भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी में बड़ा विस्तार: समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए नया रोडमैप तैयार

नई दिल्ली में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति। समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, और इंडो-पैसिफिक में शांति के लिए संयुक्त रोडमैप पर काम तेज हुआ।

नई दिल्ली में India और Australia के बीच दूसरी रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई। Rajnath Singh और Richard Marles ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति के लिए संयुक्त रोडमैप पर प्रगति तेज करने पर सहमति जताई।

 नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रक्षा साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुंचाते हुए समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में आयोजित दूसरे रक्षा मंत्रियों की वार्ता के दौरान दोनों देशों ने जॉइंट मैरीटाइम सिक्योरिटी कोलैबोरेशन रोडमैप को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन को बढ़ावा देने के साझा लक्ष्य को और मजबूत करती है।

नई दिल्ली में उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता

इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स शामिल हुए। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में हुई प्रगति की सराहना की और भविष्य के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। चर्चा के केंद्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग, तकनीकी साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यास रहे।

समुद्री सुरक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम

दोनों देशों ने समुद्री डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। इस दिशा में समुद्री गश्ती विमानों के जरिए संयुक्त निगरानी गतिविधियों को आगे बढ़ाने, अंडरसी डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करने और भारतीय तटरक्षक बल तथा ऑस्ट्रेलिया के मैरीटाइम बॉर्डर कमांड के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह सहयोग समुद्री गतिविधियों की बेहतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने में मदद करेगा।

मुक्त, सुरक्षित और स्थिर इंडो-पैसिफिक पर जोर

बैठक में दोनों देशों ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि वे एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार का समर्थन किया। दोनों देशों का मानना है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन बेहद जरूरी है।

हिंद महासागर में संयुक्त अभ्यास और आपदा प्रतिक्रिया सहयोग

भारत और ऑस्ट्रेलिया, IORA के सह-अध्यक्ष के रूप में, चेन्नई स्थित मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर में एक संयुक्त सर्च एंड रेस्क्यू अभ्यास और टेबलटॉप एक्सरसाइज आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री आपदाओं के दौरान दोनों देशों की प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना और समन्वय को मजबूत करना है। इससे क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी तेजी आएगी।

भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी में बड़ा विस्तार: समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए नया रोडमैप तैयार

रक्षा उद्योग सहयोग में तेजी

दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया है। इस दिशा में रक्षा सामग्री और सेवाओं से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर काम शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही रक्षा अनुसंधान, नई तकनीकों और विशेष रूप से सेंसर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है। दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच बढ़ता संपर्क न केवल तकनीकी विकास को गति देगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत करेगा।

सैन्य अभ्यासों का बढ़ता दायरा

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैन्य सहयोग को और गहरा करते हुए कई संयुक्त अभ्यासों में भागीदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत की भागीदारी ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख अभ्यास टैलिसमैन साब्रे 2027 में बढ़ाई जाएगी, जबकि ऑस्ट्रेलिया भारत के अभ्यास मिलन 2026 में शामिल होगा। इसके अलावा काकाडू और पिच ब्लैक जैसे बहुपक्षीय अभ्यासों में भी दोनों देशों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। इससे दोनों सेनाओं के बीच परिचालन स्तर पर तालमेल और मजबूत होगा।

प्रशिक्षण और सैन्य शिक्षा में सहयोग

सैन्य प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। भारत का एक सैन्य प्रशिक्षक 2028-29 में ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में तैनात किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर अनुभव और रणनीतिक समझ का आदान-प्रदान होगा। यह कदम दीर्घकालिक रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

क्वाड सहयोग और समुद्री निगरानी नेटवर्क

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और जापान के साथ मिलकर क्वाड ढांचे के तहत समुद्री निगरानी सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन और सूचना संलयन केंद्र (Gurugram) के माध्यम से साझा समुद्री परिचालन चित्र विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों की निगरानी संभव होगी और सुरक्षा चुनौतियों पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।

रणनीतिक साझेदारी का नया चरण

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह बढ़ता रक्षा सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को प्रभावित करने वाला कदम है। दोनों देशों का साझा लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण तैयार करना है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हो और सभी देशों को समान अवसर मिलें।

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