बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha ने राज्य में खुले में मांस की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का मांस या मछली खुले में बेचा नहीं जाएगा। इस फैसले के बाद राजनीति में तेज बहस शुरू हो गई है।
पटना: बिहार में खुले में मांस और मछली की बिक्री पर नई पाबंदी के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में खुले में मांस-मछली बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया है। उनके आदेश के अनुसार, अब किसी भी तरह का मांस या मछली सड़क किनारे या खुले स्थानों पर बेचा नहीं जाएगा। इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने इस पर जोरदार प्रतिक्रिया दी है।
मुकेश सहनी का बयान: हिंदू-मुस्लिम नरेटिव पर हमला
मुकेश सहनी ने इस पाबंदी को जातीय और धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कहा, "यह तो सब जानते हैं कि हिंदू-मुसलमान का नैरेटिव सेट करने के लिए पहले चिकन और मटन से शुरू हुआ और अब मछली पर आ गया है। यह सीधे तौर पर मछुआरों और कुछ धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश है। सहनी ने आगे कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला अचानक लिया गया और बिना किसी योजना के लागू किया गया।
उनका कहना था कि "कुछ दिन पहले ही बिहार के डिप्टी सीएम ने आदेश दे दिया कि कोई भी मछुआरा अब मछली नहीं बेचेगा, मांस नहीं बेचेगा। ऐसा लगता है कि सबकुछ अपने तरीके से किया जा रहा है।

पूर्व मंत्री का ब्लूप्रिंट: व्यवस्थित मछली बाजार
मुकेश सहनी ने इस फैसले के पीछे व्यवस्थित योजना की कमी को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि वीआईपी के समय उन्होंने बिहार में मछली और मांस बिक्री को व्यवस्थित करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कराया था। इस योजना के तहत हर साल लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करके स्मार्ट मछली बाजार और मांस बाजार बनाए जाने थे।
सहनी ने कहा, हमारा उद्देश्य सड़क किनारे मछली बेचने वालों को हटाना नहीं था, बल्कि उन्हें व्यवस्थित और सुरक्षित जगहों पर व्यापार करने का अवसर देना था। यदि बाजार बनाए जाएंगे, तो लोग वहां मछली, मटन और चिकन बेच सकेंगे, और सभी के लिए एक साफ-सुथरा व्यवसायिक माहौल बनेगा।
खुले में बिक्री पर रोक: विरोध और सुझाव
मुकेश सहनी ने सरकार से आग्रह किया कि पाबंदी लगाने से पहले राज्य के सभी शहरों और ग्रामीण इलाकों में पहले विकसित मछली बाजार स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा, पहले बाजार तैयार करें, फिर किसी भी तरह की बिक्री पर रोक लगाएं। ऐसा करने से मछुआरों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान नहीं होगा और व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलेगी।
उनका मानना है कि बिना योजना के अचानक लागू की गई पाबंदी से केवल गरीब मछुआरों और छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा, जबकि नीति का उद्देश्य और व्यापक लाभ अधूरा रह जाएगा।












