मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री आधाव अर्जुन की याचिका पर एमके स्टालिन और DMK IT विंग को नोटिस जारी किया। अर्जुन ने कथित मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए 1 करोड़ रुपये हर्जाना और भविष्य में ऐसी सामग्री पर रोक की मांग की है।
चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री आधाव अर्जुन की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और DMK नेता एमके स्टालिन तथा पार्टी की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विंग को नोटिस जारी किया। अर्जुन ने कथित मानहानिकारक बयानों के लिए स्टालिन और DMK IT विंग से 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। अर्जुन ने अदालत में दायर आवेदन में आरोप लगाया है कि DMK IT विंग के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक आरोप प्रकाशित किए गए। उनके मुताबिक, इस पोस्ट के कारण उनकी प्रतिष्ठा, सार्वजनिक छवि और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
मद्रास हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलकावती ने मामले की सुनवाई करते हुए एमके स्टालिन और DMK IT विंग को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है।
यह याचिका उस मूल मुकदमे से संबंधित है जिसमें अर्जुन ने कथित आपत्तिजनक और झूठे बयानों के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि भविष्य में भी उनके खिलाफ इसी तरह के कथित झूठे या मानहानिकारक बयान प्रकाशित नहीं किए जाने चाहिए।
अदालत की ओर से नोटिस जारी होना मामले में दोनों पक्षों को अपनी स्थिति रखने का अवसर देता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अदालत ने अभी आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
8 जून की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद
आधाव अर्जुन के अनुसार, विवाद की शुरुआत 8 जून 2026 को प्रकाशित एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उनका आरोप है कि DMK की IT विंग ने अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट से उनके बारे में ऐसी जानकारी प्रकाशित की, जिसे उन्होंने पूरी तरह गलत और मानहानिकारक बताया है।
अर्जुन ने अदालत में दावा किया कि पोस्ट को पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रकाशित किया गया था और इसे सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पोस्ट पार्टी नेतृत्व की जानकारी, निर्देश या स्वीकृति के तहत प्रकाशित की गई थी।
उनका कहना है कि DMK IT विंग संबंधित अकाउंट का आधिकारिक संचालन करती है, इसलिए पोस्ट के प्रकाशन और प्रसार की जिम्मेदारी भी उससे जुड़ती है।
अर्जुन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
याचिका में अर्जुन ने कहा कि उनके खिलाफ प्रकाशित आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था। उन्होंने विशेष रूप से एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया, जिसे कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से जोड़ते हुए उनका रिश्तेदार बताया गया था।
अर्जुन का दावा है कि जिस व्यक्ति का संदर्भ दिया गया, वह उनका रिश्तेदार तो दूर, करीबी रिश्तेदार भी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित जानकारी को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।
उनके अनुसार, इस तरह की सामग्री को सार्वजनिक मंच पर प्रसारित करने से उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ा।
पुलिस आयुक्त के पास शिकायत का भी हवाला
आधाव अर्जुन ने अपनी याचिका में एक पुलिस शिकायत का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति को ED से जुड़े मामले के संदर्भ में बताया जा रहा था, उसने स्वयं चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत देकर स्पष्ट किया था कि वह वह व्यक्ति नहीं है, जिसका संदर्भ संबंधित मामले में दिया जा रहा था।
अर्जुन का कहना है कि इसके बावजूद कथित सोशल मीडिया पोस्ट में उस व्यक्ति को उनसे जोड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे तथ्यों की अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कथित पोस्ट को सत्यापित तथ्य की तरह प्रस्तुत किया गया, जबकि उससे जुड़े दावों की पर्याप्त पुष्टि नहीं की गई थी।
स्टालिन की जिम्मेदारी पर उठाया सवाल
अर्जुन ने अदालत में यह तर्क भी दिया कि कथित पोस्ट को केवल किसी सोशल मीडिया कार्यकर्ता की व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि DMK IT विंग पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है और उसके कामकाज पर पार्टी नेतृत्व का नियंत्रण रहता है।
इसी आधार पर अर्जुन ने स्टालिन को भी कथित प्रकाशन के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में होने के कारण IT विंग की गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण रखते हैं।
हालांकि, ये सभी दावे याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए आरोप हैं। स्टालिन या DMK IT विंग का इस मामले में अंतिम न्यायिक रूप से निर्धारित दोष अभी सामने नहीं आया है।
1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
अर्जुन ने कथित मानहानि से हुए नुकसान के लिए 1 करोड़ रुपये के हर्जाने या मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित सामग्री ने उनकी प्रतिष्ठा, गरिमा, विश्वसनीयता और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया।
डिजिटल युग में राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कानूनी विवाद लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित किसी बयान की व्यापक पहुंच होती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकते हैं।
ऐसे मामलों में अदालत के सामने यह तय करना होता है कि संबंधित बयान तथ्य, राय, राजनीतिक आलोचना या कथित मानहानि की श्रेणी में आता है या नहीं।
भविष्य में ऐसे बयानों पर रोक की मांग
हर्जाने के अलावा अर्जुन ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि स्टालिन और DMK IT विंग को उनके खिलाफ इसी प्रकार के कथित झूठे और मानहानिकारक बयान प्रकाशित करने से रोका जाए।
उनकी याचिका का उद्देश्य केवल पहले प्रकाशित सामग्री को लेकर मुआवजा प्राप्त करना नहीं है, बल्कि भविष्य में भी इसी तरह की सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाना है।
यदि अदालत इस मामले में आगे कोई अंतरिम या अंतिम आदेश देती है, तो उसका असर राजनीतिक नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर होने वाले आरोप-प्रत्यारोप से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ सकती है चर्चा
यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें सत्तारूढ़ राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े प्रमुख नेताओं और सोशल मीडिया संचार को लेकर कानूनी प्रक्रिया शामिल है।
राजनीतिक दल अक्सर सोशल मीडिया को अपनी नीतियों और विरोधियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी नेता के खिलाफ प्रकाशित सामग्री को लेकर मानहानि का मुकदमा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
आधाव अर्जुन की याचिका पर अब अदालत में आगे की सुनवाई होगी। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में स्टालिन और DMK IT विंग की ओर से अपना पक्ष रखा जा सकता है। इसके बाद अदालत मामले में आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी किया है और मामले के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए कथित मानहानिकारक पोस्ट, उसके संदर्भ और उससे जुड़े सभी आरोपों की कानूनी स्थिति अदालत में आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।









