बिहार की ममता कार्यकर्ताओं को बड़ा तोहफा, प्रोत्साहन राशि बढ़ी; 6.60 करोड़ का बजट मंजूर

बिहार सरकार ने ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि 300 से बढ़ाकर 600 रुपये कर दी है। इसके लिए 6.60 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।

बिहार सरकार ने ममता कार्यकर्ताओं के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 6.60 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन बजट निर्धारित किया है। प्रति प्रसव मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दी गई है, जिससे राज्य की लगभग 25 हजार कार्यकर्ताओं को लाभ मिलेगा।

 पटना: बिहार सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ममता कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी घोषणा की है। राज्य में कार्यरत करीब 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं को अब प्रति संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 6.60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

ममता कार्यकर्ताओं के लिए बढ़ाया गया प्रोत्साहन बजट

राज्य सरकार ने ममता कार्यकर्ताओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रोत्साहन राशि के बजट में वृद्धि की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में इन कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन भुगतान के लिए 6.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राशि भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

सरकार का मानना है कि ममता कार्यकर्ताओं के योगदान से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

प्रति प्रसव अब मिलेंगे 600 रुपये

ममता कार्यकर्ताओं को पहले प्रति प्रसव 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान को देखते हुए की गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में योजना शुरू होने पर यह राशि केवल 100 रुपये थी। बाद में इसे बढ़ाकर 300 रुपये किया गया और अब इसे दोगुना कर 600 रुपये कर दिया गया है।

25 हजार कार्यकर्ता निभा रही हैं अहम भूमिका

बिहार के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 25 हजार ममता कार्यकर्ता सेवाएं दे रही हैं। ये कार्यकर्ता मेडिकल कॉलेजों, सदर अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, रेफरल अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत हैं।

इनकी मुख्य जिम्मेदारी गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना, प्रसव के दौरान सहयोग देना और प्रसव के बाद मां एवं नवजात की देखभाल सुनिश्चित करना है।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी

ममता कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। वे महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, स्तनपान, पोषण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जागरूक करती हैं। उनकी सक्रिय भूमिका के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों में प्रसव कराने की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन कार्यकर्ताओं ने मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई संकेतकों में सुधार लाने में योगदान दिया है।

कई जिलों को मिला विशेष बजट

सरकार ने विभिन्न जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया है। कटिहार, पूर्णिया, सारण, समस्तीपुर, भागलपुर, मधुबनी और वैशाली जैसे जिलों को अपेक्षाकृत अधिक बजट आवंटित किया गया है।

इसके अलावा कई मेडिकल कॉलेज और बड़े सरकारी अस्पताल भी इस योजना के तहत शामिल हैं, जहां ममता कार्यकर्ताओं की सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी से ममता कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगी। इससे संस्थागत प्रसव को और बढ़ावा मिलेगा तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

सरकार का उद्देश्य है कि राज्य की हर गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके। ममता कार्यकर्ताओं को दी जा रही यह अतिरिक्त आर्थिक सहायता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a comment