भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय व्हिस्की, रम और सिंगल माल्ट निर्यात को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। शुल्क मुक्त पहुंच से कंपनियों को बाजार विस्तार और ब्रांड मजबूत करने का मौका मिलेगा।
नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नई ऊर्जा भर दी है। इस समझौते का सबसे बड़ा असर भारतीय अल्कोहलिक पेय उद्योग, खासकर व्हिस्की, रम और प्रीमियम स्पिरिट सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।
इस FTA के तहत भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) पहुंच मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
भारतीय व्हिस्की और स्पिरिट उद्योग को बड़ा लाभ
भारतीय शराब उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय ब्रांड्स की स्थिति मजबूत करेगा। Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies (CIABC) के अनुसार, यह समझौता खासकर भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
वर्तमान में न्यूजीलैंड में भारतीय स्पिरिट्स का निर्यात सीमित स्तर पर है, लेकिन FTA लागू होने के बाद इसमें तेज़ वृद्धि की उम्मीद है।
निर्यात के मौजूदा आंकड़े और संभावनाएं
भारत से न्यूजीलैंड को अल्कोहलिक उत्पादों का निर्यात अभी अपेक्षाकृत छोटा है। वित्त वर्ष 2024-25 में आंकड़े इस प्रकार रहे:
- बीयर निर्यात: लगभग 3.4 लाख डॉलर
- व्हिस्की निर्यात: लगभग 1.3 लाख डॉलर
- रम निर्यात: लगभग 40,000 डॉलर
अन्य श्रेणियां: नगण्य स्तर पर
हालांकि कुल निर्यात अभी सीमित है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि FTA के बाद यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।

सिंगल माल्ट व्हिस्की को मिलेगा वैश्विक मंच
भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है। अब न्यूजीलैंड जैसे विकसित बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने से इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारतीय प्रीमियम ब्रांड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग में मदद करेगा। इससे भारतीय कंपनियों को न केवल निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा, बल्कि ग्लोबल ब्रांड वैल्यू भी मजबूत होगी।
न्यूजीलैंड बाजार की विशेषताएं
न्यूजीलैंड में अल्कोहल बाजार में वाइन और बीयर का प्रभुत्व है, जबकि स्पिरिट्स की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। इसके बावजूद, प्रीमियम और इम्पोर्टेड स्पिरिट्स के लिए वहां एक स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाला उपभोक्ता वर्ग मौजूद है।
न्यूजीलैंड में शराब पर मुख्य रूप से उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लागू होता है, जो उत्पाद के प्रकार और अल्कोहल कंटेंट के आधार पर निर्धारित किया जाता है। आयात शुल्क पहले से ही कम हैं, लेकिन FTA के बाद व्यापार प्रक्रिया और अधिक सरल और स्थिर होने की उम्मीद है।
भारतीय कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस समझौते के बाद भारतीय अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियां न्यूजीलैंड बाजार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। शुल्क-मुक्त पहुंच के कारण:
- भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनेगी
- प्रीमियम ब्रांड्स को बेहतर मार्केट एंट्री मिलेगी
- लॉन्ग टर्म ब्रांड बिल्डिंग आसान होगी
- निर्यात मात्रा में तेजी से वृद्धि संभव होगी
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA भारतीय कंपनियों के लिए सिर्फ निर्यात बढ़ाने का अवसर नहीं है, बल्कि वैश्विक पहचान बनाने का भी एक बड़ा प्लेटफॉर्म है।
भारत के घरेलू बाजार पर संभावित प्रभाव
हालांकि इस समझौते का मुख्य फोकस निर्यात है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में न्यूजीलैंड से भारत में वाइन आयात में भी धीरे-धीरे वृद्धि हो सकती है।
भारत का वाइन बाजार अभी अपेक्षाकृत छोटा है और यह राज्य-स्तरीय कर नीतियों, वितरण व्यवस्था और उपभोक्ता जागरूकता पर निर्भर करता है। न्यूजीलैंड की उच्च गुणवत्ता वाली वाइन भारतीय बाजार में प्रीमियम सेगमेंट को प्रभावित कर सकती है।









