दिव्यांगजनों के लिए सम्मान और समान अवसर जरूरी: एचडी कुमारस्वामी, मंड्या में 299 लोगों को मिले सहायक उपकरण

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंड्या में 299 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण बांटे। उन्होंने समान अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन के लिए सहयोग की जरूरत बताई।

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मंड्या में 299 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन उनके दिल के करीब हैं और उन्हें सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, समान अवसर और आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

 मंड्या: केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक के मंड्या में दिव्यांगजनों के कल्याण और उनके अधिकारों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन उनके दिल के करीब हैं और समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें सहानुभूति के बजाय सम्मान के साथ जीवन जीने के लिए जरूरी अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मंड्या के अंबेडकर भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुमारस्वामी ने 299 दिव्यांगजनों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए। इनमें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल, कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र और अन्य जरूरत के अनुसार तैयार किए गए उपकरण शामिल थे। इन उपकरणों का वितरण स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ALIMCO) की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत किया गया।

कुमारस्वामी ने इस अवसर पर दिव्यांगजनों को लेकर अपनी पुरानी पहल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाई थी जिसके तहत दिव्यांगजन सीधे विधान सौध पहुंचकर अपनी समस्याएं रख सकते थे।

सहानुभूति नहीं, सम्मान और आत्मनिर्भरता की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, उन्हें ऐसा सहयोग और अवसर मिलना चाहिए जिससे वे सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।

उन्होंने कहा कि समाज में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवागमन और सामाजिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में सुविधाओं तक उनकी पहुंच बेहतर बनाना जरूरी है।

कुमारस्वामी के मुताबिक, सहायक उपकरण केवल किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे उसकी स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी को भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को उनके आत्मसम्मान और बेहतर जीवन से जोड़कर देखने पर जोर दिया।

50 लाख रुपये के उपकरण वितरित

कार्यक्रम के दौरान करीब 299 लाभार्थियों को कुल लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। यह पहल SAIL और ALIMCO की CSR गतिविधियों के माध्यम से संचालित की गई।

इन उपकरणों में जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रकार के संसाधन शामिल थे। बैटरी चालित ट्राइसाइकिल से आवागमन में सहायता मिलने की उम्मीद है, जबकि कृत्रिम अंग और श्रवण यंत्र जैसी सुविधाएं लाभार्थियों की दैनिक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता को आसान बना सकती हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि इस तरह की पहलों को केवल एक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास के तौर पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में डिजिटल सुविधा

मंड्या दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कई CSR प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन किया। उन्होंने मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) में डिजिटल असेसमेंट सिस्टम का उद्घाटन किया।

इस सुविधा को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की CSR निधि से करीब एक करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया है। डिजिटल प्रणाली के जरिए स्वास्थ्य संबंधी मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

कुमारस्वामी ने अस्पताल का दौरा कर इस नई सुविधा का निरीक्षण भी किया। उन्होंने CSR के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकारी स्कूल में दो नए स्मार्ट क्लासरूम

केंद्रीय मंत्री ने मंड्या के हल्ली गांव स्थित सरकारी स्कूल का भी दौरा किया। यहां उन्होंने CSR फंड से तैयार किए गए दो सुसज्जित कक्षों का उद्घाटन किया। इन कक्षों के निर्माण के लिए आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AM/NS India) की ओर से करीब 32.50 लाख रुपये का अनुदान दिया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में CSR के उपयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि स्कूलों में बेहतर बुनियादी ढांचा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ विद्यार्थियों को तकनीकी और आधुनिक संसाधनों से परिचित कराने में भी मदद मिलेगी।

मंड्या में नए कक्षों की आधारशिला

कुमारस्वामी ने मंड्या शहर स्थित पूर्व म्युनिसिपल कॉलेज में दो नए कक्षों के निर्माण की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना के लिए भी AM/NS India की CSR पहल के तहत 32.50 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है।

इस तरह केंद्रीय मंत्री के मंड्या दौरे के दौरान दिव्यांग कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। इन विभिन्न CSR परियोजनाओं में कुल लगभग 2.15 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित गतिविधियां शामिल रहीं।

शिक्षा के बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता: कुमारस्वामी

हल्ली सरकारी स्कूल में नए कक्षों के उद्घाटन के बाद कुमारस्वामी ने शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार शिक्षा को उच्च प्राथमिकता दे रही है।

उनके अनुसार, स्कूलों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न स्तरों पर कदम उठा रही है। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से युक्त शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कुमारस्वामी ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार भी है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण है।

CSR से स्थानीय विकास को मिल रहा सहारा

मंड्या में सामने आई परियोजनाएं यह भी दिखाती हैं कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने से लेकर अस्पतालों में डिजिटल सुविधाएं विकसित करने और सरकारी स्कूलों में नए कक्ष बनाने तक, इन परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करना है।

CSR गतिविधियों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए स्थानीय जरूरतों की पहचान और लाभार्थियों तक सुविधाओं की सीधी पहुंच महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंड्या में शुरू की गई इन पहलों से संबंधित संस्थानों और लाभार्थियों को आने वाले समय में सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

दिव्यांग कल्याण और सामाजिक समावेशन पर जोर

कुमारस्वामी के बयान का प्रमुख संदेश दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में समान अवसर देने से जुड़ा रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों को केवल सहायता प्राप्त करने वाले वर्ग के रूप में देखने के बजाय उन्हें समान अधिकार और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।

उनके मुताबिक, आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने से दिव्यांगजन अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए सरकार, उद्योग जगत और समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

मंड्या में आयोजित कार्यक्रम में सहायक उपकरणों का वितरण इसी दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया। वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े CSR प्रोजेक्ट्स ने जिले में सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया।

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