पटना में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी का अधिकार मार्च पुलिस ने जेपी गोलंबर पर रोक दिया। करीब 50 कार्यकर्ता मार्च में पहुंचे, जबकि 150 से अधिक पुलिसकर्मी और CRPF तैनात रहे। प्रदर्शनकारियों ने 70वीं BPSC परीक्षा की व्यापक जांच की मांग की।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी की ओर से 29 अगस्त को निकाला गया अधिकार मार्च जेपी गोलंबर पर पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण राजभवन तक नहीं पहुंच सका। गांधी मैदान से शुरू हुए मार्च में करीब 50 कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और बिहार में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई मांगें उठाईं।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने जेपी गोलंबर पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मौके पर 150 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ करीब 30 थानेदारों की तैनाती की गई। इसके अलावा CRPF के जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तीन स्तर की बैरिकेडिंग की थी।
गांधी मैदान से शुरू हुआ अधिकार मार्च
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के कार्यकर्ता सुबह पटना के गांधी मैदान में जुटना शुरू हुए। संगठन की योजना गांधी मैदान से राजभवन तक अधिकार मार्च निकालने की थी। मार्च का नेतृत्व संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जौहर आजाद कर रहे थे।
कार्यकर्ता गांधी मैदान से नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। मार्च का मुख्य उद्देश्य सरकार के सामने भर्ती परीक्षाओं और रोजगार से जुड़ी मांगों को उठाना था। प्रदर्शनकारियों ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा समेत कई भर्ती प्रक्रियाओं की जांच की मांग की।
हालांकि, मार्च को जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने रोक दिया। पुलिस ने पहले से ही इलाके में बैरिकेडिंग कर रखी थी और प्रदर्शनकारियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई।
जेपी गोलंबर पर तीन स्तर की सुरक्षा
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने जेपी गोलंबर पर सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया था। यहां तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई थी। सबसे आगे बांस की बैरिकेडिंग लगाई गई थी। इसके पीछे पुलिसकर्मियों की तैनाती थी, जबकि तीसरी सुरक्षा परत में CRPF के जवान मौजूद थे।
मौके पर 150 से अधिक पुलिसकर्मियों और करीब 30 थानेदारों की तैनाती की गई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से पीछे लौटने की अपील करती रही।
प्रशासन की ओर से की गई भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों की संख्या के बीच बड़ा अंतर भी नजर आया।
बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी
जेपी गोलंबर के पास रोके जाने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और बैरिकेडिंग हटाने का प्रयास भी किया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उनसे लगातार पीछे हटने की अपील की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल सभी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भी नारे लगाए गए। कार्यकर्ताओं ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
70वीं BPSC परीक्षा की व्यापक जांच की मांग
अधिकार मार्च के दौरान जारी किए गए पोस्टर में 70वीं BPSC परीक्षा की व्यापक जांच कराने की मांग की गई। संगठन ने BPSC चेयरमैन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवालों और शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए। उनका जोर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा पर है।
70वीं BPSC परीक्षा बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ी है। प्रदर्शन के जरिए संगठन ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग की।
बिहार की भर्तियों में 85 प्रतिशत डोमिसाइल नीति की मांग
अधिकार मार्च में बिहार की सभी सरकारी भर्तियों में 85 प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर मिलना चाहिए।
डोमिसाइल नीति के तहत स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार में आरक्षण या प्राथमिकता का मुद्दा कई राज्यों में राजनीतिक बहस का विषय रहा है। बिहार में भी इस मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठन समय-समय पर अपनी राय रखते रहे हैं।
भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने अपने प्रदर्शन में इस मांग को भी शामिल किया और सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।
BSSC-2 CGL सहित अन्य परीक्षाओं को रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने BSSC-2 CGL समेत कुछ अन्य परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी उठाई। संगठन का आरोप है कि इन परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
इसके अलावा, दरोगा के 1,799 पदों पर हुई भर्ती को लेकर भी न्यायिक जांच की मांग की गई। संगठन ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच से अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम करने में मदद मिलेगी।
इन मांगों को अधिकार मार्च के पोस्टरों में प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था। संगठन ने सरकार से भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
मधुबनी जिलाध्यक्ष ने एकजुट होने की अपील की
प्रदर्शन के दौरान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के मधुबनी जिलाध्यक्ष दिलीप कुमार राम ने कहा कि संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखता रहा है।
उन्होंने बहुजन, अल्पसंख्यक, EBC, दलित, मुस्लिम, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों सहित वंचित समुदायों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को अपनी मांगों के लिए संगठित तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों को मार्च में शामिल होना था और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था।
हालांकि, मौके पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च में करीब 50 कार्यकर्ता ही नजर आए।
प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस बल की तैनाती
जेपी गोलंबर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 50 बताई गई, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए 150 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 30 थानेदार तैनात किए गए थे। इसके अलावा CRPF को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया था।
भारी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। पुलिस ने मार्च को राजभवन की ओर जाने वाले मार्ग पर आगे नहीं बढ़ने दिया।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर के आसपास ही सीमित रहे। बैरिकेडिंग पर चढ़ने और उसे पार करने की कोशिश के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
राजभवन तक नहीं पहुंच सका मार्च
आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने अधिकार मार्च के जरिए अपनी मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने की योजना बनाई थी। लेकिन पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण प्रदर्शनकारी राजभवन तक नहीं पहुंच सके।
प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं की जांच, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार में प्राथमिकता और विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच जैसी मांगें उठाईं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी, लेकिन प्रशासन की ओर से भारी सुरक्षा बल तैनात होने के कारण मार्च को आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
इस प्रदर्शन के जरिए एक बार फिर बिहार में सरकारी भर्ती परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दे सार्वजनिक बहस के केंद्र में आए हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, परीक्षा से जुड़े विवादों की जांच और स्थानीय युवाओं को अधिक अवसर देने की मांग की है।
70वीं BPSC परीक्षा की व्यापक जांच की मांग के साथ BSSC-2 CGL और दरोगा भर्ती को लेकर उठाई गई मांगों से स्पष्ट है कि संगठन भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ सरकार के सामने रखना चाहता है।
अब इन मांगों पर राज्य सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के संबंध में भी प्रशासन की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।











