भिवाड़ी के जैगवार प्लांट में निर्माणाधीन पानी की टंकी की दीवार गिरने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। हादसे में तीन मजदूर घायल हुए हैं। मजदूरों ने निर्माण में लापरवाही और क्षमता से अधिक पानी भरने का आरोप लगाया है।
खैरथल-तिजारा: राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में एक निर्माणाधीन प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक पानी की टंकी की दीवार अचानक ढह जाने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुई और इसके बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसा उस समय हुआ जब मजदूरों के बच्चे अपनी मां के साथ टंकी के पास नहाने गए थे। अचानक टंकी की दीवार भरभराकर गिर गई और वहां मौजूद लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय मजदूरों और बचाव दल ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
तीन बच्चों की मौत से परिवारों में मातम
इस दुर्घटना में चार वर्षीय मीनू की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं उसके दो भाई, आठ वर्षीय ज्योतिष और बारह वर्षीय शिवम गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन देर रात उपचार के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई। एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
पांच दिन पहले ही तैयार हुई थी टंकी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस पानी की टंकी की दीवार गिरी, उसका निर्माण मात्र पांच दिन पहले ही पूरा हुआ था। निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों का आरोप है कि टंकी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई थी और उसकी दीवारें अभी पर्याप्त रूप से सूखी या तैयार नहीं थीं।
मजदूरों का कहना है कि इसके बावजूद टंकी में बड़ी मात्रा में पानी भर दिया गया, जिससे दीवार पर अत्यधिक दबाव पड़ा और वह अचानक ढह गई। इस दावे ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के समय बच्चे टंकी के पास नहा रहे थे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार निर्माणाधीन प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के साथ साइट पर रहते थे। घटना वाले दिन भी कुछ बच्चे अपनी मां के साथ पानी की टंकी के पास नहा रहे थे।
इसी दौरान टंकी की दीवार अचानक गिर गई और बच्चे मलबे की चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चीख-पुकार सुनकर अन्य मजदूर मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।
तीन अन्य लोग घायल, हालत स्थिर
दुर्घटना में तीन अन्य लोग भी घायल हुए हैं। इनमें बच्चों की मां अरुणा, मजदूर श्रीमणि और जीतू शामिल हैं। सभी घायलों को भिवाड़ी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार घायलों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है और उनका उपचार जारी है। चिकित्सक लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
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निर्माण कंपनी और ठेकेदार पर उठे सवाल
हादसे के बाद निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी और परियोजना प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार यह परियोजना एक निजी निर्माण कंपनी द्वारा विकसित की जा रही थी और निर्माण कार्य अभी जारी था।
मजदूरों का आरोप है कि सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि टंकी के निर्माण के तुरंत बाद उसमें अपेक्षा से अधिक पानी भर दिया गया, जबकि संरचना पूरी तरह तैयार नहीं थी। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह निर्माण संबंधी गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है।
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
स्थानीय पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई औपचारिक लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की परिस्थितियों को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि टंकी के निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी खामी थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित कंपनी, ठेकेदारों या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रवासी मजदूरों के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक बच्चों का परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है, जबकि घायलों में शामिल कुछ मजदूर पश्चिम बंगाल से हैं। बेहतर रोजगार की तलाश में ये परिवार पिछले दो वर्षों से भिवाड़ी में रह रहे थे और निर्माण कार्य में लगे हुए थे। हादसे ने प्रवासी मजदूरों के जीवन से जुड़े उन कठिन पहलुओं को भी उजागर किया है, जहां परिवार अक्सर निर्माण स्थलों पर ही रहने को मजबूर होते हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह दुर्घटना एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताओं को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माणाधीन संरचनाओं के आसपास बच्चों और गैर-कर्मचारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए।
साथ ही किसी भी नई संरचना को उपयोग में लेने से पहले उसकी तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य होना चाहिए। ऐसे हादसे बताते हैं कि सुरक्षा में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।








