भारत में जनसंख्या संतुलन बिगड़ता जा रहा है: सिक्किम में जन्मदर जापान से भी कम

भारत में जनसंख्या संतुलन बिगड़ता जा रहा है: सिक्किम में जन्मदर जापान से भी कम

देश कम फर्टिलिटी दर को लेकर चिंतित है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत की जनसंख्या 2050 तक तेजी से बुज़ुर्ग होती जा रही है। अनुमान है कि तब 60 साल से अधिक उम्र वाले लोग कुल जनसंख्या का लगभग 20% हिस्सेदार होंगे।

नई दिल्ली: भारत में जन्मदर में लगातार गिरावट चिंता का विषय बन रही है। देश में कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9–2.0 के बीच है, जबकि स्थिर जनसंख्या बनाए रखने के लिए 2.1 की दर आवश्यक है। खासकर Sikkim में जन्मदर 1.1 तक गिर गया है, जो जापान (TFR 1.3) और कई अन्य विकसित देशों से भी कम है।जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि कम जन्मदर आने वाले दशकों में भारत की आबादी को तेजी से बूढ़ा कर देगा और आर्थिक तथा सामाजिक संरचनाओं पर दबाव बढ़ाएगा। 

अनुमान है कि 2050 तक देश में 60 साल से अधिक उम्र वाले लोग कुल जनसंख्या का लगभग 20% होंगे। स्वतंत्रता के 100वें साल तक देश में बुजुर्गों की संख्या बच्चों से अधिक हो सकती है।

सिक्किम में जन्मदर की स्थिति

सिक्किम की TFR में गिरावट पिछले दो दशकों में तेज हुई है। National Family Health Survey (NFHS-5) के अनुसार, साल 2005–06 में सिक्किम की TFR 2.0 थी, 2015–16 में यह 1.2 हो गई और 2025–26 में घटकर 1.1 रह गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि कम जन्मदर के पीछे कई कारण हैं, जिनमें बांझपन, आर्थिक चिंताएं और परिवार नियोजन की बढ़ती जागरूकता शामिल हैं।

सिक्किम सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। 2022 में Vatsalya Yojana लागू की गई, जिसमें उन दंपतियों को IVF (In-Vitro Fertilization) जैसी महंगी इलाज प्रक्रियाओं के लिए 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना लागू होने के तुरंत बाद 38 महिलाओं ने इसका लाभ लिया।

सिक्किम ने सरकारी कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए वेतन वृद्धि और अन्य लाभ भी जोड़े। उदाहरण के लिए, दूसरे बच्चे पर वेतन वृद्धि, तीसरे बच्चे पर अतिरिक्त लाभ और महिला कर्मचारियों के लिए एक साल की मैटरनिटी लीव जैसी सुविधाएं दी गईं। निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी दूसरे और तीसरे बच्चे पर वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया।

सीमित सफलता और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

हालांकि इन योजनाओं का प्रभाव सीमित रहा है। सरकार अब National Research Institution के साथ मिलकर यह अध्ययन कर रही है कि सिक्किम में जन्मदर क्यों लगातार गिर रहा है। सिक्किम जैसी स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं है। कई विकसित और उभरते देशों में भी जन्मदर चिंता का कारण बना हुआ है।

  • सिंगापुर: TFR लगभग 1.0, सरकार दशकों से बेबी बोनस, टैक्स रिबेट, सस्ती चाइल्डकेयर और हाउसिंग इंसेंटिव जैसी योजनाएं चला रही है, लेकिन जन्मदर बहुत कम बना हुआ है।
  • दक्षिण कोरिया: 2023–24 में TFR लगभग 0.7 तक गिर गया। सरकार ने नकद सहायता, चाइल्डकेयर सब्सिडी और लंबी पेरेंटल लीव जैसी योजनाएं चलाईं, लेकिन असर नहीं दिखा।
  • जापान: TFR 1.3 है।
  • हंगरी: 2011 में TFR 1.23 था। सरकार ने हाउसिंग सब्सिडी, कम ब्याज पर कर्ज और चार या अधिक बच्चों वाली महिलाओं के लिए आयकर छूट जैसी नीतियां लागू कीं। 10 साल बाद TFR 1.5 तक बढ़ा, हालांकि यह भी रिप्लेसमेंट लेवल से कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जन्मदर में गिरावट से श्रम बल पर दबाव बढ़ेगा, पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भार आएगा और आर्थिक विकास दर धीमी हो सकती है। भारत को भी हंगरी जैसी नीतियों से सीखते हुए दीर्घकालीन रणनीति अपनाने की जरूरत है, जिसमें वित्तीय प्रोत्साहन, मातृत्व–पितृत्व लाभ, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सामाजिक जागरूकता शामिल हो।

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