बिहार में प्याज के दाम 57% तक बढ़े, दरभंगा में ₹60 किलो तक पहुंची कीमत; जानें तेजी की वजह

: बिहार के दरभंगा में प्याज के दाम दो हफ्ते में 57% तक बढ़कर ₹60 प्रति किलो पहुंचे। बारिश, कम आवक और त्योहारों में बढ़ी मांग से कीमतें बढ़ीं।

दरभंगा में दो सप्ताह में प्याज की कीमत 57 प्रतिशत तक बढ़कर ₹50-60 प्रति किलो हो गई है। त्योहारों में बढ़ी मांग, बारिश और आवक घटने से बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है। प्रशासन जमाखोरी पर निगरानी रख रहा है।

दरभंगा: बिहार में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डाला है। दरभंगा के बाजारों में पिछले दो सप्ताह में प्याज के दाम 57 प्रतिशत तक बढ़े हैं। पहले ₹35-40 प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब ₹50-55 और कुछ खुदरा बाजारों में ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गया है। त्योहारों की बढ़ी मांग और कम आवक को कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

त्योहारों में बढ़ी मांग से प्याज पर दबाव

दरभंगा जिले में रोजाना करीब 40 से 60 टन प्याज की खपत होती है। त्योहारों के मौसम में इसकी मांग करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। मांग में इस वृद्धि के साथ आपूर्ति प्रभावित होने से प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

पिछले दो सप्ताह में खुदरा बाजार में प्याज के दाम में करीब 57 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ₹35-40 प्रति किलो मिलने वाला प्याज अब सामान्य तौर पर ₹50-55 प्रति किलो बिक रहा है, जबकि कुछ बाजारों में इसकी कीमत ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई है।

बारिश से मंडियों में 30-40% घटी आवक

दरभंगा में प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से नासिक और मध्य प्रदेश से होती है। भारी बारिश और किसानों के दूसरी फसलों की ओर रुख करने से मंडियों में प्याज की आवक प्रभावित हुई है।

स्थानीय मंडियों में प्याज की आवक करीब 30 से 40 प्रतिशत तक घटने की जानकारी सामने आई है। आपूर्ति कम होने का असर थोक बाजार से लेकर खुदरा बाजार तक दिखाई दे रहा है।

थोक बाजार में प्याज की कीमत फिलहाल करीब ₹44-46 प्रति किलो है। थोक भाव बढ़ने का सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में थोक बाजार में कीमत बढ़ने की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।

सरकारी बफर स्टॉक की पहुंच सीमित

स्थानीय बाजार में सरकारी बफर स्टॉक की सीधी खुदरा पहुंच सीमित होने के कारण उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिल पा रही है। बाजार में उपलब्ध प्याज की लागत बढ़ने से खुदरा विक्रेताओं के सामने भी ऊंचे दाम पर माल खरीदने की स्थिति बनी हुई है।

व्यापारियों के अनुसार, नासिक और इंदौर की मंडियों से प्याज महंगे दाम पर आ रहा है। इसका असर स्थानीय बाजार में उपभोक्ताओं को मिलने वाली कीमत पर पड़ रहा है।

लहसुन भी हुआ महंगा

प्याज के साथ लहसुन की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। एक सप्ताह पहले ₹140-180 प्रति किलो बिकने वाला लहसुन अब करीब ₹180-200 प्रति किलो पहुंच गया है।

दरभंगा में प्रतिदिन करीब 5 से 8 टन लहसुन की खपत होती है। प्याज और लहसुन दोनों के महंगे होने से घरेलू रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।

जमाखोरी पर प्रशासन की नजर

बढ़ती कीमतों के बीच जिला प्रशासन ने जमाखोरी और बिचौलियों के जरिए कृत्रिम कमी पैदा किए जाने की आशंका पर निगरानी बढ़ा दी है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुरेश कुमार के अनुसार, थोक विक्रेताओं को रोजाना अपना स्टॉक पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।

नियम के मुताबिक कोई भी थोक विक्रेता 30 दिनों से अधिक समय तक स्टॉक अपने पास नहीं रख सकता। प्रशासन का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बफर स्टॉक की उपलब्धता बढ़ने के बाद कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

अक्टूबर-नवंबर तक राहत की उम्मीद

बाजार समिति से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, अगले एक-दो महीनों में प्याज की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। नई फसल की आवक अक्टूबर के मध्य या नवंबर की शुरुआत में होने की उम्मीद है।

नई फसल बाजार में आने के बाद आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं को प्याज के लिए पहले की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

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