बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बढ़ा: दिल्ली में बीजेपी कोर कमेटी की बैठक टलीc

बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। Bharatiya Janata Party की कोर कमेटी की बैठक टलने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई

दिल्ली में Bharatiya Janata Party की बिहार कोर कमेटी की बैठक अंतिम क्षणों में रद्द होने के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। इस बैठक में शामिल होने के लिए बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरवागी दिल्ली पहुंचे थे।

नई दिल्ली: बिहार में नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी चर्चाओं के बीच दिल्ली में प्रस्तावित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कोर कमेटी की अहम बैठक अंतिम समय में रद्द कर दी गई। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं और नेतृत्व चयन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा तथा प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे थे। इसके अलावा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षित थी। हालांकि, अंतिम क्षणों में बैठक रद्द होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

बैठक रद्द होने से क्यों बढ़ा सस्पेंस?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बिहार में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे को लेकर अभी तक पूरी तरह आम सहमति नहीं बन पाई है। सबसे अधिक चर्चा में चल रहे नाम सम्राट चौधरी पर पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच इस नाम को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके चलते अंतिम समय में बैठक स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

आधिकारिक तौर पर बैठक टलने का कारण अन्य राजनीतिक व्यस्तताओं और संगठनात्मक कारणों को बताया गया, लेकिन अंदरखाने इसे नेतृत्व चयन में मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है।

नीतीश कुमार फैक्टर भी बना अहम कारण

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का प्रभाव हमेशा निर्णायक रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में उनके रुख को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन में संतुलन बनाए रखने और सहयोगी दलों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बीजेपी बेहद सतर्क कदम उठा रही है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी निर्णय से गठबंधन में असंतोष न पैदा हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता संतुलन को देखते हुए बीजेपी किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचना चाहती है। बैठक के अचानक टलने के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या बीजेपी के भीतर नेतृत्व चयन को लेकर आंतरिक असहमति बढ़ रही है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बिहार जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर आम सहमति बनाना आसान नहीं होता, खासकर जब कई प्रभावशाली नेता इस दौड़ में शामिल हों।

केंद्रीय पर्यवेक्षक की भूमिका होगी निर्णायक

सूत्रों के अनुसार, अब भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर सकता है। यह पर्यवेक्षक बिहार जाकर विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेगा और अंतिम राय तैयार करेगा। इसके बाद पटना में विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी।

पार्टी के भीतर यह रणनीति पहले भी कई राज्यों में अपनाई जा चुकी है, जब नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए हों। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बीजेपी इस बार बिहार में हर कदम बहुत सोच-समझकर उठा रही है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गठबंधन सहयोगी दल नीतीश कुमार के साथ संबंधों में किसी तरह की दरार न आए।

Leave a comment