भारतीय टेक स्टार्टअप ने चीन और जर्मनी को छोड़ा पीछे, वैश्विक रैंकिंग में हासिल किया तीसरा स्थान

भारतीय टेक स्टार्टअप ने बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए चीन और जर्मनी को पीछे छोड़ा। वैश्विक रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुँचकर इसने देश की तकनीकी क्षमताओं को

भारतीय टेक स्टार्टअप एक बार फिर वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर खरे उतरे हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम फंडिंग के मामले में चीन और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय टेक स्टार्टअप्स ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर फिर एक बार खुद को साबित किया है। ट्रैक्सन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत के टेक स्टार्टअप्स को कुल 10.5 अरब डॉलर की फंडिंग मिली, जिससे भारत फंडिंग के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। केवल अमेरिका और ब्रिटेन ही भारत से आगे हैं। यह उपलब्धि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाती है।

सालाना फंडिंग में हल्की गिरावट, लेकिन वैश्विक रैंकिंग मजबूत

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारतीय स्टार्टअप्स को 12.7 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 11 अरब डॉलर था। यद्यपि 2025 में फंडिंग में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, फिर भी भारत ने चीन और जर्मनी जैसे बड़े बाजारों को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में अपनी पकड़ मजबूत की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत है कि भारतीय स्टार्टअप्स केवल मौजूदा फंडिंग पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि उनका विकास और नवाचार क्षमता भी निवेशकों का भरोसा जीत रही है।

2025 में अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल 3.9 अरब डॉलर जुटाए, जो 2024 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि निवेशक उन स्टार्टअप्स पर भरोसा कर रहे हैं, जिनमें तेजी से विस्तार करने की क्षमता है। इसके विपरीत, सीड-स्टेज फंडिंग में 30 प्रतिशत की गिरावट आई और इस स्तर पर केवल 1.1 अरब डॉलर की फंडिंग मिली। वहीं, लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने 5.5 अरब डॉलर जुटाए, जो 2024 के आंकड़ों की तुलना में 26 प्रतिशत कम है।

किस सेक्टर में हुए बड़े सौदे

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में सबसे बड़े सौदे ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स टेक, पर्यावरण टेक और ऑटो टेक सेक्टर में हुए। इनमें एरिशा ई-मोबिलिटी ने एक अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की। क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने 30 करोड़ डॉलर जुटाए, जबकि ग्रीनलाइन ने 27.5 करोड़ डॉलर की पूंजी हासिल की।यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन टेक क्षेत्र निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक क्षेत्रों में से हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि महिला उद्यमियों के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। 2025 में महिला-नेतृत्व वाले टेक स्टार्टअप्स ने कुल 1 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की। इनमें जीवा ने 6.2 करोड़ डॉलर और एमनेक्स ने 5.2 करोड़ डॉलर जुटाए। यह दिखाता है कि भारत में महिला उद्यमिता लगातार निवेशकों का भरोसा जीत रही है और स्टार्टअप इकोसिस्टम में उनका प्रभाव बढ़ रहा है।

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