बढ़-चढ़कर करें भागीदारी
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस डिजिटल पहल में सक्रिय रूप से भाग लें। अधिकारियों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करेंगे, तो जनगणना के आंकड़े अधिक सटीक और विश्वसनीय होंगे। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
स्व-जनगणना के बाद अगला चरण “हाउस लिस्टिंग” का होगा, जो 1 मई से 30 मई तक चलेगा। इस चरण में प्रत्येक घर, भवन और परिवार से संबंधित आधारभूत जानकारी एकत्र की जाएगी।









